आर्थिक नियोजन का अर्थ बताते हुए भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य बताइए ।

उत्तर- आर्थिक नियोजन से आशय – आर्थिक नियोजन का आशय एक ऐसी प्रक्रिया से है , जिसमें एक निर्धारित अवधि में सुनिश्चित एवं स्पष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आर्थिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है । इस प्रकार कहा जा सकता है कि आर्थिक नियोजन में दो बातें जरूरी होती हैं यथा-

 

( 1 ) पूर्व निर्धारित लक्ष्य , जिन्हें प्राप्त किया जाना है

( 2 ) निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु उपलब्ध साधन तथा उपयोग करने का ब्यौरा । आर्थिक नियोजन में सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि किस प्रकार समाज की अधिकतम सन्तुष्टि के लिए देश के संसाधनों का प्रयोग किया जाता है । नियोजन से पूर्व देश के आर्थिक संसाधनों का आकलन किया जाता है । इसमें घरेलू साधनों के साथ – साथ विदेशों से प्राप्त होने वाले साधनों को भी शामिल किया जाता है । इसके बाद आर्थिक लक्ष्यों का निर्धारण कर देश में उपलब्ध संसाधनों का श्रेष्ठतम प्रयोग करते हुए लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है । 

 

आर्थिक नियोजन के उद्देश्य – 

नियोजन का उद्देश्य आर्थिक विकास की गति को बढ़ाना है , ताकि जिस प्रगति को दीर्घकाल में प्राप्त किया जा सके , उसे नियोजन की सीमित अवधि में ही प्राप्त किया जा सके । प्रत्येक योजना के उद्देश्य तात्कालिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भिन्न – भिन्न रहे हैं , लेकिन समय योजना प्रक्रिया सामान्य दीर्घकालीन उद्देश्यों से प्रेरित रही है । ये उद्देश्य हैं 

 

1. ऊँची विकास दर- 

जीवन स्तर में सुधार सभी पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य रहा है । इसलिए प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में ऊँची विकास दर व नीची जनसंख्या वृद्धि दर की कल्पना की जाती है , ताकि प्रति व्यक्ति आय में तेजी से वृद्धि हो । 

 

2. सामाजिक न्याय – 

आय तथा सम्पत्ति की अत्यधिक असमानता सामाजिक तथा आर्थिक न्याय की विरोधी है । इसके लिए हर योजना में प्रयत्न किए गये हैं । सामाजिक न्याय सहित आर्थिक विकास हमारी योजनाओं का उद्देश्य है । 

 

3. आत्मनिर्भरता- 

आत्मनिर्भरता से तात्पर्य है धीरे – धीरे विदेशी सहायता पर निर्भरता में कमी । विपरीत मानसून व अन्य कई राजनीतिक कारणों से पंचवर्षीय योजनाओं में वर्णित स्वावलम्बन का लक्ष्य अभी भी अप्राप्य है । 

 

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