रेलमार्गों का वितरण भारत में असमान है स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर- भारत में रेलमार्गों का विकास उन्हीं क्षेत्रों में हुआ है , जो आर्थिक दृष्टि से अधिक विकसित हैं । यह वितरण अत्यधिक असमान है , जिसे निम्नानुसार स्पष्ट किया जा सकता है अधिक सघन रेलमार्ग क्षेत्र- यह क्षेत्र उत्तर भारत के सतलज – गंगा के मैदान में पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक विस्तारित है । इस रेल क्षेत्र के प्रमुख स्टेशन लुधियाना , दिल्ली , कानपुर , लखनऊ , इलाहाबाद , वाराणसी , आसनसोल , हावड़ा आदि हैं । मध्य सघन रेलमार्ग क्षेत्र- इस रेल क्षेत्र में प्रायद्वीपीय मैदान एवं दक्षिण के पठार सम्मिलित हैं । अहमदाबाद , बड़ोदरा , चैन्नई मुख्य स्टेशन हैं । कम सघन रेलमार्ग क्षेत्र- देश के पर्वतीय , पठारी , मरुस्थलीय , दलदली , जंगली तथा पिछड़ी अर्थव्यवस्था एवं विरल जनसंख्या वाले भू – भाग , जहाँ परिवहन की सुविधाएँ नगण्य हैं , वहाँ रेलमार्गों का विकास नहीं हो पाया है । इनमें कश्मीर , हिमाचल प्रदेश , सिक्किम , अरुणाचल प्रदेश , मणिपुर , नागालैण्ड , मिजोरम , त्रिपुरा , मेघालय , छत्तीसगढ़ का बस्तर एवं उड़ीसा के अधिकांश भाग सम्मिलित हैं । भारतवर्ष के पूर्वी एवं पश्चिमी तटीय भागों में समुद्र तट के कटा – फटा व संकरे होने तथा पहाड़ियों के किनारे के कारण रेलमार्ग पर्याप्त विकसित नहीं हो सके हैं । पूर्वी तट पर समुद्र तट के कन्याकुमारी से हावड़ा तक रेलमार्ग विकसित है । पश्चिम तटीय क्षेत्र में कर्कोकण रेल निगम की स्थापना के साथ 837 कि.मी. का रेलमार्ग विकसित हुआ है । इस प्रकार स्पष्ट है कि रेलमार्गों का वितरण भारत में असमान है । 

 

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