समाजवादी आर्थिक प्रणाली क्या है ? इसकी विशेषताओं की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर – समाजवादी आर्थिक प्रणाली एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है , जिसमें उत्पत्ति के भौतिक साधनों पर सामाजिक स्वामित्व होता है तथा उनका संचालन एक सामान्य योजना के अन्तर्गत , सम्पूर्ण समाज के प्रतिनिधि एवं उसके प्रति उत्तरदायी संस्थाओं द्वारा किया जाता है । समाज के सभी सदस्य समान अधिकारों के आधार पर ऐसे नियोजन एवं समाजीकृत उत्पादन के लाभों के अधिकारी होते हैं । 

समाजवादी प्रणाली के मुख्य लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

 

1. उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व- 

समाजवादी आर्थिक प्रणाली में उत्पत्ति के साधनों का प्रयोग सामाजिक कल्याण के लिए किया जाता है । इसमें व्यक्तिगत लाभ की भावना शून्य रहती है । चूँकि इस प्रणाली में उत्पत्ति के साधनों का स्वामित्व सरकार या समाज के पास होता है , फलतः इस प्रणाली में आर्थिक शोषण की कोई सम्भावना नहीं रहती तथा सामाजिक कल्याण में वृद्धि होती है । 

 

2. आर्थिक नियोजन- 

समाजवादी प्रणाली एक नियोजित प्रणाली होती है । इसमें केन्द्रीय नियोजन का महत्वपूर्ण स्थान होता है । उत्पादन से सम्बन्धित सभी निर्णय केन्द्रीय नियोजन – तंत्र द्वारा लिये जाते हैं , फलतः आर्थिक विकास भी तेजी से होता है । का प्रयोग समाज के हित के लिए किया जाता है । इस प्रणाली में व्यक्तिगत लाभ का कोई स्थान नहीं होता 

 

3. आर्थिक समानता – 

इस प्रणाली में उत्पादन के साधनों पर राज्य का नियंत्रण होता हैं और साधनों फलतः समाज में आर्थिक समानता पाई जाती है । 

 

4. शोषण की समाप्ति- 

समाजवादी आर्थिक प्रणाली में उत्पादन एवं वितरण पर सरकार का स्वामित्व एवं नियंत्रण होता है , फलतःशोषण का प्रश्न ही नहीं उठता । श्रमिकों को उनके श्रम का समुचित प्रतिफल दिया जाता है । उत्पादन में श्रमिकों की भागीदारी होती है और उन्हें लाभ में से पर्याप्त हिस्सा प्राप्त होता है । अतः इस प्रणाली में शोषण समाप्त हो जाता है । 

 

5. जीवन निर्वाह के लिए श्रम की आवश्यकता- 

इस प्रणाली में प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन यापन हेतु श्रम करना होता है । इससे दूसरों की आय पर जीवन – यापन करने वाला वर्ग समाप्त हो जाता है । प्रत्येक व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार कार्य करता है और बदले में उसे अपनी आवश्यकतानुसार प्रतिफल प्राप्त होता है । 

 

6. पूर्ण रोजगार की प्राप्ति- 

समाजवाद में उपलब्ध श्रमिकों के अनुसार , आर्थिक गतिविधियों का संचालन होता है । इससे श्रमशक्ति के समुचित उपयोग पर पूर्ण ध्यान दिया जाता है । आर्थिक तेजी एवं मन्दी भी पैदा नहीं होती , फलतः बेरोजगारी की समस्या पैदा नहीं होती है । 

 

7. आर्थिक स्थायित्व- 

इस प्रणाली में आर्थिक गतिविधियों का संचालन नियोजित ढंग से किया जाता है , इससे तेजी एवं मन्दी की समस्या पैदा नहीं होती है । इस व्यवस्था में वस्तुओं का उत्पादन उनकी मांग के अनुसार किया जाता है , जिससे अर्थव्यवस्था में स्थायित्व बना रहता है । फलतः व्यापार – चक्र जैसी समस्या पैदा नहीं होती है । 

 

8. मूल्य – 

तंत्र की समाप्ति- समाजवाद में वस्तुओं की कीमतों का निर्धारण सरकार द्वारा किया जाता है । इससे बाजार की शक्तियों का स्थान गौण हो जाता है तथा मूल्य – तंत्र भी कार्यशील नहीं रहता । उत्पादकों में होने वाली परस्पर प्रतियोगिता भी समाप्त हो जाती है । विज्ञापन एवं प्रचार – प्रसार पर होने वाला व्यय भी समाप्त हो जाता है । 

 

Leave a Comment