हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं ?

स्वतंत्रता के पश्चात् भारत को विदेशों से खाद्यान्न का आयात करना पड़ता था । सन् 1961 में कृषि वैज्ञानिकों ने इस समस्या की ओर ध्यान दिया । देश में अधिक उपज देने वाले बीजों की किस्मों में सुधार , गहरी जुताई , मिट्टी – परीक्षण , सिंचाई सुविधा में वृद्धि , रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग तथा कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग करते हुए कृषि के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन किया गया , जिसे हरित क्रांति कहते हैं । कुछ वर्षों में भारत खाद्यान्न का निर्यात भी करने लग गया । हरित क्रांति का सफलतम प्रयोग पहले हरियाणा और पंजाब में किया गया । उसके बाद समूचे देश में लागू किया । हरित क्रांति के द्वारा भारत में अधिक पैदावार देने वाली गेहूँ की किस्में विकसित की गई । गेहूँ के पश्चात् चावल , मक्का व ज्वार की किस्मों में भी सुधार किया गया । इस प्रकार हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना दिया । 

 

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