मिश्रित अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं ? इस प्रणाली की विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर- मिश्रित अर्थव्यवस्था से आशय – मिश्रित अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है , जिसमें सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र दोनों साथ – साथ कार्य करते हैं । इन दोनों क्षेत्रों की भूमिका अर्थव्यवस्था में इस प्रकार निर्धारित की जाती है , जिसमें समाज के सभी वर्गों के आर्थिक कल्याण में वृद्धि हो सके । भारतीय योजना आयोग के अनुसार “ मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित होते हैं तथा दोनों एक इकाई के दो घटकों के रूप में कार्य करते हैं । 

मिश्रित अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं 

 

1. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र का सहअस्तित्व- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्र विद्यमान रहते हैं । इन दोनों क्षेत्रों के बीच कार्यों का स्पष्ट विभाजन रहता है । 

 

2. लोकतान्त्रिक व्यवस्था- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में आर्थिक क्रियाओं का निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में विभाजन , नीतियों का निर्धारण , लक्ष्यों एवं उद्देश्यों का निर्धारण , संसाधनों का आवंटन आदि सभी बातों पर निर्णय जन प्रतिनिधियों द्वारा लिया जाता है । इस प्रकार मिश्रित अर्थव्यवस्था का संचालन लोक – तान्त्रिक 

 

3. आर्थिक नियोजन- 

इसमें देश के आर्थिक विकास हेतु आर्थिक नियोजन को अपनाया पद्धति द्वारा किया जाता है । इसमें एकाधिकारी एवं तानाशाही की प्रवृत्तियाँ नहीं पायी जाती है । जाता है । इसके अन्तर्गत सरकार निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करती है । दोनों ही क्षेत्र अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कार्य करते हैं । 

 

4. आर्थिक स्वतन्त्रता- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में आर्थिक स्वतन्त्रता तो होता है , किन्तु पूंजीवाद की तुलना में कम होती है । इस व्यवस्था में सामाजिक हित एवं कल्याण को ध्यान में रखकर व्यक्तिगत उद्यमियों को सीमित आर्थिक स्वतन्त्रता प्रदान की जाती हैं । मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूंजीवाद की तरह उपभोक्ता की संप्रभुता तो नहीं होती , परन्तु फिर भी जनता द्वारा निर्वाचित सदस्यों द्वारा आर्थिक नियोजन का स्वरूप निर्धारण होने के कारण व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पूर्णतः समाप्त नहीं होती है । 

 

5. मूल्य – 

तंत्र पर नियन्त्रण- मिश्रित अर्थव्यवस्था में मूल्य – तंत्र के संचालन को सरकार जन कल्याण की दृष्टि से अपनी कीमत नीति द्वारा नियन्त्रित करती है । इस व्यवस्था में एक सीमित सीमा तक मूल्य – तंत्र क्रियाशील रहता है । 

 

6. लाभ उद्देश्य- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है । निजी क्षेत्र द्वारा अपनी आर्थिक क्रियाओं का संचालन लाभ के उद्देश्य से किया जाता है । अर्थव्यवस्था में साधनों का आवंटन इसी लाभ व उद्देश्य के आधार पर किए जाते हैं । 

 

7. आर्थिक समानता एवं सामाजिक न्याय- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी सम्पत्ति , उत्तराधिकार : तथा अन्य स्वतन्त्रताएँ पायी जाती हैं , किन्तु सरकार आर्थिक विषमताओं को कम करने के लिए धनी व्यक्तियों पर कर लगाकर , उससे प्राप्त आय को गरीबों के कल्याण के लिए खर्च करती है । 

 

8. सामाजिक सुरक्षा- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में सरकार सामाजिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान देती है । सरकार वृद्धावस्था पेंशन , बेरोजगारी भत्ता , दुर्घटना एवं मृत्यु – बीमा आदि के द्वारा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है । 

 

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