मृदा परिच्छेदिका से क्या तात्पर्य है ? स्पष्ट कीजिए ।

मृदा परिच्छेदिका- पूर्ण विकसित मृदाओं के लम्बवत् परिच्छेद ( कटान ) में गठन , रंग और परतें एक के ऊपर एक बिछी होती हैं । मृदा के परतों के विन्यास को मृदा परिच्छेदिका कहते हैं ( क ) ऊपरी परत को ऊपरी मृदा , ( ख ) दूसरी परत को उप मृदा , ( ग ) तीसरी परत को अपक्षयित मूल चट्टानी पदार्थ तथा ( घ ) चौथी परत में मूल चट्टानें होती है । ऊपरी परत की ऊपरी मृदा ही वास्तविक मृदा की परत है । इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसमें ह्यूमस तथा जैव पदार्थ का पाया जाना है । सबसे ऊपर ह्यूमस तथा उसके नीचे जैव तत्वों की प्रधानता होती है । दूसरी परत में उपमृदा होती है , जिसमें चट्टानों के टुकड़े , बालू , गाद और चिकनी मिट्टी होती है । तीसरी परत में अपक्षयित मूल चट्टानी पदार्थ तथा चौथी परत में मूल चट्टानी पदार्थ होते हैं । 

 

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