भारत का आण्विक शक्ति के रूप में विकास किस प्रकार हुआ ?

उत्तर – भारत की परमाणु नीति के सिद्धान्त- भारत की परमाणु नीति को उसकी विदेश नीति के मूल 

( 1 ) राष्ट्रीय सुरक्षा

( 2 ) आर्थिक विकास

( 3 ) विश्व व्यवस्था । 

सिद्धान्तों के संदर्भ में समझा जा सकता है । भारत की विदेश नीति के तीन मूलभूत सिद्धान्त है इसके अतिरिक्त भारत उपनिवेशवाद , साम्राज्यवाद , रंगभेद का विरोध करते हुए परस्पर सह अस्तित्व , सभी राष्ट्रों से मित्रता एवं अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव की नीति में विश्वास रखता है । भारत की परमाणु नीति का लक्ष्य अपनी सुरक्षा एवं विकास को सुनिश्चित करना है और यह भी ध्यान में रखना है कि एक ऐसे विश्व की स्थापना हो जो सहयोग , सद्भाव और शांति पर आधारित हो । भारत के प्रधानमंत्री पं . जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु बम न बनाने के संकल्प को अनेक अवसरों पर दोहराया । 

 

श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की रक्षा को अति महत्वपूर्ण विषय मानते हुए परमाणु नीति पर पुनर्विचार की बात कही । भारत की सीमाओं के निकट परमाणु अस्त्र क्षमता एवं प्रक्षेपास्त्रों की मौजूदगी के कारण आण्विक परीक्षण किये थे । भारत आरंभ से ही शांति दूत रहा है और उसने आण्विक शक्ति दूसरों पर अपनी प्रभुता स्थापित करने तथा दूसरे राष्ट्रों के मामलों में हस्तक्षेप प्राप्त करने के लिए नहीं की है ।

 

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