आर्थिक विकास की प्राचीन एवं नवीन अवधारणा को समझाइए ।

उत्तर – आर्थिक विकास की प्राचीन अवधारणा – प्राचीन काल में वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास के अन्तर्गत भौतिक सम्पन्नता को विशेष स्थान प्राप्त था । जर्मनी एवं फ्रांस के ‘ वणिकवादी विचारक ‘ सोने एवं चाँदी की प्राप्ति को विकास का आधार मानते थे । समय के साथ – साथ विकास की अवधारणा भी बदलती रही । प्राचीन अर्थशास्त्री एडम स्मिथ का विचार था कि किसी देश में वस्तुओं तथा सेवाओं की वृद्धि ही आर्थिक विकास है । कार्ल मार्क्स ने समाजवाद की स्थापना को आर्थिक विकास माना है , परन्तु इन सबसे भिन्न जे.एस.मिल ने लोक कल्याण आर्थिक विकास के लिए सहकारिता के सिद्धान्त को अपनाने को आर्थिक विकास माना । आर्थिक विकास की नवीन अवधारणा – नवीन अर्थशास्त्रियों में पॉल एलवर्ट देश के उत्पादक साधनों के कुशलतम प्रयोग द्वारा राष्ट्रीय आय में वृद्धि को आर्थिक विकास मानते हैं 

 

जबकि विलियमसन और वैदिक का विचार है कि देश के निवासियों की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि आर्थिक विकास है । इनसे भिन्न डी . ब्राइट सिंह का विचार है कि यदि आय वृद्धि के साथ – साथ समाज कल्याण में भी वृद्धि होती है , तो वह आर्थिक विकास है । नोबल पुरस्कार से सम्मानित प्रो . अमर्त्य सेन ने भी आर्थिक कल्याण को विशेष महत्व दिया है । आर्थिक विकास को परिभाषित करते हुए मेयर एवं वाल्डविन ने लिखा है , ” आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है , जिसमें दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है । ” 

 

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