वैश्वीकरण के बाद भारत की आर्थिक स्थिति की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर – वैश्वीकरण के बाद भारत की आर्थिक स्थिति को निम्नानुसार स्पष्ट किया जा सकता है 

 

1. आयात – निर्यात – 

वर्ष 1991 में घोषित आयात – निर्यात नीति में निर्यात आधारित विकास पर जोर दिया गया है । इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु आयात एवं निर्यात पर लगे हुए प्रतिबन्धों तथा प्रशासनिक नियंत्रण को कम किया गया है आयात – निर्यात नीति में आयातों एवं निर्यातों को और अधिक सुविधाजनक बनाया गया है इससे कुल विश्व व्यापार में भारत के विदेशी व्यापार का योगदान वर्ष 1990 में 0.6 प्रतिशत था , जो बढ़कर अब लगभग 1.0 प्रतिशत हो गया है । 

 

2. औद्योगीकरण- 

वर्ष 1991 घोषित औद्योगिक नीति और बाद में किए गए सुधारों के कारण देश में औद्योगिकरण में तेजी आई है । अब सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत आरक्षित उद्योगों की संख्या केवल तीन रह गई है । अर्थव्यवस्था के अनेक क्षेत्र अब विदेशी निवेश के लिए खोल दिए गए हैं । इस नई औद्योगिक – नीति के परिणामस्वरूप देश में विकास दर लगभग 9 प्रतिशत हो गई है । 

 

3. विदेशी निवेश में वृद्धि- 

वैश्वीकरण के बाद अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने भारत में अपने निवेश में वृद्धि की है । इन कम्पनियों ने सेलफोन , मोटर गाड़ियाँ , इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों , ठंडे पेय कहा पदार्थों , जंक फूड खाद्य पदार्थों एवं बैंकिंग जैसी सेवाओं के निवेश में रुचि दिखाई है । इस जा सकता है कि 1991 के बाद देश में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है और परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ है । 

 

4. उपभोक्ताओं को लाभ- 

वैश्वीकरण के बाद विदेशी एवं स्थानीय उत्पादकों के मध्य परस्पर प्रतियोगिता में वृद्धि हुई है और परिणामस्वरूप अनेक वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतें कम हुई हैं । इससे उपभोक्ताओं को उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली वस्तुएँ प्राप्त हो रही हैं । अब उपभोक्ताओं के लिए पहले से अधिक विकल्प उपलब्ध हैं ।

 

5. भारतीय कम्पनियों को लाभ- 

वैश्वीकरण ने अनेक भारतीय कम्पनियों को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के रूप में स्थापित किया है । इन कम्पनियों ने विश्व स्तर पर अपने क्रियाकलापों का विस्तार किया है । उदाहरण के लिए- टाटा मोटर्स , इंफोसिस , रैनबैक्सी , ऐशियन पेंट्स , सुन्दरम फास्नर्स को लिया जा सकता है . जो अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ बन गई हैं । भारतीय कम्पनियों ने विदेशी कम्पनियों से प्रतियोगिता करने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाया है और उत्पादन के मानकों को ऊँचा उठाया है । 

 

6. सेवा क्षेत्र का विस्तार- 

वैश्वीकरण ने संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीन लाभप्रद सेवाओं का विस्तार किया है । एक भारतीय कम्पनी द्वारा लन्दन स्थित कम्पनी के लिए पत्रिका का प्रकाशन और कॉल सेन्टर्स इसके उदाहरण हैं । इसके अतिरिक्त डाटा एन्ट्री , लेखाकरण , प्रशासनिक कार्य , इंजीनियरिंग जैसी कई सेवाएँ भारत जैसे देशों में उपलब्ध हैं 

 

Leave a Comment