संघात्मक एवं संसदीय शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए ?

उत्तर – संघात्मक शासन व्यवस्था- जब किसी राष्ट्र के संविधान द्वारा केन्द्रीय व प्रान्तीय सरकारों के बीच शक्ति – विभाजन कर दिया जाता है और ऐसा प्रबन्ध कर दिया जाता है कि इन दोनों पक्षों में से कोई एक अकेला इस शक्ति – विभाजन में परिवर्तन न कर सके , उसे संघात्मक शासन कहते हैं । 

 

संघात्मक शासन की निम्न विशेषताएँ हैं- 

( 1 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में राज्य की इकाइयों को शक्तियाँ संविधान से प्राप्त होती हैं । 

( 2 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में संविधान द्वारा केन्द्रीय और स्थानीय सरकारों के बीच शक्ति का विभाजन कर दिया जाता है । 

( 3 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में संविधान की सर्वोच्चता होती है । 

( 4 ) संविधान की व्याख्या एवं रक्षा करने हेतु उच्चतम न्यायालय की स्थापना इस शासन व्यवस्था में की जाती है । संसदीय शासन व्यवस्था- संसदात्मक व्यवस्था वह शासन प्रणाली है , जिसमें वास्तविक कार्यपालिका उसके लोकप्रिय सदन के प्रति तथा अन्तिम रूप में निर्वाचन मण्डल के प्रति अपनी राजनीतिक नीतियों एवं कार्यों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होती है और राज्य का प्रधान नाममात्र तथा अनुत्तरदायी होता है । 

 

संसदीय शासन व्यवस्था की विशेषताएँ- 

( 1 ) इस शासन व्यवस्था में नाममात्र की व वास्तविक कार्यपालिका में भेद होता है । राज्य का प्रधान नाममात्र की कार्यपालिका व मंत्रिपरिषद् वास्तविक कार्य – पालिका होती है । 

( 2 ) इस व्यवस्था में व्यवस्थापिका एवं कार्यपालिका में घनिष्ट सम्बन्ध होता है । 

( 3 ) इस व्यवस्था में कार्यपालिका का कार्यकाल अनिश्चित होता है । 

( 4 ) इस व्यवस्था में संसद के प्रति मंत्रिमण्डल का सामूहिक उत्तरदायित्व होता है । 

 

Leave a Comment