भारत की फसलों का वर्गीकरण समझाइए ।

1. खरीफ की फसलें – 

वे फसलें , जो वर्षा ऋतु के आरम्भ ( जून , जुलाई ) में बोयी जाती है एवं दशहरे के बाद शरद ऋतु के अंत ( अक्टूबर , नवम्बर ) तक तैयार हो जाती हैं , खरीफ की फसलें कहलाती हैं । मानसून के आगमन पर बोई जाने वाली प्रमुख फसलें – चावल , ज्वार , बाजरा , मक्का , सोयाबीन , गन्ना , कपास , पटसन , तिल्ली , मूंगफली आदि हैं । 

 

2. रबी की फसलें- 

जो फसलें शरद ऋतु के आगमन पर दशहरे के पश्चात् अक्टूबर , नवम्बर में बोई जाती हैं । 

जैसे – गेहूँ , चना , जी , सरसों , तम्बाकू आदि रबी की फसलें हैं । जायद फसलें कहलाती हैं । मक्का , बाजरा , चना , अरहर ( तुअर ) व अन्य दालें । बोई जाती है और ग्रीष्म त्रातु के आरम्भ में मार्च , अप्रैल में तैयार हो जाती है , रबी की फसलें 

 

3. जायद फसलें –

विशेषतः ग्रीष्म ऋतु में पैदा की जाने वाली सब्जियाँ और हरे चारे की खेती 

 

4.खाद्यान्न फसलें – 

खाद्यान्न फसलों से हमारा आशय उन फसलों से हैं , जो भोजन के लिए मुख्य पदार्थ का कार्य करती हैं । खाद्यान्न फसलों में अनाज व दालें सम्मिलित हैं । जैसे – चावल , गेहूँ , ज्वार , 

 

5. नकद या व्यापारिक फसलें – 

नकद या व्यापारिक फसलों से आशय उन फसलों से है , जो प्रत्यक्ष रूप से भोजन के लिए उत्पन्न नहीं की जाती हैं , किन्तु उन्हें बेचकर नकद राशि प्राप्त की जाती है । इनमें कपास , जूट , चाय , कॉफी , तिलहन , सोयाबीन , गन्ना , तम्बाकू , रबर आदि हैं । 

 

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