विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान बताते हुए अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर – विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में इस प्रकार योगदान रहता है- 

( 1 ) इससे देश स्वावलम्बी बन जाते हैं । स्थिति , जलवायु , भूमि की प्रकृति तथा अन्य कारणों से जो वस्तुएँ देश में उपलब्ध नहीं होती हैं , उनकी पूर्ति विदेशी व्यापार से सम्भव है । 

( 2 ) इससे औद्योगीकरण को बल मिलता है । कच्चे माल और शक्ति के साधनों की आपूर्ति विदेशी व्यापार से सम्भव हो जाती है । 

( 3 ) इससे कृषि विकास की प्रबल सम्भावनाएँ निर्मित होती हैं । उन्नत तकनीक एवं बीजों की आपूर्ति से कृषि विकास को बढ़ावा मिलता है । 

( 4 ) इससे विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है , जिसका उपयोग राष्ट्र के आर्थिक विकास में किया जाता है । 

( 5 ) इससे उद्योग एवं कृषि में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं । 

( 6 ) इससे बाजार में वस्तुओं की विविधता देखने को मिलती है । उपभोक्ता अपने जीवन स्तर को उन्नत कर सकता है । 

( 7 ) व्यापार से विभिन्न देशों में बाढ़ , अकाल , महामारी तथा भूकम्प आदि के विनाश से लोगों की रक्षा होती है । 

 

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं –

1 . स्थिति- जो देश संसार के व्यापारिक मार्गों पर स्थित होते हैं , उनकी अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक उन्नति शीघ्र होती है । 

2. कटा – फटा समुद्र तट – जिन देशों का समुद्र तट बहुत कटा – फटा होता है , वहाँ उन्नत बंदरगाह विकसित होते हैं , लोग साहसी और अच्छे नाविक होते हैं । 

3. प्राकृतिक साधन- किसी देश का व्यापार वहाँ के प्राकृतिक साधनों की भिन्नता से प्रभावित होता है । प्राकृतिक साधनों में देश की जलवायु , वन , कृषि योग्य भूमि , कृषि उपजें , खनिज आदि सम्मिलित किये जाते हैं । इन्हीं साधनों पर उत्पादन निर्भर करता है । 

4. आर्थिक विकास- सभी देशों के आर्थिक विकास की स्थिति एक समान नहीं होती । जो देश आर्थिक प्रगति में आगे हैं , उसका व्यापार अधिक उन्नत होता है । 

5. सांस्कृतिक भिन्नता- संसार के सभी देश सांस्कृतिक रूप से समान नहीं हैं । विभिन्न देशों में सामाजिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण , रहन – सहन , रीति – रिवाज , रूचियाँ भिन्न – भिन्न हैं । इस सांस्कृतिक भिन्नता के कारण उत्पादन एवं मांग भी भिन्न – भिन्न हैं । 

6. जनसंख्या की भिन्नता – जनसंख्या का असमान वितरण व्यापार को प्रभावित करता है । अधिक जनसंख्या वाले देशों में माँग अधिक रहती जनसंख्या वाले देशों में लोगों का जीवन स्तर ऊँचा होता है तथा वस्तुओं की मांग अधिक रहती है ।

 

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