एक आय घटक के रूप में सेवा – क्षेत्र के महत्व की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर- एक आय घटक के रूप में सेवा – क्षेत्र के महत्व को निम्नानुसार स्पष्ट किया जा सकता है 

 

1. रोजगार में वृद्धि – 

सेवा – क्षेत्र लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में रोजगार प्रदान करता है । रोजगार के अवसर जुटाने में परिवहन , थोक एवं फुटकर व्यापार , बैंक , शैक्षणिक संस्थाएँ , स्वास्थ्य सेवाएँ , पर्यटन एवं होटल व्यवसाय का योगदान बहुत अधिक है । ये व्यवसाय ऐसे हैं , जो लद्दाख जैसे दुर्गम एवं दूरस्थ स्थानों पर भी रोजगार का सृजन करते हैं । इस प्रकार सेवा – क्षेत्र बेरोजगारी दूर करने एवं लोगों की आय बढ़ाने में सहायक होता है । 

 

2. उत्पादन में वृद्धि – 

सेवा – क्षेत्र कम लागत पर एवं कम समय में अधिक उत्पादन करने एवं गुणवत्ता में वृद्धि करने में भी सहायक होता है । यह क्षेत्र दो प्रकार से सहायता पहुंचाता है- एक तो कुशल प्रशिक्षित एवं स्वस्थ श्रमिक उपलब्ध कराकर उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाता है । दूसरा , कुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि से उत्पादन एवं आय में वृद्धि करता है । 

 

3. बाजार का विस्तार करने में सहायक- 

सेवा – क्षेत्र प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र के उत्पादों के बाजार का विस्तार करने में सहायक होता है । परिवहन की सुविधा से माल एवं यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है । संचार के साधनों द्वारा व्यापारिक सौदे तय किये जाते हैं , या होटल बुक किया जाता है । इससे सभी प्रकार की गतिविधियाँ सरल और सुविधाजनक हो जाती हैं ।

 

4. उद्योगों हेतु वित्त की व्यवस्था- 

बेंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाएं साख का सृजन करती हैं और सभी प्रकार के उद्योगों के लिए पूँजी की पूर्ति करती हैं , फिर चाहे वित्त की अल्पकालिक आवश्यकता हो या मध्यकालिक अथवा दीर्घकालिक । उद्योगों की स्थापना से लेकर बाजार तक यस्तुएँ पहुँचाने एवं विज्ञापन करने हेतु सभी व्यवस्थाएँ सेवा – क्षेत्र द्वारा की जाती हैं । संक्षेप में , सेवा – क्षेत्र पूँजी सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति कर औद्योगिक विकास में सहायक होता है । 

 

5. कृषि उपज की सुरक्षा एवं कृषि का विकास- 

निर्धन कृषकों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने का कार्य भी सेवा – क्षेत्र द्वारा किया जाता है । वर्षा – बीमा योजना , फसल – बीमा योजना , कृषि – आय बीमा योजना तथा राष्ट्रीय – बीमा योजना आदि के द्वारा कृषि उपज की अनिश्चितता एवं जोखिम को दूर किया जाता है । साथ ही सेवा – क्षेत्र कृषकों को उन्नत खाद , बीज आदि के क्रय हेतु पूँजी प्रदान कर उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है । इस प्रकार सेवा – क्षेत्र कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाता है तथा कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सहयोग करता है । 

 

Leave a Comment