भारत में प्रजातंत्र की सफलता में बाधक तत्वों को बतलाते हुए उन्हें दूर करने के उपायों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- भारत में प्रजातंत्र की सफलता में बाधक तत्व एवं उन्हें दूर करने के उपाय निम्नलिखित हैं- 

 

1. गरीबी और बेरोजगारों की बढ़ती संख्या- 

देश की आबादी का करीबन 26 प्रतिशत भाग गरीबी रेखा के नीचे जीवन निर्वाह कर रहा है । देश में शिक्षित और अशिक्षित करोड़ों नागरिकों को नियमित रोजगार का कई साधन नहीं है । नागरिकों के उसी बड़े वर्ग के कारण लोकतंत्र के संचालन में कठिनाई उत्पन्न होती है । अतः गरीबी और बेरोजगारों की संख्या कम करने हेतु सरकार को रोजगार के नवीन अवसर उपलब्ध कराने चाहिए । 

 

2. जातीयता और क्षेत्रीयता- 

देश में प्रचलित जातिवाद और क्षेत्रवाद स्वतंत्रता और समानता के अधिकार को वास्तविक नहीं बनने दे रहे हैं । भारतीय प्रजातंत्र में विश्वास करने वाले यह मानते थे कि भारत में धीरे – धीरे जातिवाद स्वतः समाप्त हो जायेगा , लेकिन व्यक्ति जब जाति को प्राथमिकता देकर राजनीतिक कार्य और व्यवहार निर्धारित करता है , तब लोकतंत्र के संचालन में अवरोध उत्पन्न हो जाता है । अतः लोगों को जागरूक होकर जातीयता व क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रति अपना योगदान देना चाहिए , जिससे प्रजातंत्र को सफल बनाया जा सके । 

 

3. निरक्षरता- 

लोकतांत्रिक पद्धति का सफल क्रियान्वयन नागरिकों की शिक्षा पर निर्भर है । 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में साक्षरता का प्रतिशत 64.8 है , जबकि महिला साक्षरता केवल 53.7 प्रतिशत है । स्त्री – पुरुषों के समान राजनीतिक अधिकार होते हुए भी शिक्षा की कमी के कारण लोकतंत्र के कार्यान्वयन में कठिनाई आती है । शिक्षा की कमी के कारण नागरिकों में राजनीतिक सक्रियता और सहभागिता की कमी रहती है । अतः लोकतंत्र की सफलता के लिए शिक्षा स्तर में वृद्धि के साथ – साथ साक्षरता दर में भी वृद्धि करना चाहिए । 

 

4. सामाजिक कुरीतियाँ- 

भारतीय समाज परम्परागत समाज है । यहाँ प्रजातंत्र की भावना के अनुकूल लोकमत की कम अभिव्यक्ति होती है । अभी भी हमारे समाज में अस्पृश्यता की भावना , महिलाओं के प्रति भेदभाव , जातीय श्रेष्ठता के भाव , सामन्तवादी मानसिकता , सामाजिक कुरीतियाँ व अन्धविश्वास आदि की भावना व्याप्त है । इस प्रकार के विचार लोकतंत्र को जीवन का अभिन्न अंग नहीं बनने दे रहे हैं । सामाजिक कुरीतियाँ व देश की सामाजिक समस्याएँ भी बाधक हैं । अतः लोकतंत्र की सफलता हेतु इन सामाजिक कुरीतियों को नष्ट करने के प्रयास किये जाने चाहिए एवं इन कुरीतियों से बंधे लोगों को जागरूक करना चाहिए । उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि इन कुरीतियों ने सामाजिक विकास को किस तरह अवरुद्ध कर रखा है । 

 

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