उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता एवं महत्व बताइए ?

उत्तर- उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता एवं महत्व को निम्नानुसार स्पष्ट किया जा सकता है।

 

1. अधिकतम सन्तोष प्राप्त करना- 

प्रत्येक व्यक्ति की आय सीमित होती है । वह अपनी आय से अधिक वस्तुएँ एवं सेवाएँ खरीदना चाहता है । इससे ही उसे पूर्ण सन्तुष्टि प्राप्त होती है । अतः यह आवश्यक है कि उसे वस्तुएँ माप तौल के अनुसार प्राप्त हों और उसके साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो । इसके लिए उसे जागरूक बनाना आवश्यक है 

 

2. उत्पादकों शोषण से बचाव- 

उत्पादक एवं विक्रेता उपभोक्ताओं का कई प्रकार से शोषण करते हैं , जैसे- कम तौलना , अधिक कीमत लेना , बिल न देना , मिलावट करना , नकली वस्तु देना आदि । बड़ी – बड़ी कम्पनियाँ भी अपने विज्ञापनों से उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं । उपभोक्ता जागरूकता ही उन्हें उत्पादकों एवं विक्रेताओं के शोषण से बचाती हैं । 

 

3. हानिकारक वस्तुओं के उपयोग पर रोक- 

बाजार में अनेक ऐसी वस्तुएं भी उपलब्ध रहती हैं , जो कुछ उपभोक्ताओं को हानि पहुंचाती हैं । उदाहरण के लिए सिगरेट , तम्बाकू , शराब आदि को लिया जा सकता है । उपभोक्ता शिक्षा एवं जागरूकता ऐसी वस्तुओं को खरीदने की प्रेरणा देती है , जिससे उन्हें बहुत लाभ होता है । 

 

4. बचत की प्रेरणा- 

उपभोक्ता जागरूकता व्यक्तियों को फिजूल खर्ची तथा अपव्यय से रोकती है , और उसे सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती है । ऐसे उपभोक्ता सेल , छूट , मुफ्त उपहार , आकर्षक पैकिंग आदि के लालच में नहीं फंसते । इससे वे अपनी आय का सही उपयोग करने एवं अधिक बचत करने में सफल रहते हैं । 

 

5. समस्याओं के समाधान की जानकारी- 

अशिक्षा , अज्ञानता एवं जानकारी के अभाव में उपभोक्ता वर्ग धोखा खा जाता है । अतः आवश्यक है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की जानकारी दी जाए , जिससे वे उत्पादकों एवं विक्रेताओं द्वारा ठगे न जाएँ । उपभोक्ता जागृति के द्वारा उन्हें कानूनी प्रक्रिया से भी अवगत कराया जाता है , जिससे वे अपनी समस्याओं को हल कर सकें । 

 

6. स्वस्थ समाज का निर्माण- 

समाज का प्रत्येक व्यक्ति उपभोक्ता होता है । अतः यदि उपभोक्ता जागरूक एवं विवेकशील है , तो सम्पूर्ण समाज भी स्वस्थ और अपने अधिकारों के प्रति सचेत हो जाता है । ऐसी स्थिति में उत्पादकों और विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं को ठगना या धोखा देना सम्भव नहीं होता है । 

 

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