1857 के संग्राम में मध्यप्रदेश क्षेत्र के सम्बन्धित प्रमुख सेनानियों के योगदान का वर्णन कीजिए ।

उत्तर -1857 के संग्राम में मध्यप्रदेश क्षेत्र से सम्बन्धित प्रमुख सेनानी व उनका योगदान निम्नलिखित हैं 

 

1. वीरांगना रानी अवंतीबाई –

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मण्डला जिले के रामगढ़ की रानी अवंती बाई का योगदान भी महत्वपूर्ण था । रानी अवंतीबाई ने हड़प नीति ‘ के विरोध में अंग्रेजों से सीधे टक्कर ले ली । इस वीरांगना ने बड़ी बहादुरी के साथ अंग्रेजों का मुकाबला किया । अंग्रेजी सेना ने रानी अवंतीबाई को घेर लिया तो रानी अवंतीबाई ने स्वयं ही अपनी छाती में तलवार घोंप कर अपना बलिदान कर दिया । 

 

2. राजा बख्तावर सिंह – 

अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी प्रज्वलित होने में अमझेरा ( धार से लगभग 30 कि.मी. ) के राजा बख्तावर सिंह मालवा के पहले शासक थे , जिसने कम्पनी के शासन का अंत करने का बीड़ा उठाया था । अंग्रेजों की सेना को राजा ने कड़ी टक्कर दी , किन्तु अपने ही सहयोगियों द्वारा विश्वासघात के कारण बख्तावर सिंह गिरफ्तार किए गए । अंग्रेजों ने उन्हें इन्दौर में फाँसी पर चढ़ा दिया । 

 

3. सआदत खाँ और भागीरथ सिलावट –

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में इन्दौर के सआदत खाँ और भागीरथ सिलावट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इन्होंने अंग्रेज सैनिक अधिकारियों का डटकर मुकाबला किया । अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिये जाने पर इन्हें फांसी दे दी गई । इनका बलिदान उल्लेखनीय है । 

 

4. राजा शंकर साह और रघुनाथ- 

1857 की क्रांति में जबलपुर की विशिष्ट भूमिका रही । रानी दुर्गावती के वंशज एवं गोंड राजघराने के वृद्ध राजा शंकरशाह व उनके युवा पुत्र रघुनाथ शाह का बलिदान अविस्मरणीय था । इन्हें बहादुर सैनिकों तथा ठाकुरों ने मिलकर अंग्रेजी सेना के विरुद्ध बगावत करने की योजना का नेता बनाया । दुर्भाग्यवश क्रियान्वयन के पूर्व ही योजना का भंडाफोड़ हो गया , फलस्वरूप अंग्रेजों ने उन दोनों को गिरफ्तार कर रेसीडेन्सी ( वर्तमान कमिश्नर कार्यालय ) ले गए । मुकदमा चलाने का नाटक करके भारी भीड़ के सामने 18 सितम्बर 1857 को पिता – पुत्र दोनों को तोप के मुंह पर बाँधकर उड़ा दिया गया । 

 

5. दिमान देसपत बुन्देला – 

ये महाराजा छत्रसाल के वंशज थे । दिमान देसपत ने 1857-58 में अंग्रेजी फौज को कड़ी चुनौतियाँ दी , उन्होंने तात्या टोपे की मदद के लिए एक हजार बंदूकची भी भेजे थे । देसपत ने अपने बल से शाहगढ़ रियासत के फतेहपुर के इलाके पर भी कब्जा कर लिया था । देसपत की शक्ति इतनी बढ़ी हुई थी कि ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए 5,000 रु . का इनाम घोषित कर रखा था । लम्बे संघर्ष के बाद सन् 1862 में नौगाँव के कुल दूर पर वीर देसपत बुंदेला मारे गए ।

 

6. महादेव शास्त्री – 

ग्वालियर के महादेव शास्त्री एक प्रखर राष्ट्रभक्त थे , जिन्होंने शस्त्र तो नहीं उठाए , लेकिन नाना साहब पेशवा को दिए गए सहयोग के कारण उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया । महादेव शास्त्री ने ग्वालियर में तात्या टोपे के पक्ष में वातावरण तैयार किया । नाना साहब पेशवा का पत्रवाहक बनकर क्रांति की जानकारी अन्य सेनानियों तक पहुँचाई । अंग्रेज सरकार ने महादेव शास्त्री की गतिविधियों को देखते हुए उन्हें गिरफ्तार कर फांसी दे दी । अमीरचन्द वाढिया को भी फांसी दे दी गई । 

 

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