उत्पादक एवं व्यापारी उपभोक्ताओं का शोषण किस प्रकार करते हैं ?

उत्तर- उत्पादक एवं व्यापारी उपभोक्ताओं का शोषण निम्न प्रकार से करते हैं 

 

1. ऊँची कीमतें- 

प्रायः दुकानदार निर्धारित फुटकर कीमत से अधिक मनमानी कीमत ले लेते हैं । जैसे यदि हम एक दुकान से वस्तु खरीद लेते हैं और वही वस्तु दूसरी किसी दुकान में कम दाम में मिल जाती है । 

 

2. घटिया गुणवत्ता- 

कई बार हमारे द्वारा खरीदा गया सामान घटिया किस्म का होता है । जैसे- कई दवाइयों की अंतिम तिथि निकल चुकी होती है । 

 

3. मिलावट एवं अशुद्धता- 

मिलावट का अर्थ है- वस्तु में कुछ सस्ती वस्तु का मिला देना । इससे कई बार उपभोक्ता के स्वास्थ्य को हानि होती है । चावल में सफेद कंकड़ , मसालों में रंग , तुअर दाल में केसरी दाल आदि । 

 

4. गलत एवं अधूरी जानकारी- 

उत्पादक एवं विक्रेता कई बार ग्राहकों को गलत अथवा अधूरी जानकारी देते हैं । इससे ग्राहक गलत वस्तु खरीदकर फँस जाते हैं और उनका पैसा बेकार चला जाता है । 

 

5. कृत्रिम अभाव-

काला बाजारी एवं जमाखोरी- कभी – कभी त्यौहार , पर्व आदि के समय व्यापारी नाजायज लाभ कमाने के लिए वस्तुओं की जमाखोरी कर , वस्तु का कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर देते हैं और फिर कालाबाजारी के द्वारा अधिक कीमतें वसूलते हैं । 

 

6. माप तौल में गड़बड़ी – 

माप तौल में विक्रेता कई प्रकार से गड़बड़ियाँ करते हैं , जैसे – बाँट के तले को खोखला करना , उसका वजन वांछित से कम होना , बाट के स्थान पर पत्थर का उपयोग करना , लीटर के पैमाने का तला नीचे से मोटा या ऊपर की ओर उठा हुआ होना , तराजू के पलड़े के नीचे चुंबक लगा देना आदि । इस तरह उपभोक्ता जितना भुगतान करता है , उसके बदले में उसे वस्तु उचित मात्रा में प्राप्त नहीं होती हैं ।

 

7.बिक्री के बाद प्रदान की जाने वाली सेवाओं का असंतोषजनक होना – 

जब तक उपभोक्ता वस्तु खरीद नहीं लेता , उसको तरह – तरह से लालच एवं बाद में प्रदान की जाने वाली सेवाओं का आकर्षण दिया . जाता , किन्तु बाद में सेवाएं उचित समय में प्रदान नहीं की जाती है । 

 

8. दुर्व्यवहार एवं अनावश्यक शर्ते- 

गैस कनेक्शन , नई टेलीफोन लाइन , लाईसेंस शुदा सामान आदि प्राप्त करते समय विक्रेता अनावश्यक शर्ते लगाकर उपभोक्ताओं को परेशान करते हैं । उपभोक्ता अपने आप को बेबस एवं फंसा हुआ महसूस करता है ।

 

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