कश्मीर समस्या क्या है ? विस्तार से समझाइए ।

उत्तर – कश्मीर भारत की उत्तर – पश्चिम सीमा पर स्थित होने के कारण भारत और पाकिस्तान दोनों को जोड़ता है । कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी रियासत जम्मू – कश्मीर को स्वतंत्र रखने का निर्णय लिया । राजा हरीसिंह सोचते थे कि कश्मीर यदि पाकिस्तान में मिलता है , तो जम्मू की हिन्दू जनता और लद्दाख की बौद्ध जनता के साथ अन्याय होगा और यदि वह भारत में मिलता है , तो मुस्लिम जनता के साथ अन्याय होगा । अतः उसने यथा स्थिति बनाए रखी और विलय के विषय में तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया । 22 अक्टूबर , 1947 को उत्तर – पश्चिम सीमा प्रान्त के कबायलियों और अनेक पाकिस्तानियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया । पाकिस्तान कश्मीर को अपने में मिलाना चाहता था , अतः उसने अपनी सीमाओं पर सेना को इकट्ठा कर चार दिनों के भीतर ही हमला कर आक्रमणकारी श्रीनगर से 25 मील दूर बारामूला तक आ पहुंचे । कश्मीर के शासक ने आक्रमणकारियों से अपने राज्य को बचाने के लिए भारत सरकार से सैनिक सहायता मांगी , साथ ही कश्मीर को भारत में सम्मिलित करने की प्रार्थना की । 

 

भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और भारतीय सेनाओं को कश्मीर भेज दिया । संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए पांच राष्ट्रों चेकोस्लावाकिया , अर्जेण्टाइना , अमेरिका , कोलम्बिया और वेल्जियम के सदस्यों का एक दल बनाया । इस दल को मौके पर जाकर स्थिति का अवलोकन करना था और समझौते का मार्ग ढूँढना था । संयुक्त राष्ट्र संघ के दल ने मौके पर जाकर स्थिति का अध्ययन किया । दोनों पक्ष लम्बी वार्ता के बाद 1 जनवरी , 1949 को युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए । कश्मीर के विलय का निर्णय जनमत संग्रह के आधार पर होना था । जवाहरलाल नेहरू जनमत संग्रह की अपनी वचनबद्धता का पालन करना चाहते थे , परन्तु पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की शर्तों का उल्लंघन कर अधिकृत क्षेत्र ( आजाद कश्मीर ) से अपनी सेनाएं नहीं हटाई थीं । कबायली भी वहीं बने हुए थे । पं . नेहरू ने जब तक पाकिस्तान अपनी सेना नहीं हटा लेता , तब तक जनमत संग्रह से मना किया । कश्मीर के प्रश्न पर सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया । 

 

इस समर्थन से भारत की स्थिति मजबूत हो गयी । 6 फरवरी , 1954 को कश्मीर की विधान सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर जम्मू , कश्मीर राज्य का विलय भारत में करने की सहमति प्रदान की । भारत सरकार ने 14 मई , 1954 को संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 370 , के अंतर्गत जम्मू – कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया । 26 जनवरी , 1957 को जम्मू – कश्मीर को संविधान लागू हो गया । इसके साथ ही जम्मू – कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग बन गया । 

 

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