भारत में लोहा इस्पात उद्योग किन चार चरणों में केन्द्रित है और क्यों है ?

उत्तर- भारत में लोहा – इस्पात का उत्पादन- स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भारत के लोहा – इस्पात उद्योग के व्यवस्थित विकास से उत्पादन में निरन्तर प्रगति हुई है । पिछले कुछ दशकों में उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है , 1970-71 में 70 लाख टन से बढ़कर 2005-06 में 492 लाख टन हो गया । इस्पात उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में नौवाँ स्थान है । इस उद्योग से भारत में 5 लाख से अधिक मनुष्य प्रत्यक्षतः रोजगार प्राप्त कर रहे हैं ।

 

भारत में लोहा इस्पात उद्योग मुख्यत : चार क्षेत्रों में वितरित है-

(अ) कोयला क्षेत्रों में स्थित इस्पात केन्द्र- बर्नपुर , हीरापुर , कुल्टी , दुर्गापुर तथा बोकारो ।

(ब) लौह – अयस्क क्षेत्रों में स्थित इस्पात केन्द्र – भिलाई , राउरकेला , भद्रावती , सलेम , विजयनगर और चन्द्रपुर लौह – अयस्क खानों के समीप स्थित है ।

(स) कोयला व लौह – अयस्क के बीच जोड़ने वाले परिवहन सुविधा प्राप्त स्थानों पर स्थित इस्पात केन्द्र – जमशेदपुर ।

(द) तटीय सुविधा स्थल पर स्थित इस्पात केन्द्र – विशाखापट्टनम ।

 

क्र. कारखाने का नाम स्थान राज्य विषेश
1. टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी  जमशेदपुर झारखंड सबसे बड़ा कारखाना
2. इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी  बर्नपुर पश्चिम बंगाल कुल्टी तथा हीरापुर में दो कम्पनी
3. विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील कम्पनी  भद्रावती कर्नाटक —-
4. हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड राउरकेला उड़ीसा जर्मनी की सहायता से बना
5. भिलाई – इस्पात कारखाना भिलाई छत्तीसगढ़ रूसी विशेषज्ञों के सहयोग से बनाया गया
6. दुर्गापुर इस्पात कारखाना दुर्गापुर पश्चिम बंगाल ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित
7. लोहा – इस्पात कारखाना  सलेम तमिलनाडु —-
8. विशाखापट्टनम इस्पात कारखाना विशाखापट्टनम आंध्रप्रदेश केन्द्र व राज्य का संयुक्त उपक्रम
9. बोकारो इस्पात कारखाना  बोकारो झारखण्ड आधुनिकतम तथा इसकी आर.सी.सी. चिमनी एशिया में सबसे ऊँची 
10. विजयनगर इस्पात कारखाना हास्पेट कर्नाटक पूर्णतः भारतीय तकनीक पर आधारित

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