वनों से होने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ कौन – कौन से हैं ? वर्णन कीजिए ।

वनों से हमें निम्नलिखित प्रत्यक्ष लाभ हैं 

1. लकड़ी की प्राप्ति – 

वनों से प्राप्त लकड़ी एक महत्वपूर्ण ईंधन है । वृक्षों से सागौन , साल , शीशम , चीड़ , देवदार , आवनूस , चंदन आदि लकड़ी मिलती है । लकड़ी से फर्नीचर बनाया जाता है । 

2. सहायक उपजों की प्राप्ति- 

वनों से सहायक उपजों के रुप में लाख , चमड़ा , गोंद , शहद , कत्था , मोम , छालें , बाँस व बैंत , जड़ी – बूटियाँ व जानवरों के सींग आदि मिलते हैं । ये लाभकारी उद्योगों के आधारभूत तत्व हैं । 

3. आधारभूत उद्योगों के लिए सामग्री- 

वनों से प्राप्त लकड़ी , घास , सनोवर तथा बाँस से कागज उद्योग , चीड़ , स्यूस तथा सफेद सनोवर से दियासलाई उद्योग , लाख से लाख उद्योग , मोम से मोम उद्योग , महुआ की छालें व बबूल से गोंद , चमड़ा उद्योग , चन्दन , तारपीन और केवड़ासे तेल उद्योग , जड़ी – बूटियों व से औषधि उद्योग विकसित हुए हैं । 

4. जानवरों के लिए चरागाह- 

वन क्षेत्र उत्तम चरागाह स्थल हैं । वनों से जानवरों के लिए । पत्तियाँ मिलती हैं । 

5. रोजगार प्राप्ति- 

वनों पर 7.8 करोड़ व्यक्तियों की आजीविका आश्रित है । वनों से जो कहा पदार्थ मिलते हैं , उनसे बहुत से उद्योग चल रहे हैं और करोड़ों व्यक्तियों को रोजगार मिला हुआ है । 

6. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति- 

वनों से प्राप्त लाख , तारपीन का तेल , चन्दन का तेल , लकड़ी से बनी कलात्मक वस्तुओं को निर्यात करने से विदेशी मुद्रा मिलती है । 

7. लघु उद्योगों में सहायक- 

वनों से प्राप्त वस्तुओं , जैसे – तेंदूपत्ता , बेंत , शहद , । आदि से लघु उद्योगों का विकास हुआ है ।

8. सरकार को राजस्व- 

सरकार को बनों से राजस्व व रायल्टी के रूप में करोड़ों रुपये की प्राप्ति होती है । वर्तमान में यह राजस्व 670 करोड़ रुपये वार्षिक है । 

 

वनों से हमें निम्नलिखित अप्रत्यक्ष लाभ हैं 

1. मिट्टी के कटाव में कमी- 

वनों के कारण मिट्टी की ऊपरी सतह नहीं बह पाती है । इससे मिट्टी के पोषक तत्वों में कमी नहीं होती एवं मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है । 

2. जलवायु को सम बनाये रखना- 

बन ठंडी वायु के प्रवाह को रोकते हैं , गरम व तेज हवाओं के प्रवाह को कम करते हैं । इससे वनक्षेत्र की जलवायु समशीतोष्ण बनी रहती है । 

3. बाढ़ नियन्त्रण में सहायक – 

वन पानी के वेग को कम कर देते हैं , बाढ़ के पानी को सोख लेते हैं । बाढ़ का पानी वन क्षेत्रों में फैलकर धीरे – धीरे नदियों में जाता है । इससे बाढ़ नियन्त्रण होता है । 

4. रेगिस्तान के प्रसार पर रोक – 

सरदार पटेल ने कहा था कि “ यदि रेगिस्तान के बढ़ते हुए प्रसार को रोकना है और मानव सभ्यता की रक्षा करनी है , तो वन सम्पदा के क्षय को अवश्य रोकना होगा । ” वृक्षारोपण से रेगिस्तान का प्रसार रुकता है । 

5. वर्षा में सहायक – 

बनों को वर्षा का संचालक कहा जाता है । वन बादलों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं , जिससे वर्षा होती है । 

6. जलस्तर में वृद्धि – 

वन देश के कुँओं , तालाबों , नदियों , झरनों आदि में पानी का स्तर बढ़ा देते हैं , जिससे इसमें पानी बना रहता है । 

7. भूमि की उर्वराशक्ति में वृद्धि – 

पेड़ – पौधों की पत्तियाँ वन क्षेत्रों में गिरती हैं और सड़ – गल कर भूमि की उर्वराशक्ति में वृद्धि करती हैं 

8. ऑक्सीजन की मात्रा पर प्रभाव – 

वन ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होते हैं । यदि वृक्षों के कटाव की वर्तमान स्थिति बनी रही तो वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जायेगी । ऑक्सीजन के अभाव में मानव समुदाय संकट में पड़ जाएगा । इसलिए वृक्षारोपण को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए । 

9.प्राकृतिक सौन्दर्य- 

वनों से देश के प्राकृतिक सौन्दर्य में वृद्धि होती है , वन देशी व विदेशी सैलानियों को आकर्षित करते हैं । 

 

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