पंचायती राज व्यवस्था को समझाते हुए स्थानीय संस्थाओं के कार्यों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर- पंचायती राज व्यवस्था – प्रदेश के ग्रामों में साफ – सफाई , स्वास्थ्य सेवाएँ , रोशनी , पीने का पानी आदि सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं । यदि गाँव छोटे हैं , तो वहाँ दो या दो से अधिक गांवों को मिलाकर ग्राम पंचायत बनती हैं । ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी अपने गाँवों का प्रबन्ध स्वयं करते हैं । गाँव के लिए यह व्यवस्था पंचायत राज व्यवस्था नाम से विख्यात है । महात्मा गाँधी पंचायती राज व्यवस्था के बड़े पक्षधर थे । वे यह मानते थे कि जब तक भारत के ग्रामों में जीवन का आधार लोकतान्त्रिक नहीं होगा , तब तक देश में वास्तविक लोकतन्त्र की स्थापना नहीं होगी । देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय शासन की स्थापना उन राज्यों के विधान मण्डलों द्वारा निर्मित कानूनों के अनुसार की गई है । इस कारण सभी राज्यों के स्थानीय शासन समान न होकर भिन्न – भिन्न प्रकार के हैं । 

 

मध्यप्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था का ढाँचा प्रकार का है- 

( 1 ) ग्रामों के लिए ग्राम सभा और ग्राम पंचायत । 

( 2 ) प्रत्येक विकास खण्ड के लिए जनपद पंचायत । 

( 3 ) प्रत्येक जिले के लिए जिला पंचायत । इस प्रकार पंचायतों के तीन स्तर हैं । स्थानीय संस्थाओं के कार्य- नगर पंचायत , नगर पालिका और नगर निगम के कार्य समान ही हैं । 

 

तीनों संस्थाएं अपने – अपने क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य करती हैं- 

( 1 ) सड़कों , सार्वजनिक भवनों में प्रकाश व्यवस्था करना । 

( 2 ) नगर की साफ – सफाई कराना । 

( 3 ) कांजी हाऊस खोलना और उनका प्रबन्ध करना । 

( 4 ) जन्म – मृत्यु पंजीयन । 

( 5 ) पानी की व्यवस्था । 

( 6 ) मकान , सड़क आदि की व्यवस्था । 

( 7 ) अग्निशामक यंत्र आदि से आग लगने पर सहायता करना । 

( 8 ) जनता के मनोरंजन हेतु मेलों आदि का आयोजन करना आदि । स्थानीय शहरी निकाय नागरिकों को अनेक प्रकार की सुविधाएँ देता है । यह नागरिकों को स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करता है ।

 

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