बैंकों के विभिन्न प्रकार कौन – कौन से हैं ?

उत्तर –

1 . वाणिज्यिक या व्यापारिक बैंक – 

व्यापारिक बैंक अथवा वाणिज्यिक बैंक वे बैंक होते हैं , जो व्यापारिक उद्देश्यों के लिए अल्पकालीन ऋणों की व्यवस्था करते हैं । ये बैंक जनता की जमा राशि को स्वीकार करने तथा उन्हें ऋण देने के अलावा बैंकिंग सम्बन्धी अन्य कार्य भी करते हैं । 

 

2. औद्योगिक बैंक- 

उद्योगों के लिए मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन ऋणों की व्यवस्था करने वाली संस्थाएँ औद्योगिक बैंक ‘ कहलाती हैं । ये बैंक उद्योगों को अपने पास से ऋण देने के अलावा अन्य स्रोतों से पूँजी प्राप्त करने में सहयोग देते हैं । भारत में औद्योगिक विकास बैंक , औद्योगिक साख एवं निवेश निगम , औद्योगिक वित्त निगम जैसी संस्थाओं की स्थापना उद्योगों की वित्त व्यवस्था करने के लिए की गई है । 

 

3. विदेशी विनिमय बैंक- 

विदेशी मुद्राओं का लेन – देन तथा विदेशी व्यापार के लिए वित्त की व्यवस्था करने वाली संस्थाओं को विदेशी विनिमय बैंक कहा जाता है । ये बैंक अपनी शाखाएँ विदेशों में स्थापित करती हैं , जिससे विदेशी मुद्राओं के लेन – देन का कार्य सरल हो जाता है । वर्तमान समय में विनिमय बैंक , वाणिज्य बैंकों के समान बैंकों के अन्य कार्य भी करती हैं । इसी तरह वाणिज्य बैंक भी विनिमय बैंकों के कार्य करते हैं । इसीलिए ऐसे बैंक , जो अन्य बैंकिंग कार्यों के साथ – साथ विदेशी विनिमय का लेन – देन करते हैं , ‘ विनिमय बैंक ‘ कहलाते हैं ।

 

4. कृषि बैंक- 

कृषि व्यवस्था , व्यापार तथा उद्योग – धन्धों से भिन्न होती है । अतः इसकी ऋण सम्बन्धी आवश्यकताएँ व्यापार तथा उद्योग – धन्धों की ऋण सम्बन्धी आवश्यकताओं से भिन्न होती है । यही कारण है कि किसानों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कृषि बैंकों की स्थापना की गई । 

 

5. केन्द्रीय बैंक- 

केन्द्रीय बैंक किसी भी देश की बैंकिंग प्रणाली की शीर्ष संस्था होती है । इस बैंक का जनता से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होता । देश की मुद्रा छापने का कार्य इसी बैंक द्वारा किया जाता है । यह बैंक सरकार की बैंकर होती है । सरकार के सभी प्रकार के खातों का हिसाब रखती है तथा आवश्यकता पड़ने पर सरकार को ऋण भी देती है । यह बैंक ‘ बैंकों की बैंक ‘ है । देश के सभी बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत भाग इसके पास रखना पड़ता है । आवश्यकता पड़ने पर यह बैंक अन्य बैंकों को ऋण भी देती है । इसके अलावा यह देश में मुद्रा एवं साख की मात्रा पर नियन्त्रण रखती है । अन्य सभी बैंकों को इसके आदेशों तथा नीतियों का पालन करना पड़ता है । भारत में केन्द्रीय बैंक को ‘ रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ‘ के नाम से जाना जाता है । 

 

6. अन्तर्राष्ट्रीय बैंक- 

अन्तर्राष्ट्रीय बैंकों के अन्तर्गत उन बैंकों को सम्मिलित किया जाता है , जिनकी स्थापना अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक समस्याओं को निपटाने तथा सदस्य राष्ट्रों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए की गई है । इस दिशा में 1945 में दो संस्थाओं विश्व बैंक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना की गयी । 

 

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