भारत में पायी जाने वाली निजी वित्तीय संस्थाएं कौन – कौन सी हैं ?

उत्तर –

1. साहूकार- साहूकार या महाजन वह व्यक्ति है , जो अपने ग्राहकों को समय – समय पर ऋण उपलब्ध कराता है । 

 

साहूकार दो प्रकार के होते हैं । 

( अ ) कृषक साहूकार या जमींदार तथा 

( ब ) व्यावसायिक साहूकार । 

 

कृषक साहूकार वे व्यक्ति कहलाते हैं , जो मुख्य रूप से कृषि करते हैं , लेकिन धनवान होने के कारण , धन उधार देने का कार्य सहायक व्यवसाय के रूप में करते हैं । व्यावसायिक साहूकार वे व्यक्ति कहलाते हैं , जिनका मुख्य व्यवसाय धन उधार देना ही होता है । साहूकारों के कार्य करने का तरीका बहुत सरल होता है । ये अल्पकालीन , मध्यमकालीन व दीर्घकालीन तीनों प्रकार के त्राण देते हैं । ये उत्पादन उपभोग दोनों कार्यों के लिए ऋण देते हैं । ऋण जमानत लेकर व बिना जमानत लिए दोनों प्रकार के होते हैं । साहूकारों का कृषि वित्त में महत्वपूर्ण स्थान है । आजकल साहूकार कृषि वित्त की लगभग 25 प्रतिशत आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं । साहूकार लोकप्रिय होते हुए भी बदनाम हैं । इसका प्रमुख कारण इनकी दोषपूर्ण कार्य प्रणाली है , जिसमें 

( अ ) ऊँची ब्याज दर 

( ब ) अग्रिम ब्याज 

( स ) हिसाब में गड़बड़ी 

( द ) बेगार कराना आदि बातें सम्मिलित हैं । अतः सरकार ने साहूकारों पर नियन्त्रण लगा दिया है , फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है । 

 

2. जमींदार- इस प्रथा का प्रारम्भ 1793 में लार्ड कार्नवालिस ने बंगाल में किया था । जमींदार बड़े भू – स्वामी होते थे । इनका कार्य किसानों से लगान वसूल करना था । ये किसानों से लगान वसूल करके सरकार को देते थे । जमींदार आवश्यकता पड़ने पर किसानों को उनकी आवश्यकता पूर्ति के लिए ऋण भी दिया करते थे । इनके द्वारा किसानों को दिए गये त्राणों पर ब्याज की दर बहुत ऊँची होती थी । इनके द्वारा प्रदत्त ऋणों की शतें भी कठोर होती थीं । ये ऋण वसूली में निर्दयता का व्यवहार करते थे , जिससे किसानों का शोषण होता था । फलस्वरूप सभी राज्यों ने कानून बनाकर जमींदारी प्रथा को पूर्णतः समाप्त कर दिया है , किन्तु वर्तमान समय में भी जमींदारों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण देने का कार्य किया जाता है । 

 

3. चिट – फंड – 

चिट – फंड योजनाओं का दक्षिण भारत के राज्यों में लम्बा इतिहास रहा है । दक्षिण भारत के गाँवों में यह बहुत लोकप्रिय है । यहाँ यह संगठित और असंगठित दोनों रूपों में संचालित है । चिट फंड भारत मे पायी जाने वाली एक प्रकार की बचत योजना है । इसमें निर्धारित संख्या में सदस्य बनाये जाते हैं । ये सदस्य पूर्व निर्धारित समय अन्तराल के बाद एक निश्चित स्थान पर एकत्रित होकर , तयशुदा धनराशि एक स्थान पर एकत्रित करते हैं । फिर इस एकत्रित धनराशि की सदस्यों के बीच नीलामी की जाती । इस नीलामी में जो सदस्य सबसे ऊँची बोली लगाता है , उसे एकत्रित धनराशि सौंप दी जाती है । इस प्रकार की चिट – फंड योजनाएँ किसी पंजीकृत वित्तीय संस्था या कुछ मित्र या रिश्तेदार आपस में मिलकर भी चलाते हैं । उद्देश्य में भिन्नता के साथ अलग – अलग तरह की अनेक चिट – फंड योजनाएँ देश में चल रही हैं । 

 

Leave a Comment