क्षेत्रवाद का राष्ट्रीय एकता पर क्या प्रभाव पड़ता है ? लिखिए ।

उत्तर- किसी क्षेत्र विशेष के निवासियों की अपने क्षेत्र के प्रति अत्यधिक लगाव की भावना व स्वयं को दूसरों से अलग मानकर कोई कार्य करना ही क्षेत्रवाद है । राष्ट्र के रूप में सभी क्षेत्रों के लोग एक इकाई के रूप में होते हैं , तभी राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है । लेकिन क्षेत्रीय असमानता या भेदभाव के कारण क्षेत्रीय समस्याएं उत्पन्न हो जाती है , जिससे क्षेत्रवाद को बढ़ावा मिलता है एवं राष्ट्रीय एकता हताहत होती है । 

 

क्षेत्रवाद का राष्ट्रीय एकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । क्षेत्रवाद से क्षेत्रीय संघर्ष की सम्भावना बढ़ जाती है व राष्ट्र की शांति , अशांति में बदल जाती है । उपद्रव व दो आरम्भ हो जाते हैं , व क्षेत्र विशेष के सम्बन्ध में राजनीतिक दबाव का सहारा लिया जाता है , जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना कमजोर होती जाती है व राष्ट्र को जन – धन की भी हानि होती है । राष्ट्र के विकास में क्षेत्रवाद बाधक बन कर खड़ा हो जाता है । क्षेत्रवाद , सम्प्रदायवाद , संघर्ष , हत्या , लूट आदि जैसी समस्याएं खड़ी कर देता है । क्षेत्रवाद के कारण विभिन्न क्षेत्र के लोग अपने – अपने क्षेत्र की तुलना में राष्ट्र को कम महत्व देते हैं । इस प्रकार स्पष्ट है कि क्षेत्रवाद का राष्ट्र की एकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । 

 

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