स्व – सहायता समूह किसे कहते हैं ? इसके गठन के क्या – क्या उद्देश्य हो सकते हैं ? लिखिए ।

उत्तर- स्व – सहायता समूह- स्व सहायता समूह गरीब व्यक्तियों का एक स्वैच्छिक संगठन है । इन समूहों का गठन आपसी सहयोग द्वारा अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है । यह समूह अपने सदस्यों के बीच छोटी – छोटी बचतों को बढ़ावा देता है । इन बचतों को बैंक में जमा किया जाता है । बैंक के जिस खाते में यह राशि जमा की जाती है , वह खाता समूह के नाम होता है । सामान्यतः एक समूह के सदस्यों की अधिकतम संख्या 20 होती है । प्रायः समूह के सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं , जिनकी पहुँच बैंक आदि वित्तीय संस्थाओं तक नहीं होती । 

 

अतः समूह सदस्यों को बचत की ऐसी विधि सिखाता है , जो सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु उपयुक्त है । समूह सदस्यों को कम ब्याज दर पर आसानी से छोटे त्राण उपलब्ध कराता है । इन समूहों ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । समूह की बैंकिंग सम्बन्धित गतिविधियों का समाज के उन गरीब पिछड़े व्यक्तियों को बैंकों से जोड़ना है , जिनको अभी तक अनदेखा किया गया है । 

 

स्व – सहायता समूह के गठन के अग्रलिखित उद्देश्य हो सकते हैं- 

( 1 ) सामूहिक रूप से संगठित होकर कार्य करने की भावना का विकास करना । 

( 2 ) सदस्यों में बेहतर भविष्य के लिए बचत करने की आदत विकसित करना । 

( 3 ) सदस्यों को ऋण प्रदान करके स्वरोजगार के अवसरों का सृजन करना । 

( 4 ) सदस्यों में स्वावलम्बन की भावना का विकास करना । 

( 5 ) स्वास्थ्य , पोषण , शिक्षा और घरेलू हिंसा , जैसे – विषयों के प्रति जागृति पैदा करना 

( 6 ) सरकार , बैंक तथा अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं की सहायता से कल्याणकारी गतिविधियों का संचालन आदि ।

 

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