लोहे के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए भारत में लोहा उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- लोहे का वर्तमान में हर क्षेत्र में उपयोग होता है । 

(1) कृषि क्षेत्र में लोहे का उपयोग कृषि उपकरण बनाने में किया जाता है । जैसे- हल , बीज बोने की मशीनें , ट्रेक्टर ट्राली आदि । 

(2) परिवहन के क्षेत्र में लोहे का उपयोग परिवहन के साधनों को निर्मित करने में किया जाता है । जैसे- ट्रक , हवाई जहाज , जहाज , रेल आदि । 

(3) निर्माण के क्षेत्र में लोहे का उपयोग विभिन्न निर्माण कार्यों , जैसे- पुल निर्माण , भवन निर्माण , सड़क निर्माण आदि में किया जाता है । 

(4) घरेलू उपकरणों के निर्माण में लोहे का प्रयोग किया जाता है , जैसे- घरेलू बर्तन , कुसी , टेबल आदि । 

(5) इसके अतिरिक्त लोहे का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों को पूरा करने हेतु किया जाता है , जैसे- सुरक्षा उपकरण , बिजली उपकरण आदि । 

 

भारत में लोहा उत्पादक क्षेत्र – उत्तरी – पूर्वी क्षेत्र- 

झारखण्ड राज्य के सिंहभूमि की प्रसिद्ध लोहा खदानें मनोहरपुर , पाशिराबुरु , बुढाबुरु , गुआ और नोआमुंडो हैं । उड़ीसा के मयूरभंज जिले में गुरुमहिसानी , 

 

मध्य भारत क्षेत्र- 

इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश में जबलपुर , मण्डला , बालाघाट , छत्तीसगढ़ का दुर्ग , रायगढ़ , महाराष्ट्र के चाँदा और रत्नागिरि जिलों में लौह भण्डार हैं । दुर्ग जिले की दल्ली व राजहरा और बस्तर की बैलाडिला एवं राउघाट की खदानें प्रसिद्ध हैं । राजस्थान के अरावली क्षेत्र , उदयपुर व भीलवाड़ा , डूंगरपुर व बूंदी जिलों में भी लौह खदानें हैं । 

 

प्रायद्वीपीय क्षेत्र- 

सेलम , तिरुच्चिरापल्लि तथा दक्षिणी अर्काडु जिलों में तथा आन्ध्रप्रदेश के अनन्तपुर , कुर्नूल तथा नेल्लूर -कर्नाटक के चिकमंगलूर , वल्लारि , उत्तर कन्नड़ तथा चित्रदुर्ग जिलों में , तमिलनाडु जिलों में लोहे की खदान है । 

 

अन्य क्षेत्र- 

हरियाणा के महेन्द्रगढ़ , हिमाचल प्रदेश के मण्डी , उत्तराखण्ड के गढ़वाल , अल्मोड़ा तथा नैनीताल , केरल के कोजिकोड , जम्मू व कश्मीर के जम्मू व ऊधमपुर जिलों तथा नागालैण्ड में लोहे के भण्डार हैं । 

 

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