भारत – बांग्लादेश सम्बन्धों का वर्णन कीजिए ?

उतर – 

1. स्वतंत्र बांग्लादेश की घोषणा- 

26 मार्च , 1971 को शेख मुजीब के नेतृत्व में स्वतंत्र बांग्लादेश की घोषणा गुप्त रेडियो से की गई । इसके साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान का दमनचक्र शुरु हुआ । अंततः 17 अप्रैल , 1971 को बांग्लादेश में स्वतंत्र प्रभुसत्ता सम्पन्न गणतंत्र की घोषणा की गई और विश्व की सरकारों से मान्यता प्रदान करने का आग्रह किया । मुक्ति संघर्ष के दौरान लगभग एक करोड़ बांग्लादेशी शरणार्थी भारत में आ गये थे । इसका सीधा प्रभाव भारत की सुरक्षा व एकता – अखण्डता पर भी पड़ रहा था । बांग्लादेश की समस्या के समाधान के लिए भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने कई पश्चिमी राष्ट्रों की यात्रा की किन्तु उन्हें पूर्णतः सफलता नहीं मिली । अंततः 3 दिसम्बर 1971 को भारत पाकिस्तान के मध्य युद्ध शुरू हो गया । 

 

2. बांग्लादेश को मान्यता- 

बांग्लादेश के तत्कालीन विदेश मंत्री के अनुरोध पर भारत ने 6 दिसम्बर , 1971 को ही बांग्लादेश ने हुसैन अली को भारत में अपना प्रथम राजदूत नियुक्त कर दिया । 

 

3. भारत – बांग्लादेश की प्रथम सन्धि- 

10 दिसम्बर , 1971 को भारत के साथ बांग्लादेश की प्रथम सन्धि हुई । इस सन्धि में भारत सैनिक और आर्थिक आधार पर स्वतंत्र बांग्लादेश के पुनर्निर्माण के लिए तैयार हुआ । सन् 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के पराजित होते ही बांग्लादेश की सरकार ढाका में स्थापित हो गई । अंतर्राष्ट्रीय जनमत के समक्ष घुटने टेकते हुए पाकिस्तान को 8 जनवरी , 1971 को आवामी लीग नेता शेख मुजीबुर्रहमान को रिहा करने पर बाध्य होना पड़ा । रिहाई के बाद शेख ने भारत के प्रति अपना आभार व्यक्त किया । 

 

4.भारत – बांग्लादेश की द्वितीय सन्धि- 

बांग्लादेश को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से भारत बांग्लादेश की द्वितीय सन्धि हुई भारत और भूटान के बाद एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश को पूर्वी जर्मनी , नेपाल , बर्मा आदि देशों ने भी मान्यता दे दी । जनवरी 1972 में काहिरा में अफेशियाई देशों का एकता सम्मेलन हुआ । जिसमें बांग्लादेश को स्थायी सदस्य बनवाने में भारत ने अपना बड़प्पन दिखाया । भारत ने बांग्लादेश के साथ व्यापार और सांस्कृतिक समझौते भी किये 1 9 अगस्त 1972 को भारत ने बांग्लादेश को संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य राष्ट्रों के रूप में मान्यता दिये जाने को समर्थन किया परन्तु चीन द्वारा वीटों पावर से इस कार्य में भारत को सफलता नहीं मिली ।

 

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