मिश्रित अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं ? मिश्रित अर्थव्यवस्था के प्रमुख दोष बताइए ।

उत्तर – मिश्रित अर्थव्यवस्था एक ऐसी आर्थिक प्रणाली है , जिसमें सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र दोनों साथ – साथ कार्य करते हैं । 

मिश्रित अर्थव्यवस्था के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं –

 

1. दुर्बल एवं अकुशल प्रणाली- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में पाये जाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र पूर्णतः विपरीत पद्धति से कार्य करने वाले क्षेत्र हैं , जिसके कारण इनमें उचित सामंजस्य स्थापित नहीं हो पाता । परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था का कुशल संचालन नहीं हो पाता और दोनों क्षेत्र परस्पर पूरक न बनकर प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं । अतः इसे एक दुर्बल और अकुशल प्रणाली माना जाता है । 

 

2. राष्ट्रीयकरण का भय- 

मिश्रित प्रणाली में निजी क्षेत्र को सदैव राष्ट्रीयकरण का भय बना रहता है । इस भय के कारण उद्यमियों में विनियोग के प्रति विशेष रूचि एवं प्रेरणा उत्पन्न नहीं हो पाती । राष्ट्रीयकरण के भय के कारण विदेशी उद्यमी भी इन देशों में अपनी पूँजी का निवेश नहीं करते । प्रजातांत्रिक देशों में चुनाव के बाद सरकारें बदलती रहती हैं । इससे सरकारी नीतियों एवं कार्यक्रमों में परिवर्तन हो जाता है । इससे आर्थिक विकास की गति प्रभावित होती है ।

 

3. अकुशलता- 

मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूंजीवाद एवं समाजवाद दोनों के दोष विद्यमान रहते हैं । इस प्रणाली में न तो नियोजन – तंत्र ठीक ढंग से कार्य कर पाता है और न ही बाजार – तंत्र क्रियाशील हो पाता है । इससे अर्थव्यवस्था में अकुशलता फैल जाती है । 

 

4. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन नहीं – 

इस प्रणाली में सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को अधिक महत्व देती है । फलतः निजी क्षेत्र की उपेक्षा होती है । सरकारी नीतियाँ एवं कार्यालय भी निजी क्षेत्र के हित में नहीं होते । फलतः निजी क्षेत्र का समुचित विकास नहीं होता है । 

 

5. विदेशी पूँजी का आगमन- 

सार्वजनिक क्षेत्र के विस्तार हेतु सरकार विदेशी पूँजी को आमंत्रित करती है । इससे देश में विदेशी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है । विदेशी शक्तियाँ देश की राजनैतिक व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं । 

 

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