पूँजीवादी आर्थिक प्रणाली के गुण – दोषों की व्याख्या कीजिए ?

उत्तर- पूँजीवादी आर्थिक प्रणाली के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं 

 

1. स्वसंचालित प्रणाली- 

इस प्रणाली में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता है । सभी आर्थिक गतिविधियों का संचालन मूल्य – तंत्र ‘ अथवा बाजार शक्तियों के आधार पर होता है फलतः इस प्रणाली को स्वसंचालित प्रणाली कहा जाता है । 

 

2. उत्पादन एवं आय में वृद्धि – 

पूँजीवादी प्रणाली के द्वारा पश्चिमी देशों में तेजी से प्रगति हुई है । इन देशों में लाभ की भावना एवं निजी सम्पत्ति के लालच में तेजी से विकास हुआ है । इस प्रणाली में प्रतियोगिता की भावना से तकनीकी के स्तर में सुधार होता है । फलतः पूँजीवादी व्यवस्था में उत्पादन तथा आय में तेजी से वृद्धि होती है । 

 

3. परिवर्तनशीलता- 

पूँजीवाद में परिस्थितियों के अनुसार कार्य करने का गुण है परिस्थितियों के अनुसार सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों में परिवर्तन होते हैं । औद्योगिक – नीति , कृषि – नीति , व्यापार नीति , श्रम – नीति आदि में देश की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव होता रहता है । 

 

4. व्यक्तिगत स्वतंत्रता- 

इस प्रणाली में व्यक्ति अपनी इच्छानुसार व्यवसाय का चुनाव कर सकता है । उपभोक्ता भी अपनी पसन्द के अनुसार वस्तुएँ चुन सकता है । धन कमाने और उसे खर्च करने की भी पूर्ण स्वतंत्रता रहती है । संक्षेप में , पूँजीवाद के अन्तर्गत आर्थिक क्रियाओं के सम्बन्ध में पूर्ण स्वतंत्रता होती है । 

 

5. संसाधनों का कुशलतम उपयोग- 

पूँजीवाद के अन्तर्गत उत्पादक कम से कम साधनों के द्वारा अधिक से अधिक उत्पादन करने का प्रयास करता है । अपने लाभ को बढ़ाने के उद्देश्य से संसाधनों की फिजूलखर्ची को नियंत्रित रखता है । प्रतियोगिता के कारण भी उत्पत्ति के साधनों का कुशलतम उपयोग होता है । 

 

6. योग्यतानुसार प्रतिफल- 

इस प्रणाली में व्यक्ति की योग्यता समुचित रूप से पुरस्कृत होती है । प्रत्येक व्यक्ति । अपनी कुशलता एवं योग्यता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है । संक्षेप में , पूँजीवादी प्रणाली में प्रतिफल योग्यता के अनुसार प्राप्त होता है । 

 

7. प्रजातांत्रिक स्वरुप- 

पूँजीवाद का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि इसका स्वरुप प्रजातांत्रिक होता है । सभी प्रमुख निर्णय सरकार द्वारा बहुमत के आधार पर किए जाते हैं । यही कारण है कि इस प्रणाली में उपभोक्ता की इच्छा और रुचि के अनुसार ही वस्तुओं का उत्पादन होता है । इस प्रकार पूँजीवाद में उपभोक्ताओं के बहुमत का पालन किया जाता है और सभी आर्थिक क्रियाएँ इसी मूल भावना के आधार पर संचालित होती हैं ।

 

8. आर्थिक विकास की तीव्र गति – 

विश्व के विकसित देशों का इतिहास यह बताता है कि पंजीवादी देशों में विकास की दर अधिक रही है । लाभ की भावना पर आधारित होने के कारण इस प्रणाली में विनियोग एवं पूंजीनिर्माण की.दर भी अधिक रहती है । उत्पादक वर्ग जोखिम उठाकर नई – नई तकनीक का विकास करते हैं । फलतः आर्थिक विकास की दर अधिक रहती है । 

 

पूँजीवादी आर्थिक प्रणाली के दोष निम्नलिखित हैं –

 

1.आय एवं धन की असमानता – 

पूंजीवादी प्रणाली का सबसे बड़ा दोष यह है कि देश की सम्पत्ति कुछ मुट्ठी भर लोगों के पास जमा हो जाती है और अधिकांश लोग गरीबी एवं बेरोजगारी का जीवन व्यतीत करते हैं । इससे समाज में आय एवं धन की असमानताएँ बढ़ती हैं । 

 

2. वर्ग संघर्ष का जन्म- 

इस प्रणाली में पूँजीपति वर्ग तथा श्रमिक वर्ग दोनों मे टकराव होने लगता है । इससे अर्थ – व्यवस्था में हड़ताल , तालाबन्दी तथा तोड़फोड़ आदि देखने को मिलती है । इस प्रकार समाज वर्ग – संघर्ष का जन्म होता है । 

 

3. आर्थिक अस्थिरता- 

पूँजीवादी आर्थिक प्रणाली का संचालन मूल्य – तंत्र के द्वारा होता है । अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए कोई केन्द्रीय सत्ता नहीं होती । परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में तेजी एवं मन्दी की स्थिति निर्मित होती है । फलतः अर्थव्यवस्था में अस्थिरता पैदा होती है और व्यापार – चक्र क्रियाशील होते हैं । 

 

4. बेरोजगारी- 

इस प्रणाली में पूँजीपति वर्ग अपने लाभ को बढ़ाने के लिए मशीनों का उपयोग करता है । इससे श्रमिकों की मांग में कमी आती है तथा बेरोजगारी बढ़ जाती है । मन्दी की स्थिति में तो बेरोजगारी की समस्या अत्यधिक भयावह हो जाती है । 

 

5. शोषण पर आधारित व्यवस्था- 

पूँजीवादी आर्थिक प्रणाली में उत्पादक वर्ग अपने लाभ को अधिकतम करने के उद्देश्य में श्रमिकों को बहुत कम मजदूरी देते हैं । श्रमिकों से काम भी अधिक लिया जाता है । स्त्रियों एवं बच्चों को काम में लगाया जाता है , किन्तु उन्हें समुचित मजदूरी नहीं दी जाती । अतः यह कहा जाता है कि यह प्रणाली शोषण पर आधारित है ।

 

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