उपभोक्ताओं के अधिकार कौन – कौन से हैं , एवं उन्हें ये अधिकार क्यों दिये गये हैं ? व्याख्या कीजिए ।

उत्तर- उपभोक्ताओं को उत्पादक या विक्रेता किसी भी प्रकार से धोखा न दे सके इसलिए कानून द्वारा उपभोक्ता को निम्नलिखित अधिकार दिये गये हैं 

 

1. सुरक्षा का अधिकार- 

उत्पादकों के लिए यह आवश्यक है कि वे उपभोक्ताओं की सुरक्षा से सम्बन्धित नियमों का पालन करें । कारण यह है कि यदि उत्पादक इन नियमों का पालन नहीं करते हैं , तो उपभोक्ता को भारी जोखिम उठाना पड़ सकता है । उदाहरण के लिए , प्रेशर कुकर में एक सेफ्टी वॉल्व होता है , जो यदि खराब हो तो भयंकर दुर्घटना सम्भव हो सकती है । सेफ्टी वॉल्व के निर्माता को इसकी उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए । यदि निर्माता ऐसा नहीं करते हैं , तो उपभोक्ता कानून का सहारा ले सकते हैं । 

 

2. वस्तुओं और सेवाओं की जानकारी का अधिकार- 

जब हम कोई वस्तु खरीदते हैं , तब यह पाते हैं कि उसके पैकेट पर कुछ खास जानकारियाँ लिखी हुई होती हैं । जैसे- उस वस्तु की बैच संख्या , निर्माण की तारीख , खराब होने की अन्तिम तिथि और वस्तु बनाने का पता आदि । जब हम कोई दवा खरीदते हैं , तो उस दवा के अन्य प्रभावों और खतरों से सम्बन्धित निर्देश भी प्राप्त कर सकते हैं । जब हम कपड़े खरीदते हैं , तब हमें धुलाई से सम्बन्धित निर्देश भी प्राप्त करने चाहिए । इन जानकारियों को देने की आवश्यकता इसलिए है , क्योंकि उपभोक्ता जिन वस्तुओं और सेवाओं को खरीदता है , उसके बारे में सूचना पाने का अधिकार है । भारत सरकार ने वर्ष 2005 को सूचना प्राप्त करने का अधिकार ( राइट टू इनफॉरमेशन ) के नाम से जाने कानून बनाया है । यह कानून सरकारी विभागों के कार्य – कलापों की सभी सूचनाएँ पाने के अधिकार को सुनिश्चित करता है । उपभोक्ताओं को उपभोक्ता शिक्षा प्राप्त करने का भी अधिकार है । 

 

3. चयन का अधिकार- 

जब कोई उपभोक्ता किसी वस्तु या सेवा को खरीदता है , तो उसे चुनने का अधिकार होता है । मान लीजिए कि आप गैस कनेक्शन खरीदते हैं और गैस डीलर आपको साथ में चूल्हा भी खरीदने के लिए दबाव डालता है । किन्तु आप केवल गैस कनेक्शन खरीदना चाहते हैं और चूल्हे की आपको आवश्यकता नहीं है । इस स्थिति में आपके चुनने के अधिकार का उल्लंघन होता है । ऐसी स्थिति में आप विक्रेता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं ।

 

4. क्षतिपूर्ति का अधिकार- 

उपभोक्ता को अनुचित सौदेबाजी और शोषण के विरुद्ध क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार है । यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुंचाई जाती है , तो उसे क्षति की मात्रा के आधार पर क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है । 

 

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