वर्ष 1951 से वर्ष 1991 तक भारत के विकास की प्रमुख उपलब्धियों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर- वर्ष 1951 से वर्ष 1991 तक भारत के विकास की प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित रहीं 

 

1. सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार- 

देश में मूलभूत सुविधाओं तथा भारी एवं बुनियादी उद्योगों के विकास हेतु सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार किया गया । इस अवधि में इस्पात , विद्युत , उर्वरक , भारी मशीनों , रसायन , जहाज – निर्माण आदि के कारखाने सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत स्थापित किए गए , फलतः देश में सार्वजनिक क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ । 

 

2. आत्मनिर्भरता – 

पंचवर्षीय योजनाओं में आत्मनिर्भरता प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया था । इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए विदेशी सहायता पर निर्भरता को कम किया गया । इस अवधि में कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त की गई तथा विशाल औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया । 

 

3. विदेशी व्यापार – 

वर्ष 1991 तक आयातों पर नियंत्रण रखा गया । इस अवधि में केवल अनिवार्य वस्तुओं , जैसे – मशीनरी , उर्वरक और पेट्रोलियम का ही मुख्य रूप से आयात किया गया । देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाए रखने के लिए संरक्षण की नीति को अपनाया गया । फलतः इस अवधि में व्यापार धीमी गति से बढ़ा । कुल विश्व व्यापार में भारत का योगदान वर्ष 1951 में लगभग 1 प्रतिशत था , जो घटकर वर्ष 1991 में केवल 0.6 प्रतिशत रह गया था । 

 

4. राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय – 

वर्ष 1951 से 1991 की अवधि में राष्ट्रीय आय में औसतन 4.0 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई । इस अवधि में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होने के कारण प्रतिव्यक्ति आय बहुत धीमी गति से बढ़ी । 

 

5. रोजगार के अवसरों में वृद्धि – 

इस अवधि में यद्यपि रोजगार के अवसरों में वृद्धि के प्रयास किए गये तथापि ‘ यह समस्या दिन – प्रतिदिन बढ़ती रही । वर्ष 1991 तक बेरोजगारी की समस्या अत्यधिक जटिल हो गई थी । 

 

6. विदेशी मुद्रा का संकट- 

वर्ष 1951 से 1991 तक भारत ने आयातों को कम करने की नीति को अपनाया , किन्तु पेट्रोलियम पदार्थ , मशीनरी एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात हेतु भारत को विदेशी मुद्रा की आवश्यकता बनी रही । इन वस्तुओं के आयात हेतु भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी ऋण लेना पड़े थे । फलतः भारत विदेशी मुद्रा के संकट में फंस गया था । 

 

7. मूल्य वृद्धि- 

नियोजन की अवधि में भारत को लगातार मूल्य वृद्धि का सामना करना पड़ा था । प्रथम पंचवर्षीय योजना के बाद वर्ष 1956 से 1991 के मध्य भारत में मुद्रास्फीति की दर 5 से 6 प्रतिशत के मध्य रही । प्रथम योजना को छोड़कर शेष सभी योजनाओं में मूल्य वृद्धि की समस्या बनी रही । इस प्रकार स्पष्ट होता है कि वर्ष 1951 से 1991 के दौरान भारत ने अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की , किन्तु विदेशी व्यापार एवं विदेशी मुद्रा के क्षेत्र में भारत को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा था । एक स्थिति तो ऐसी आ गई थी कि भारत को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति के लिए अपने स्वर्ण भण्डार को गिरवी रखकर ऋण लेना पड़ा था ।

 

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