भारतीय संविधान की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ?

उत्तर- 1. लिखित एवं विशाल संविधान- 

भारत का संविधान लिखित और निर्मित संविधान है . जिसका निर्माण विधिवत् गठित संविधान सभा द्वारा किया गया है । भारत का संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है । भारत के वर्तमान संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं , जो 22 भागों में विभाजित हैं , जबकि अमेरिका के संविधान में 7 , कनाड़ा के संविधान में 147 और आस्ट्रेलिया के संविधान में 128 अनुच्छेद ही हैं । 

 

2. कठोरता एवं लचीलेपन का सम्मिश्रण- 

संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के आधार पर संविधान का वर्गीकरण कठोर अथवा लचीलेपन के रुप में किया जाता है । भारत के संविधान में संशोधन की तीन प्रक्रियाओं का उल्लेख है , जिसके अनुसार संविधान के कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से , कुछ प्रावधानों में विशिष्ट बहुमत से तथा महत्वपूर्ण शेष प्रावधानों में संसद के विशिष्ट बहुमत के साथ – साथ आधे राज्यों के अनुसमर्थन से बदले जा सकते हैं । इस दृष्टि से भारत का संविधान लचीलपन व कठोरता का सम्मिश्रण है । 

 

3. सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न – 

सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न का अर्थ यह है कि भारत अपनी आंतरिक व विदेश नीति का निर्धारण स्वयं करेगा । भारत पर किसी विदेशी सत्ता का अधिकार नहीं है व भारत अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी इच्छानुसार आचरण कर सकता है । 

 

4. संसदीय शासन प्रणाली- 

भारतीय संविधान द्वारा देश में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना की गई है । इस शासन प्रणाली में कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं तथा राष्ट्रपति नाममात्र का शासक होता है । 

 

5. संघात्मक शासन व्यवस्था- 

भारतीय संविधान के प्रथम अनुच्छेद के अनुसार भारत राज्यों का एक संघ हैं । इस प्रकार भारत में संघात्मक शासन की स्थापना की गई है । संविधान ने शासन की शक्ति को एक स्थान पर केन्द्रित न कर केन्द्र और राज्य सरकारों में विभाजित किया है और दोनों ही अपने – अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हैं । 

 

6. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका- 

नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा और संविधान की व्याख्या करने का अधिकार होने के कारण न्यायपालिका को स्वतंत्र घोषित किया गया है । संविधान न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन का अधिकार देता है , जिसके अन्र्तगत न्यायपालिका संसद तथा विधानमण्डलों द्वारा पारित कानूनों तथा कार्यपालिका द्वारा जारी ऐसे आदेशों को अवैध घोषित कर सकती हैं , जो संविधान के प्रतिकूल हैं । 

 

7. मौलिक अधिकार एवं मूल कर्त्तव्य- 

नागरिकों के सर्वांगीण विकास हेतु मौलिक अधिकार आवश्यक हैं । भारत के संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रावधान है । ये ऐसे अधिकार हैं , जो न्याय योग्य हैं , अर्थात् जिनका उल्लंघन होने पर नागरिक उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की शरण ले सकता है । संविधान के 42 वें संशोधन ( 1976 ) के द्वारा संविधान में एक नया प्रावधान ‘ मूलकर्तव्य जोड़ा गया है , उसके द्वारा नागरिकों के 10 कर्तव्य निश्चित किए गये हैं । 

 

8. सार्वभौम वयस्क मताधिकार- 

संविधान द्वारा भारतीय नागरिकों को सार्वभौम वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है । वयस्क मताधिकार का अर्थ प्रत्येक नागरिक को एक निश्चित आयु पर वोट ( मत ) देने के अधिकार से है । हमारे संविधान में यह मताधिकार 18 वर्ष की आयु प्राप्त सभी नागरिकों को किसी धर्म , वंश , जाति , वर्ण , लिंग , जन्मस्थान के भेदभाव के बिना समान रूप से दिया गया है । 

 

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