झंडा सत्याग्रह किस प्रकार हुआ ? वर्णन कीजिए ।

उत्तर – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में चरखा युक्त तिरंगे झण्डे की आन – बान – शान को लेकर एक ऐसा प्रसंग उपस्थित हो गया , जिसमें न केवल राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्पूर्ण राष्ट्र की श्रद्धा और निष्ठा की मुखर अभिव्यक्ति हुई , बल्कि अंग्रेजी हुकूमत तक को उसे मान्य करने पर विवश होना पड़ा । इतिहास के इस स्वर्णिम अध्याय को ‘ झण्डा सत्याग्रह ‘ के नाम से जाना जाता है । असहयोग आन्दोलन की मानसिक तैयारी की पड़ताल के लिए गठित कांग्रेस की समिति जबलपुर आई । हकीम अजमल खाँ उसके नेता थे । जबलपुर काँग्रेस कमेटी ने तय किया कि खाँ साहेब को अभिनन्दन – पत्र भेंट किया जाएगा और जबलपुर नगरपालिका भवन पर राष्ट्रीय तिरंगा ध्वज फहराया जाएगा । यह सम्मान गोरे डिप्टी कमिश्नर को ब्रिटिश हुकूमत का अपमान व चुनौती देता हुआ प्रतीत हुआ और वह भड़क उठा । उसने पुलिस को हुक्म दिया कि तिरंगे झण्डे को न केवल उतार दिया जाये , बल्कि पैरों से कुचला जाये , जिसका परिणाम स्वाभाविक रूप से तीव्र जनाक्रोश के रूप में फूटा और आन्दोलन आरम्भ हो गया , जिसने कुछ ही महीनों में अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण कर लिया । अंग्रेज हुकूमत की अपमानजनक कार्यवाही के विरोध में पं . सुन्दरलाल , सुभद्रा कुमारी चौहान , नाथूराम मोदी , नरसिंह दास अग्रवाल , लक्ष्मणसिंह चौहान तथा कुछ अन्य स्वयंसेवकों ने झण्डे के साथ जुलूस निकाला । 

 

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