वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं ? वैश्वीकरण की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने वाले कारणों की विवेचना कीजिए ।

उत्तर- वैश्वीकरण से आशय – वैश्वीकरण से आशय सम्पूर्ण विश्व का परस्पर सहयोग एवं समन्वय से एक बाजार के रूप में कार्य करने से है । वैश्वीकरण की प्रक्रिया के अन्तर्गत वस्तुओं एवं सेवाओं के एक देश से दूसरे देश में आने एवं जाने के अवरोधों को समाप्त कर दिया जाता है । इससे सम्पूर्ण विश्व में बाजार शक्तियाँ स्वतंत्र रूप से कार्य करने लगती हैं । 

वैश्वीकरण को प्रोत्साहित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं –

 

1. तकनीकी ज्ञान का विस्तार- 

तकनीकी ज्ञान का तेजी से विकास , परिवहन प्रौद्योगिकी , दूरसंचार सुविधाओं , जैसे- इंटरनेट , मोबाइल फोन , फैक्स आदि ने विश्वभर में एक दूसरे से सम्पर्क करने के कार्य को सरल बना दिया है । संचार उपग्रहों ने इन सुविधाओं का विस्तार कर क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिया है । फलतः वैश्वीकरण का तेजी से विस्तार हुआ है । 

 

2. उदारीकरण की प्रक्रिया –

1970 एवं 1990 के दशकों में अनेक ऐसे परिवर्तन हुए , जिनसे विदेशी व्यापार को उदार बनाने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई । उदाहरणार्थ- सोवियत संघ का विघटन , यूरोप का आर्थिक एकीकरण , जापान का विश्व की प्रमुख शक्ति के रूप में प्रकट होना और कोरिया , सिंगापुर , हांगकांग जैसे देशों की आर्थिक प्रगति । फलतः विश्व के अनेक देशों में विश्व व्यापार को उदार बनाने पर , सहमति हुई । इससे उदारीकरण की प्रक्रिया को बल मिला , जिससे वैश्वीकरण को प्रोत्साहन मिला । 

 

3. प्रतियोगिता एवं बाजार का विस्तार- 

विभिन्न उत्पादक कम्पनियाँ बाजारों पर कब्जा करने के उद्देश्य से प्रतियोगिता का सहारा लेती हैं । इसके लिए ये कम्पनियाँ कीमत कम करने के साथ – साथ विज्ञापनों एवं प्रचार – प्रसार के विभिन्न माध्यमों का उपयोग करती हैं । 

 

4. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का विस्तार- 

दूरस्थ देशों को आपस में जोड़ने में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का विशेष महत्व है । ये कम्पनियाँ उन देशों में उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती हैं , जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य साधन मिलते हैं । इससे उत्पादन लागत में कमी आती है तथा कम्पनियों की प्रतियोगिता करने की क्षमता बढ़ जाती है , जिससे वैश्वीकरण को प्रोत्साहन मिलता है । 

 

5. विदेशी व्यापार में विस्तार- 

विश्व बैंक एवं अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष , जैसे- अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी व्यापार के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । इससे उत्पादकों को अपनी वस्तुओं को घरेलू बाजार के साथ – साथ विश्व बाजार में बेचने का अवसर प्राप्त हुआ है । विदेशी व्यापार के विस्तार में जहाँ उत्पादन की मात्रा में वृद्धि हुई है , वहीं उत्पादकों को श्रम – विभाजन एवं विशिष्टीकरण का लाभ प्राप्त हुआ है ।

 

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