राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से आशय , उद्देश्य एवं विशेषताएँ बताइए ।

उत्तर- 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना से आशय- 

भारत सरकार ने ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने , माँग पर राहत कार्य या रोजगार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण अंचल आजीविका के स्थाई स्रोत विकसित करने के लिए एक योजना लागू की है , जिसे ‘ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना ‘ कहा जाता है । 

 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य- 

 

( 1 ) इस योजना का उद्देश्य है – 

ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत प्रत्येक परिवार के वयस्क व्यक्तियों को , जो अकुशल मानव श्रम करने हेतु तैयार हैं , एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराना । 

( 2 ) ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी परिसम्पत्तियों का सृजन करना । 

 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना , मध्यप्रदेश की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं 

 

( 1 ) योजना में रोजगार की उपलब्धता प्रथम आओ , प्रथम पाओ के सिद्धान्त पर आधारित है । 

 

( 2 ) रोजगार या तो क्षेत्र में पहले से चल रहे रोजगार मूलक कार्यों में दिया जाता है , अथवा पंचायत स्तर पर शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट में से कार्य आरंभ करते हुए दिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य एजेंसी द्वारा क्रियान्वित किए जा रहे कार्य में भी रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है । 

 

( 3 ) रोजगार प्रदान करते समय ध्यान रखा जाता है कि रोजगार आवेदक के निवास के 5 कि.मी. की परिधि में ही हो । 5 कि.मी. की परिधि में रोजगार न होने की स्थिति में जनपद स्तर पर रोजगार प्रदान किया जाता है और तब परिवहन व्यय आदि हेतु आवेदक को न्यूनतम मजदूरी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त भी भुगतान किया जाता है । 

 

( 4 ) महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में प्राथमिकता देते हुए आवेदकों में से एक – तिहाई महिलाओं को लाभान्वित कराया जाना योजना में प्रावधानित है । 

 

( 5 ) निःशक्तजनों , अपंग , बुजुर्ग व्यक्ति आदि आवेदन करते हैं , तो उनकी योग्यता व दक्षता के अनुसार उन्हें काम दिया जाता है , अर्थात् सभी के लिए रोजगार का प्रावधान हैं । 

 

( 6 ) योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को राज्य शासन द्वारा निर्धारित अथवा सक्षम अधिकारी द्वारा कृषि श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अंतर्गत निर्धारित अधिसूचित मजदूरी पाने का हक है । महिला एवं पुरुषों में मजदूरी भुगतान में कोई भेद – भाव नहीं किया जाता । मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक अथवा अधिकतम पाक्षिक आधार पर किया जाता है । 

 

( 7 ) काम के दौरान चोट लगने पर बिना पैसे के इलाज और अपंग व मृत्यु होने पर मुआवजे का प्रावधान है । 

 

( 8 ) गाँव में जल , जंगल , जमीन से जुड़े काम और खेती तथा सड़क बनाने एवं सुधारने आदि के काम होंगे । ठेकेदार से काम कराने पर रोक रहेगी । 

 

( 9 ) योजना के क्रियान्वयन में ठेकेदारी प्रथा प्रतिबंधित है । संरचना की सुरक्षा एवं गुणवत्ता के निर्धारित मापदण्डों को सुनिश्चित करते हुए मानव – श्रम के स्थान पर कार्य करने वाली मशीनों का प्रयोग प्रतिबंधित होता है । 

 

( 10 ) योजना में पारदर्शिता एवं आमजन की भागीदारी बढ़ाने हेतु सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था है । 

 

( 11 ) गाँव में काम की देखरेख एवं निगरानी के लिए एक सर्तकता एवं मूल्यांकन समिति होती है । यह समिति काम की निगरानी एवं देखरेख करती है । ग्रामसभा गाँव में कराए गए हर काम की जाँच पड़ताल करेगी , अर्थात् क्या काम हुए , काम में कितने मजदूरों ने काम किया , सबको मजदूरी मिली की नहीं , आदि बातों पर ग्रामसभा में बातचीत होती है । 

 

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