क्रान्तिकारियों के बारे में आप क्या जानते हैं ? ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उन्होंने कौन – से तरीके अपनाए ?

उत्तर – ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रियावादी नीति के परिणामस्वरूप 19 वीं शताब्दी के अंतिम दशक में भारत में क्रांतिकारी राष्ट्रीयता का अभ्युदय हुआ । बंगाल विभाजन के बाद भारतीयों में क्रांतिकारी भावना का तेजी से प्रसार हुआ । क्रांतिकारी विचारधारा के अनुयायियों का विश्वास था कि अहिंसा और वैधानिक साधनों द्वारा राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं । क्रांतिकारी मानते थे कि हिंसा और भय दिखाकर स्वराज व स्वशासन प्राप्त किया जा सकता है । वे मातृभूमि को तत्काल विदेशी बंधन से मुक्त कराना चाहते थे । 

 

अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए क्रान्तिकारियों ने गुप्त समितियों का गठन किया , युवकों को सैनिक प्रशिक्षण दिया , अस्त्र – शस्त्र एकत्र किये तथा समाचार – पत्रों और अन्य माध्यमों से क्रांतिकारी विचारों का प्रसार किया । अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रांतिकारियों ने बंगाल में अनुशीलन समितियों की स्थापना की । ये समितियाँ युवकों को भारतीय इतिहास और संस्कृति से अवगत कराती थीं तथा उनमें स्वतन्त्रता की भावना जगाती थीं । समितियाँ युवकों में त्याग और बलिदान की भावना उत्पन्न कर उन्हें मातृभूमि को विदेशी बंधनों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए तैयार करती थीं । इस कार्य के लिए क्रांतिकारियों ने पिस्तौल , बंदूक और गोला बारूद का रास्ता चुना । 

 

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