मध्यप्रदेश में वन क्षेत्रों में कुटीर एवं लघु उद्योग की स्थापना हेतु सुझाव दीजिए ?

उत्तर- कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग की स्थापना करने हेतु कुछ प्रयास अनिवार्य हैं । यहाँ कुछ सुझाव प्रस्तुत है – 

 

1. वित्तीय सुविधा- 

उद्योग कोई सा भी लगाया जाए कम या अधिक मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है । आदिवासी एवं वनवासियों को इसकी बहुत अधिक कमी होती है । अतः प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण आपूर्ति की भी व्यवस्था उद्योग स्थापना के लिए आर्थिक सहायता से की जाना चाहिए । 

 

2. कार्यस्थल की व्यवस्था- 

उद्योग चलाने के लिए उपयुक्त कार्यस्थल की व्यवस्था वनवासी स्वयं नहीं कर सकते अतः इसकी व्यवस्था भी सहकारी समितियों व शासन द्वारा आर्थिक सहायता से की जाना चाहिए ।

 

3. तकनीकी सहायता- 

इसी प्रकार अच्छे उत्पादन हेतु तकनीकी ज्ञान की आवश्यक्ता भी होती है । अतः क्षेत्रीय उद्योग की आवश्यक्ता को देखते हुए तकनीशियनों की सुविधा उपलब्ध कराई जाना चाहिए । 

 

4. विपणन की व्यवस्था- 

वनोपज आधारित कुटीर एवं लघु उद्योग उसी शर्त पर सफल हो सकते हैं , जबकि उनके उत्पादों की बिक्री की उचित व्यवस्था हो । माल के बिकने से ही आय की प्राप्ति होगी । राज्य सरकार हेतु मेले एवं प्रदर्शनियों का आयोजन करती है । किन्तु इससे वर्ष भर की बिक्री की व्यवस्था नहीं हो पाती अतः मेले एवं प्रदर्शनियों के साथ – साथ झके सहकारी बिक्री स्टोर्स आदि की व्यवस्था भी होना चाहिए । 

 

5. विज्ञापन की व्यवस्था- 

आज का युग विज्ञापनों का युग है । हर उत्पाद की बिक्री विज्ञापनों के माध्यम से ही होती है । जितना बड़ा उत्पादक होता है वह उतना ही अधिक विज्ञापनों पर खर्च करता है । विज्ञापनों से जहां उत्पादों तथा उनकी विशेषताओं की जानकारी लोगों को प्राप्त होती है वहीं आकर्षक विज्ञापन क्रेताओं की संख्या बढ़ाने में सहायक होते हैं । हमारे कुटीर व लघु उद्योग चलाने वाले उत्पादकों के पास इतने संसाधन नहीं होते कि वे विज्ञापन पर खर्च कर सकें । अतः यह दायित्व भी प्रशासन का होता है कि वे इनका प्रचार – प्रसार करवाए । सरकार का मेले , प्रदर्शनियों का आयोजन करने का यह एक प्रमुख उद्देश्य होता है । 

 

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