केबिनेट मिशन का क्या उद्देश्य था ? वह उन उद्देश्यों में कहाँ तक सफल रहा ?

उत्तर- शिमला सम्मेलन की असफलता के बाद इंग्लैण्ड की नयी मजदूर दल की सरकार ने भारत की स्थिति की ठीक से जानकारी लेने के लिए एक शिष्टमंडल भारत भेजा । ब्रिटिश संसदीय शिष्टमंडल ने अपनी रिपोर्ट में भारत में सत्ता को तुरन्त हस्तान्तरित किये जाने की अनुशंसा की । इस स्थिति में ब्रिटिश प्रधानमंत्री लार्ड एटली ने कैबिनेट मिशन भारत भेजा । कैबिनेट मिशन ने भारत के भावी स्वरूप को निश्चित करने वाली एक योजना 16 मई , 1946 को प्रस्तुत की । योजना के दो मुख्य भाग थे- अन्तरिम सरकार की स्थापना की.तात्कालिक योजना तथा संविधान निर्माण की दीर्घकालीन योजना । 6 अगस्त , 1946 को वायसराय ने कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अन्तरिम सरकार के निर्माण में सहयोग के लिए अनुरोध किया । इस बीच लीग ने पाकिस्तान की माँग का दबाव बढ़ाने के लिए 16 अगस्त , 1946 को सीधी कार्रवाई का निश्चय किया । लीग और जिन्ना की हठधर्मिता के कारण देश भर में साम्प्रदायिक दंगे हुए । 2 सितम्बर , 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अन्तरिम सरकार ने शपथ ली । सरकार को सुचारू रूप से कार्य करते देख लीग ने सरकारी कार्यों में अवरोध डालने की नीयत से अन्तरिम सरकार का हिस्सा बनना स्वीकार किया । इससे वातावरण खराब हुआ । सरकार ने दोनों पक्षों में समझौता कराने के प्रयास किए , परन्तु लीग की दबाव – नीति के कारण समझौता नहीं हो सका । इन्हीं परिस्थितियों में 20 फरवरी , 1947 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री लार्ड एटली ने भारत छोड़ने की घोषणा की । 

 

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