प्रदूषण के मानव – जीवन पर दुष्प्रभाव लिखिए ?

उत्तर- मानव – जीवन पर प्रदूषण के निम्नलिखित दुष्प्रभाव हैं- 

( 1 ) प्रदूषित वायु , मानव की श्वसन क्रिया को क्षति पहुँचाती है । इससे दमा , निमोनिया , गले में दर्द , खाँसी के साथ ही कैंसर , मधुमेह और हृदय रोग जैसे घातक रोग होते हैं तथा हानिकारक गैसों का . वायुमण्डल में अधिक मिश्रण भीषण हादसों को जन्म देता है , जिससे मनुष्य मौत के शिकार हो जाते हैं । भोपाल गैस त्रासदी इसी प्रकार की औद्योगिक गैस रिसाव का परिणाम थी । 

( 2 ) प्रदूषित पेय जल , अनेक रोगों के कीटाणु , विषाणु मनुष्य के शरीर में पहुँचाकर रोगों को उत्पन्न कर देता है । प्रदूषित जल के सेवन से पेचिश , हैजा , अतिसार , टायफाइड , चर्मरोग , खाँसी , जुकाम , लकवा , अन्धापन , पीलिया व पेट के रोग हो जाते हैं । 

( 3 ) गंदगी के क्षेत्रों एवं प्रदूषित चीजों पर मक्खी , मच्छर , कीड़े आदि पनपते हैं । गन्दगी युक्त वातावरण में अनेक कीटाणु पैदा होते हैं , जो मनुष्य के लिए पेचिश , तपेदिक , हैजा , आँतों के रोग , आँखों में जलन आदि रोगों हेतु उत्तरदायी होते हैं । 

( 4 ) ध्वनि प्रदूषण का सर्वाधिक प्रभाव सुनने की शक्ति पर पड़ता है । अत्यधिक शोर से व्यक्ति बहरा हो जाता है । इसके अतिरिक्त इससे रक्तचाप , हृदयरोग , सिरदर्द , घबराहट आदि रोग भी मनुष्य में पनप जाते हैं । औद्योगीकरण से बढ़ते प्रदूषण और वायुमण्डल में बिखरती कार्बन डाइ ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड से ‘ ग्रीन हाऊस ‘ प्रभाव का जन्म हुआ है । सूर्य की गर्मी के वायुमण्डल में कैद हो जाने से धरती के औसत ताप में वृद्धि हो रही है , जिससे भू – तापन ( ग्लोबल वार्मिंग ) होने लगी है । इसके दुष्परिणामों को पृथ्वी पर होने वाले महाप्रलय के रूप में आंका जा रहा है । 

 

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