भारत में वैश्वीकरण से उत्पन्न समस्याओं का वर्णन कीजिए ।

उत्तर – वैश्वीकरण से उत्पन्न समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

 

1. छोटे उत्पादकों पर प्रभाव- 

भारत के अनेक छोटे उद्योगों पर वैश्वीकरण का बुरा प्रभाव पड़ा है । विदेशों में उत्पादित माल से प्रतियोगिता करने में छोटे उद्योग सक्षम नहीं हैं । परिणामस्वरूप अनेक छोटे उद्योग बन्द हो गए है । बैटरी , संधारित्र , प्लास्टिक , खिलौने , टायर , डेयरी उत्पादों एवं खाद्य तेल के उद्योगों की स्थिति अत्यधिक खराब है । 

 

2. रोजगार में अनिश्चितता- 

वैश्वीकरण के कारण श्रमिकों के जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है । बढ़ती प्रतियोगिता के कारण अधिकांश नियोक्ता इन दिनों श्रमिकों को रोजगार देने में लचीलापन पसन्द करते हैं । इसका अर्थ यह है कि श्रमिकों का रोजगार अब सुनिश्चित नहीं है । कारखाने के मालिक लागत को कम करने के उद्देश्य से श्रमिकों को अब अस्थाई रोजगार प्रदान करते हैं , ताकि उन्हें वर्ष भर का वेतन नहीं देना पड़े । 

 

3. सभी लोगों को लाभ नहीं- 

वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद नहीं रहा है । शिक्षित , कुशल और सम्पन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है । इसके विपरीत , अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है । समाज का कमजोर एवं गरीब वर्ग वैश्वीकरण के लाभों से दूर है । 

 

4. विकसित देशों का वर्चस्व- 

वैश्वीकरण की प्रक्रिया विश्व व्यापार संगठन के निर्देशानुसार क्रियान्वित की जा रही है , किन्तु इस संगठन में विकसित देशों का वर्चस्व अधिक है । ये देश उन्हीं नीतियों एवं कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं , जिनसे उन्हें लाभ प्राप्त होता है । 

 

5. क्षेत्रीय विषमताएँ- 

वैश्वीकरण से क्षेत्रीय विषमताएँ बढ़ती हैं । जिस प्रकार वैश्वीकरण से विकासशील देशों की तुलना में विकसित देशों को अधिक लाभ मिला है , ठीक इसी प्रकार देश के अन्दर भी विकसित क्षेत्रों को पिछड़े क्षेत्रों की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त हुआ है । इस प्रकार वैश्वीकरण के लाभ सभी क्षेत्रों के लोगों को प्राप्त नहीं हुए हैं ।

 

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