भारत में लोहा या मैंगनीज उत्पादन क्षेत्रों के वितरण का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- भारत में लोहे के उत्पादन क्षेत्रों को निम्नांकित क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है 

 

उत्तरी – पूर्वी क्षेत्र- 

झारखण्ड राज्य के सिंहभूमि की प्रसिद्ध लोहा खदानें – मनोहरपुर , पाशिराबुरु , बुढ़ाबुरु , गुआ और नोआमुंडो हैं । उड़ीसा के मयूरभंज जिले में गुरुमहिसानी , सलाइपट तथा बादाम पहाड़ की खदार्ने प्रमुख हैं । 

 

मध्य भारत क्षेत्र- 

इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश में जबलपुर , मण्डला , बालाघाट , छत्तीसगढ़ का दुर्ग , रायगढ़ , बिलासपुर और महाराष्ट्र के चाँदा ( चंद्रपूर ) और रत्नागिरि जिलों में लौह भण्डार हैं । दुर्ग जिले की दल्ली व राजहरा और बस्तर की बैलाडिला एवं राउघाट की खदानें प्रसिद्ध है । राजस्थान के अरावली क्षेत्र , उदयपुर व भीलवाड़ा , डूंगरपुर व बूंदी जिलों में भी लौह खदानें हैं । 

 

प्रायद्वीपीय क्षेत्र- 

कर्नाटक में चिकमंगलूर , वल्लारि , उत्तर कन्नड़ तथा चित्रदुर्ग जिलों में , तमिलनाडु के सेलम , तिरुच्चिरापल्लि तथा दक्षिणी अर्काडु जिलों में तथा आन्ध्रप्रदेश के अनन्तपुर , कुर्नूल तथा नेल्लूर जिलों में लोहे की खदानें हैं । 

 

अन्य क्षेत्र- 

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ , हिमाचल प्रदेश के मण्डी , उत्तराखण्ड के गढ़वाल , अल्मोड़ा तथा नैनीताल , केरल के कोजिकोड , जम्मू व कश्मीर के जम्मू व ऊधमपुर जिलों तथा नागालैण्ड में लोहे के भण्डार हैं । 

भारत में मैंगनीज अयस्क के उत्पादन क्षेत्रों को तीन क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है 

 

मध्य भारतीय खदानें- 

इस क्षेत्र में भारत का 50 प्रतिशत मैंगनीज का उत्पादन होता है । मुख्य खदानें महाराष्ट्र के भण्डारा , रत्नागिरि व नागपुर , मध्यप्रदेश के बालाघाट , छिंदवाड़ा , सिवनी , मण्डला , धार , झाबुआ , छत्तीसगढ़ के बस्तर , गुजरात के खेड़ा व पंचमहल और राजस्थान के उदयपुर एवं बाँसवाड़ा 

 

प्रायद्वीपीय खदानें- 

कर्नाटक के उत्तरी कन्नड़ , चित्रदुर्ग चिकमंगलूर , शिमोगा , बल्लारि तथा तुमकुर जिलों में मैंगनीज अयस्क की खदाने हैं । आन्ध्रप्रदेश में विशाखापट्टनम् , कड़प्पा तथा श्रीकाकुलम् में मैंगनीज मिलता है ।

 

उत्तर – पूर्वी खदानें- 

झारखण्ड के सिंहभूमि और उड़ीसा के क्योंझर , गंजाम , सुन्दरगढ़ तथा बेलागिरि जिलों में मैग्नीज मिलता है । 

 

Leave a Comment