बंग – भंग और स्वदेशी आन्दोलन के प्रभावों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- बंग – भंग और स्वदेशी आन्दोलन के प्रभाव निम्नलिखित थे- 

( 1 ) बंग – भंग के कारण एकता की भावना का विकास हुआ । 

( 2 ) स्वदेशी के प्रति नागरिकों का सम्मान बढ़ा , जिससे मृतप्रायः हो चुके हाथकरघा , रेशम बुनाई आदि अन्य पारम्परिक दस्तकारी उद्योग में नवजीवन का संचार हुआ । 

( 3 ) बंग – भंग के कारण स्वावलम्बन की भावना का विकास हुआ । यह आन्दोलन स्वावलम्बन व आत्मनिर्भरता के साथ जुड़ा हुआ था । लोगों में यह भावना पैदा हुई कि अपनी प्रगति के लिए वे स्वयं आगे आएँ । आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी उद्योग अस्तित्व में आए । 

( 4 ) शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन आया । गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन की तरह ही बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना हुई , जिसके प्राचार्य अरविंद घोष बने । इसी के साथ बहुत कम समय में ही अनेक राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना भी हुई । देशी भाषा ( क्षेत्रीय भाषा ) में शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार हुआ । 

( 5 ) बंग – भंग के कारण सांस्कृतिक चेतना का विकास हुआ । इस समय रवीन्द्रनाथ टैगोर , रजनीकांत सेन , द्विजेन्द्र लाल राय , मुकुन्द दास , सैय्यद अबू मोहम्मद आदि के लिखे गीत क्रांतिकारियों और स्वतन्त्रता प्रेमियों में प्रेरणा स्रोत बने । बंग – भंग के बाद अंग्रेजों ने साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाने का काम किया , जिसमें बहुत हद तक वे सफल भी हुए । अंग्रेजों ने स्वदेशी आन्दोलन को कमजोर करने के लिए समय – समय पर मुस्लिम सम्प्रदाय को भड़काया । अंग्रेजों के इशारे पर ‘ इण्डियन मुस्लिम लीग ‘ का गठन हुआ । अंग्रेजों के इशारे पर ही ढाका के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आन्दोलन का विरोध किया । 

 

Leave a Comment