भारत छोड़ो आन्दोलन का क्या अर्थ है एवं यह कब शुरू हुआ ? भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में इसके महत्व को लिखिए ।

उत्तर- 1942 के वर्ष में देश के राजनीतिक मंच पर एक ऐसा ऐतिहासिक आन्दोलन आरम्भ हुआ , जिसे ‘ भारत छोड़ो आन्दोलन ‘ के नाम से जाना जाता है । यह यथार्थतः जन – आन्दोलन था । यह एक ऐसा अंतःप्रेरित और स्वेच्छामूलक सामूहिक आन्दोलन था , जिसका जन्म राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए स्व – प्रेरणा के फलस्वरूप हुआ था । इस आन्दोलन के आरम्भ होने के मूल में अनेक कारण विद्यमान थे । भारत द्वितीय विश्वयुद्ध में भागीदार बनने का इच्छुक नहीं था , परन्तु इस युद्ध में उसे उसकी सहमति के बिना सम्मिलित किया गया था । युद्ध का साया पड़ने के साथ ही देश की आर्थिक स्थिति शोचनीय हो गयी थी । खाद्य स्थिति क्रमशः बिगड़ती जा रही थी । निर्वाह व्यय तीन गुना बढ़ गया था । मुनाफाखोरी और शोषण अनवरत जारी । इन परिस्थितियों में काँग्रेस ने एक असहयोगात्मक आन्दोलन पुनः आरम्भ करने का निश्चय किया । .8 अगस्त की रात्रि में भारत छोड़ो ‘ प्रस्ताव मुम्बई में बहुमत से पारित हुआ । गाँधीजी ने इस अवसर पर कहा कि ” प्रत्येक भारतवासी को चाहिए कि वह अपने आपको स्वाधीन मनुष्य समझे । उसे स्वाधीनता की यथार्थतापूर्ण प्राप्ति अथवा उसके हेतु किए गए प्रयत्न में मर मिटने को तत्पर रहना चाहिए । ” गाँधीजी ने कहा , ” पूर्ण स्वाधीनता से न्यून किसी भी बात से मैं सन्तुष्ट होने वाला नहीं हूँ । हम करेंगे या मरेंगे ।

 

 गांधीजी के आन्दोलन आरम्भ करने के पूर्व ही 9 अगस्त की रात्रि को सरकार ने महात्मा गाँधी , मौलाना आजाद , सरदार पटेल , जवाहर लाल नेहरु , सरोजिनी नायडू तथा कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को बन्दी बना कर पूना भेज दिया । शासन द्वारा उतावलेपन में की गयी उत्तेजक कार्रवाई से संघर्ष स्वयमेव आरम्भ हो गया । जनसमूह सड़कों पर आ गया । देशभर में हड़ताल , प्रदर्शन तथा सभाओं का आयोजन हुआ । बम्बई , अहमदाबाद , पूना , दिल्ली , कानपुर , इलाहाबाद , वाराणसी , जबलपुर , पटना , यहाँ तक कि प्रत्येक नगर , तहसील और ग्राम में जनता ने अपने आपको संगठित किया और संघर्ष आरम्भ किया । 

 

भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्व- 

भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्व यह रहा कि इसमें भारत की स्वतन्त्रता को राष्ट्रीय आन्दोलन की तात्कालिक माँग बना दिया । आन्दोलनकारियों ने परिवहन के साधनों को नष्ट – भ्रष्ट किया , पुलिस स्टेशनों पर आक्रमण किए , शासकीय अभिलेखों को विनष्ट किया तथा शासन के प्रत्येक कानून की अवज्ञा की । पुलिस की उत्तेजनात्मक दमन कार्रवाई के कारण आन्दोलन ने अहिंसा के सिद्धान्तों का अतिक्रमण भी किया । 

 

Leave a Comment