MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 11 स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 11 स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 11 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) भारत और चीन युद्ध हुआ था 

( i ) 11 जुलाई , 1962 

( ii ) 20 अक्टूबर , 1962 

( iii ) 20 अगस्त , 1964 

( iv ) 11 जुलाई , 1965

 

( 2 ) 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध का कारण था 

( i ) कच्छ का रण क्षेत्र 

( ii ) आजाद कश्मीर 

( iii ) राजस्थान का जेसलमेर 

( iv ) भारत पर जासूसी 

 

( 3 ) लाखों शरणार्थी भारत में आए 

( i ) श्रीलंका 

( ii ) बंगलादेश 

( iii ) पाकिस्तान . 

( iv ) चीन । 

 

उत्तर- ( 1 ) ii ( 2 ) i ( 3 ) ii 

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

 

( क ) भारतीय संविधान में अनुच्छेद … के अन्तर्गत जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया है ।

( ख ) चीन और जापान युद्ध सन् … मैं शुरु हुआ था । 

( ग ) 1971 के भारत – पाक युद्ध के बाद … देश का निर्माण हुआ । 

( घ ) राष्ट्रीय आपात्काल अब तक … बार घोषित हो चुका है । 

 

उत्तर- 

( क ) 370 

( ख ) 1937 

( ग ) बांग्लादेश 

( घ ) तीन । 

 

सही जोड़ियां मिलाइए 

सत्य / असत्य बताइए 

 

  1. ताशकन्द समझौता भारत और चीन के मध्य हुआ था । 

 

उत्तर – 

असत्य । 

 

स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारत ने जिन प्रक्षेपास्त्रों को बनाया है , उनके नाम लिखिए । 

उत्तर- भारत ने जिन प्रक्षेपास्त्रों को बनाया है , उनके नाम हैं – पृथ्वी , त्रिशूल , नाग एवं आकाश । 

 

प्रश्न 2. संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् ने कश्मीर समस्या समाधान के लिए किन पाँच देशों का दल बनाया था ? लिखिए । 

उत्तर- संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने कश्मीर समस्या समाधान के लिए चेकोस्लावाकिया , अर्जेण्टाइना , अमेरिका , कोलम्बिया एवं बेल्जियम देशों का एक दल बनाया था । 

 

स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कबायलियों का मार्ग बन्द करने को क्यों कहा था ? लिखिए । 

उत्तर- भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने यह आश्वासन दिया था कि युद्ध समाप्ति के पश्चात् कश्मीर में जब शांति स्थापित हो जाएगी , तब कश्मीर की जनता जनमत संग्रह के आधार पर यह तय करेगी कि वे किसके साथ मिलना चाहते हैं , परन्तु प्रारम्भ में पाकिस्तान सरकार ने अधिकारिक रूप से कश्मीर के बारे में कोई मत व्यक्त नहीं किया था , अतः भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार से कबायलियों का मार्ग बन्द करने को कहा था । 

 

प्रश्न 2. भारत और चीन युद्ध के क्या परिणाम हुए ? लिखिए । 

उत्तर- भारत और चीन युद्ध के निम्नलिखित परिणाम हुए- 

( 1 ) भारत – चीन सम्बन्ध तनावपूर्ण हो गये । 

( 2 ) भारत के भू – भाग का एक बड़ा भाग चीन के कब्जे में चला गया । 

( 3 ) भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि एवं गुटनिरपेक्ष नीति आहत हुई । 

( 4 ) भारतीय विदेश नीति में आदर्शवाद के स्थान पर व्यावहारिकता और यथार्थवाद को स्थान मिला । 

( 5 ) भारत – अमेरिका के सम्बन्धों में सुधार हुआ । 

 

प्रश्न 3. ताशकन्द समझौते की शर्ते लिखिए । 

उत्तर- ताशकन्द समझौते की शर्ते निम्नलिखित थीं- 

( 1 ) दोनों पक्षों ने अच्छे पड़ोसियों जैसे सम्बन्ध निर्माण करने पर सहमति व्यक्त की । 

( 2 ) दोनों पक्षों ने यह सहमति व्यक्त की कि वे 5 अगस्त , 1965 के पूर्व जिस स्थिति में थे , वहाँ अपनी सेनाओं को वापस बुला लेंगे । दोनों पक्ष युद्ध विराम रेखा पर युद्ध विराम की शों का पालन करेंगे । 

( 3 ) दोनों पक्षों ने एक – दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने , एक – दूसरे के विरूद्ध प्रचार को निरूत्साहित करने तथा पुनः राजनयिक सम्बन्धों की स्थापना करने का निर्णय लिया । इसके अतिरिक्त आर्थिक , व्यापारिक , सांस्कृतिक सम्बन्धों को मधुर बनाने पर भी सहमति व्यक्त की गयी थी । 

 

प्रश्न 4. ताशकन्द समझौता क्या है ?

उत्तर- ताशकन्द समझौता- भारत – पाक युद्ध विराम के बावजूद युद्ध क्षेत्रों में झड़पें बन्द नहीं हुई थी । इस स्थिति को समाप्त करने के लिए सोवियत संघ ने विशेष रुचि ली । सोवियत संघ ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए ताशकन्द आमन्त्रित किया । 4 जनवरी , 1966 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खाँ तथा भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के मध्य ताशकन्द में वार्ता आरम्भ हुई । अंततः 19 जनवरी , 1966 को ऐतिहासिक समझौते पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए , जिसे ताशकंद समझौता कहते हैं । 

 

स्वातंत्र्योत्तर भारत की प्रमुख घटनाएँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारत चीन युद्ध में एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा चीन ने क्यों की ?

उत्तर- चीन ने 26 अक्टूबर , 1962 को तीन सूत्रीय सुझाव दिया , जिसके में भारत ने सीमाओं पर यथास्थिति बनाये रखने का सुझाव दिया । अन्त में , चीन ने 21 नवम्बर , 1962 को एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा की । भारत – चीन युद्ध की पृष्ठभूमि का अध्ययन करने पर कुछ बातें निकल कर सामने आयीं , जैसे – चीन द्वारा भारत पर अचानक आक्रमण क्यों किया गया ? युद्ध में भारत को पराजय क्यों मिली ? चीन द्वारा एक तरफा युद्धविराम की घोषणा क्यों की गई ? कई विद्वानों ने उक्त बातों पर विचार मंथन के बाद चीन के एकतरफा युद्ध विराम के निष्कर्ष निकाले कि- 

( 1 ) चीन अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता था । 

( 2 ) चीन की नीति विस्तारवादी थी । 

( 3 ) चीन विश्व में अपनी आर्थिक व राजनैतिक सर्वोच्चता स्थापित करना चाहता था । 

( 4 ) चीन भारतीय गुटनिरपेक्षता की नीति को गलत बताना चाहता था । 

( 5 ) युद्धविराम की घोषणा करके चीन विश्व समुदाय का समर्थन प्राप्त करना चाहता था । 

 

प्रश्न 2. कश्मीर समस्या क्या है ? विस्तार से समझाइए ।

उत्तर – कश्मीर भारत की उत्तर – पश्चिम सीमा पर स्थित होने के कारण भारत और पाकिस्तान दोनों को जोड़ता है । कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी रियासत जम्मू – कश्मीर को स्वतंत्र रखने का निर्णय लिया । राजा हरीसिंह सोचते थे कि कश्मीर यदि पाकिस्तान में मिलता है , तो जम्मू की हिन्दू जनता और लद्दाख की बौद्ध जनता के साथ अन्याय होगा और यदि वह भारत में मिलता है , तो मुस्लिम जनता के साथ अन्याय होगा । अतः उसने यथा स्थिति बनाए रखी और विलय के विषय में तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया । 22 अक्टूबर , 1947 को उत्तर – पश्चिम सीमा प्रान्त के कबायलियों और अनेक पाकिस्तानियों ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया । पाकिस्तान कश्मीर को अपने में मिलाना चाहता था , अतः उसने अपनी सीमाओं पर सेना को इकट्ठा कर चार दिनों के भीतर ही हमला कर आक्रमणकारी श्रीनगर से 25 मील दूर बारामूला तक आ पहुंचे । कश्मीर के शासक ने आक्रमणकारियों से अपने राज्य को बचाने के लिए भारत सरकार से सैनिक सहायता मांगी , साथ ही कश्मीर को भारत में सम्मिलित करने की प्रार्थना की । 

 

भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और भारतीय सेनाओं को कश्मीर भेज दिया । संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए पांच राष्ट्रों चेकोस्लावाकिया , अर्जेण्टाइना , अमेरिका , कोलम्बिया और वेल्जियम के सदस्यों का एक दल बनाया । इस दल को मौके पर जाकर स्थिति का अवलोकन करना था और समझौते का मार्ग ढूँढना था । संयुक्त राष्ट्र संघ के दल ने मौके पर जाकर स्थिति का अध्ययन किया । दोनों पक्ष लम्बी वार्ता के बाद 1 जनवरी , 1949 को युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए । कश्मीर के विलय का निर्णय जनमत संग्रह के आधार पर होना था । जवाहरलाल नेहरू जनमत संग्रह की अपनी वचनबद्धता का पालन करना चाहते थे , परन्तु पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की शर्तों का उल्लंघन कर अधिकृत क्षेत्र ( आजाद कश्मीर ) से अपनी सेनाएं नहीं हटाई थीं । कबायली भी वहीं बने हुए थे । पं . नेहरू ने जब तक पाकिस्तान अपनी सेना नहीं हटा लेता , तब तक जनमत संग्रह से मना किया । कश्मीर के प्रश्न पर सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया । 

 

इस समर्थन से भारत की स्थिति मजबूत हो गयी । 6 फरवरी , 1954 को कश्मीर की विधान सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर जम्मू , कश्मीर राज्य का विलय भारत में करने की सहमति प्रदान की । भारत सरकार ने 14 मई , 1954 को संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 370 , के अंतर्गत जम्मू – कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया । 26 जनवरी , 1957 को जम्मू – कश्मीर को संविधान लागू हो गया । इसके साथ ही जम्मू – कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग बन गया । 

 

प्रश्न 3. सन् 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के परिणाम लिखिए ।

उत्तर- 

( 1 ) पाकिस्तान कश्मीर समस्या का समाधान शस्त्र द्वारा करना चाहता था । उसने युद्ध का मार्ग अपनाया , परन्तु उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई । 

( 2 ) पाकिस्तान को विश्वास था कि कश्मीर की मुस्लिम जनता उसका साथ देगी , परन्तु ऐसा नहीं हुआ । भारत ने यह सिद्ध किया कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता का आधार अत्यन्त ठोस है । 

( 3 ) युद्ध के दौरान भारतीय नागरिकों तथा सैनिकों का मनोबल ऊँचा रहा । भारतीय सेना के अधिकांश हथियार स्वदेशी थे । 

( 4 ) पाकिस्तान को विश्वास था कि संकट के अवसर पर चीन उसका साथ देगा , परन्तु उसका यह भ्रम टूट गया । 

( 5 ) भारत- पाकिस्तान के युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका महत्वपूर्ण थी । संयुक्त राष्ट्र संघ को सफलता इसलिए मिली , क्योंकि सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपूर्व सहयोग दिया था । 

( 6 ) पाकिस्तान के लिए यह युद्ध घातक सिद्ध हुआ । युद्ध में पराजय ने उसकी सैनिक तानाशाहो के खोखलेपन को सिद्ध कर दिया । 

 

प्रश्न 4. महाराजा हरीसिंह ने भारत सरकार से सहायता कब और क्यों माँगी थी ? 

उत्तर- कश्मीर भारत की उत्तर – पश्चिम सीमा पर स्थित होने के कारण भारत और पाकिस्तान दोनों को जोड़ता है । कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी रियासत जम्मू – कश्मीर को स्वतंत्र रखने का निर्णय लिया , किन्तु जब 22 अक्टूबर सन् 1947 को उत्तर – पश्चिम सीमा प्रान्त के कबायलियों और अनेक पाकिस्तानियों ने कश्मीर पर आक्रमण किया तो कश्मीर के शासक ने आक्रमण – कारियों से अपने राज्य को बचाने के लिए भारत सरकार से सैनिक सहायता माँगी , साथ ही कश्मीर को भारत में सम्मिलित करने की प्रार्थना की । 

 

भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और भारतीय सेनाओं को कश्मीर भेज दिया । संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए एक दल बनाया , इस दल ने मौके पर जाकर स्थिति का अध्ययन किया । दोनों पक्ष लम्बी वार्ता के बाद 1 जनवरी , 1949 को युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए । कश्मीर के विलय का निर्णय जनमत संग्रह के आधार पर होना था । जवाहरलाल नेहरू जनमत संग्रह की अपनी वचनबद्धता का पालन करना चाहते थे , परन्तु पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की शर्तों का उल्लंघन कर अधिकृत क्षेत्र ( आजाद कश्मीर ) से अपनी सेनाएँ नहीं हटाई थीं । कबायली भी वहीं बने हुए थे । पं . नेहरू ने जब तक पाकिस्तान अपनी सेना नहीं हटा लेता , तब तक जनमत संग्रह से मना किया । 

 

कश्मीर के प्रश्न पर सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया । इस समर्थन से भारत की स्थिति मजबूत हो गयी । 6 फरवरी , 1954 को कश्मीर की विधान सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर जम्मू , कश्मीर राज्य का विलय भारत में करने की सहमति प्रदान की । भारत सरकार ने 14 मई , 1954 को संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 370 , के अंतर्गत जम्मू – कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया । 26 जनवरी , 1957 को जम्मू – कश्मीर का संविधान लागू हो गया । इसके साथ ही जम्मू – कश्मीर भारतीय संघ का एक अभिन्न अंग बन गया । इसके बाद पाकिस्तान निरन्तर कश्मीर का प्रश्न उठाकर वहाँ राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करता रहा है । 

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. ताशकन्द समझौता क्या है ? 

उत्तर – भारत – पाक युद्ध विराम के बावजूद युद्ध क्षेत्रों में झड़पें बन्द नहीं हुई थी । इस स्थिति को समाप्त करने के लिए सोवियत संघ ने विशेष रूचि ली । सोवियत संघ ने दोनों पक्षों को वार्ता के लिए ताशकन्द आमन्त्रित किया । 4 जनवरी , 1966 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खाँ तथा भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के मध्य ताशकन्द में वार्ता आरम्भ हुई । अंततः 19 जनवरी , 1966 को ऐतिहासिक समझौते पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए , जिसे ताशकंद समझौता कहते हैं । 

 

प्रश्न 2. 1971 के भारत – पाक युद्ध में पाकिस्तान की पराजय के क्या कारण थे ?

उत्तर- 

( 1 ) पाकिस्तान सैनिक दृष्टि से भारत से कमजोर था । 

( 2 ) पाकिस्तान का नैतिक पक्ष दुर्बल था । पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान के साथ जो भेदभावपूर्ण नीति अपनायी थी , उसके परिणामस्वरूप वहाँ जन – आन्दोलन आरम्भ हुआ । बंगला देश के निर्माण में बंगाली जनता प्राण – पण से अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रही थी । 

( 3 ) पाकिस्तान की सैनिक तानाशाही प्रजातन्त्रीकरण की प्रक्रिया की उपेक्षा कर रही थी । यह उपेक्षा उसे भारी पड़ी । 

( 4 ) पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के मध्य दूरी के कारण पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान तक सहजता से नहीं पहुंच सकता था । समुद्री मार्ग की भारतीय नौसेना ने घेराबन्दी कर ली थी , अतः उसकी सेना को आपूर्ति बन्द हो गयी । 

( 5 ) पाकिस्तान के अत्याचारों से पीड़ित होकर लाखों की संख्या में शरणार्थी भारत आये । इस कारण भारत को पाकिस्तान के मामले में हस्तक्षेप का मौका मिला । 

 

प्रश्न 3. 1971 के भारत – पाक युद्ध के महत्वपूर्ण परिणाम लिखिए । 

उत्तर- 1971 के भारत – पाक युद्ध के महत्वपूर्ण परिणाम इस प्रकार रहे- 

( 1 ) बंगला देश का निर्माण हुआ । 

( 2 ) पाकिस्तान का क्षेत्रफल , जनसंख्या व शक्ति कम हुई । 

( 3 ) 1965 के पश्चात् 1971 में पुनः पाकिस्तान की हार ने उसका मनोबल तोड़ दिया । 

( 4 ) भारत को यह समझ में आ गया कि अमेरिका उसका हितैषी नहीं है , अतः भारत ने सोवियत संघ के साथ मित्रता बढ़ाई । 

( 5 ) इस युद्ध में पाकिस्तान से सहानुभूति रखने वाले राष्ट्र अमेरिका और चीन के हौंसलों और महत्वाकांक्षा की पराजय हुई । 

( 6 ) भारत – पाकिस्तान युद्ध के समय देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने सारे मतभेद भुला दिये । बंगला देश की मुक्ति का प्रश्न एक राष्ट्रीय प्रश्न बन गया था । 

 

प्रश्न 4. आपातकाल के प्रकारों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- सामान्यतः तीन प्रकार के आपातकाल होते हैं , जिनकी घोषणा राष्ट्रपति केन्द्रीय मंत्रीमण्डल के लिखित परामर्श से कर सकता है । 

 

  1. राष्ट्रीय आपात्काल- 

भारत के राष्ट्रपति यदि संतुष्ट हो जायें कि स्थिति बहुत विकट है तथा भारत अथवा उसके किसी भाग की सुरक्षा खतरे में है , युद्ध अथवा बाहरी आक्रमण या क्षेत्र के अंतर्गत सशस्त्र विद्रोह के कारण समस्या विकट हो सकती है , तब राष्ट्रपति ऐसी स्थिति उत्पन्न होने से पहले भी आपात्काल की घोषणा कर सकता है । वर्तमान में राष्ट्रपति ऐसी संकटकालीन घोषणा केवल मंत्रीमण्डल की लिखित अनुशंसा पर ही कर सकता है । 

 

  1. राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता से उत्पन्न आपात्काल- 

राष्ट्रपति किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या किसी अन्य प्रकार से संतुष्ट हो जाए , कि वहाँ राज्य का शासन विधिपूर्वक चलाया नहीं जा सकता है , ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर संवैधानिक तंत्र की विफलता को रोकने का प्रयास करता है । आम बोलचाल में इसे राष्ट्रपति शासन भी कहा जाता है । 

 

  1. वित्तीय संकट- 

यदि राष्ट्रपति संतुष्ट हो जाए कि भारत अथवा इसके किसी भाग की वित्तीय स्थिति या साख को खतरा है , तो वह वित्तीय संकट की घोषण कर सकता है । 

 

प्रश्न 5. भारत में आपात्काल की स्थिति पर प्रकाश डालिए । 

उत्तर- भारत में आपातकाल की स्थिति- 

( 1 ) राष्ट्रीय आपात्काल भारत में अब तक तीन बार घोषित हो चुका है । 

( अ ) चीन द्वारा आक्रमण करने पर 26 अक्टूबर , 1962 से 10 जनवरी , 1968 तक । 

( ब ) पाकिस्तान द्वारा आक्रमण के कारण 3 दिसम्बर , 1971 से 21 मार्च 1977 तक

( स ) आंतरिक उपद्रव की आशंका के आधार पर 25 जून , 1975 को भारत में आपात्काल घोषित किया गया । 

( 2 ) राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता से उत्पन्न आपात्काल की घोषणा का प्रयोग अनेक बार हुआ है । 

( 3 ) वित्तीय संकट के कारण भारत में अभी तक कभी भी आपात्काल नहीं लगाया गया है । 

 

प्रश्न 6. आणविक शक्ति की पाँच उपयोगिताएँ एवं महत्व लिखिए । 

उत्तर- परमाणु ऊर्जा रेडियोधर्मी तत्वों के विखण्डन से प्राप्त की जाती है । इस ऊर्जा से विद्युत तैयार की जाती है । यूरेनियम , थोरियम , प्लूटोनियम आदि प्रमुख रेडियोधर्मी तत्व हैं । इन तत्वों में भारी मात्रा ऊर्जा छिपी है । एक किलो यूरेनियम से जितनी ऊर्जा प्राप्त होती है , उतनी 27 हजार टन कोयले से प्राप्त की जाती है । आणविक शक्ति की उपयोगिता विभिन्न प्रकार से है , जैसे- परमाणु ईंधन के उत्खनन करने , उसे अलग करने , यूरेनियम में परिवर्तित करने , इंधन बनाने , भारी पानी उत्पादन , रिएक्टर बनाने आदि । इसके अलावा कृषि , चिकित्सा , उद्योग आदि में , नहरों , बाँधों , खानों आदि के निर्माण के लिए भी परमाणु विस्फोटों का प्रयोग किया जाता है । विध्वंसक शस्त्रों के निर्माण में भी इसका उपयोग होता है । शांतिपूर्ण और विकास कार्यों में भी परमाणु ऊर्जा का उपयोग होता है । 

 

प्रश्न 7. जलियाँ वाला हत्याकाण्ड की घटना को लिखिए । 

उत्तर- अमृतसर में जलियाँ वाला बाग एक छोटा – सा पार्क है । वहाँ 13 अप्रैल , सन् 1919 को भारतीय नेताओं को कैद करने पर विरोध प्रकट करने के लिए जनता एकत्र हुई । शांतिपूर्ण चल रही इस सभा पर ब्रिटिश अफसर जनरल डायर ने जनता को सबक सिखाने के लिए अपने सैनिकों से बिना किसी पूर्व चेतावनी के अन्धा – धुन्ध गोलियाँ चलवाईं । परिणाम यह हुआ कि दस मिनट में लगभग एक हजार लोग मारे गये । इसी प्रकार लगभग दो हजार लोग घायल हो गये । यही जलियाँ वाला बाग का हत्याकाण्ड था यह स्थान आज राष्ट्रीय स्मारक के रूप में प्रसिद्ध है । जानबूझकर किए गए इस हत्याकाण्ड के विरोध में आगे असहयोग आन्दोलन चलाया गया ।

 

प्रश्न 8. आण्विक शक्ति की पाँच उपयोगिताएँ एवं एक महत्व लिखिए । 

उत्तर – महत्व- परमाणु ऊर्जा रेडियोधर्मी तत्वों के विखण्डन से प्राप्त की जाती है । इस ऊर्जा से विद्युत तैयार की जाती है । एक अनुमान के अनुसार एक किलो यूरेनियम से जितनी ऊर्जा प्राप्त होती है उतनी 27000 टन कोयले से प्राप्त की जाती हैं । पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों की कमी से निपटने के लिए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की बड़ी भूमिका है । बम्बई में विद्युत का उत्पादन परमाणु रिएक्टरों के माध्यम से किया जा रहा है । 

 

उपयोगिताएँ- 

( 1 ) स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् से ही भारत परमाणु ऊर्जा के शान्तिपूर्ण उपयोग की दिशा में प्रयासरत रहा है । 

( 2 ) बिजली उत्पादन में 1969 में तारापुर परमाणु शक्ति की स्थापना से भारत व्यावसायिक रिएक्टर केन्द्र बना । 

( 3 ) परमाणु ऊर्जा शक्ति के उपयोग ने ईंधन उत्खनन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है । 

( 4 ) भारी पानी उत्पादन में भी परमाणु ऊर्जा शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत की है । 

( 5 ) कचरे के प्रबन्ध में परमाणु ऊर्जा की आश्चर्यजनक उपयोगिता 

 

प्रश्न 9. भारत की परमाणु नीति के सिद्धान्तों को समझाइए । 

अथवा

भारत का आण्विक शक्ति के रूप में विकास किस प्रकार हुआ ? 

उत्तर – भारत की परमाणु नीति के सिद्धान्त- भारत की परमाणु नीति को उसकी विदेश नीति के मूल 

( 1 ) राष्ट्रीय सुरक्षा

( 2 ) आर्थिक विकास

( 3 ) विश्व व्यवस्था । 

सिद्धान्तों के संदर्भ में समझा जा सकता है । भारत की विदेश नीति के तीन मूलभूत सिद्धान्त है इसके अतिरिक्त भारत उपनिवेशवाद , साम्राज्यवाद , रंगभेद का विरोध करते हुए परस्पर सह अस्तित्व , सभी राष्ट्रों से मित्रता एवं अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव की नीति में विश्वास रखता है । भारत की परमाणु नीति का लक्ष्य अपनी सुरक्षा एवं विकास को सुनिश्चित करना है और यह भी ध्यान में रखना है कि एक ऐसे विश्व की स्थापना हो जो सहयोग , सद्भाव और शांति पर आधारित हो । भारत के प्रधानमंत्री पं . जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु बम न बनाने के संकल्प को अनेक अवसरों पर दोहराया । 

 

श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की रक्षा को अति महत्वपूर्ण विषय मानते हुए परमाणु नीति पर पुनर्विचार की बात कही । भारत की सीमाओं के निकट परमाणु अस्त्र क्षमता एवं प्रक्षेपास्त्रों की मौजूदगी के कारण आण्विक परीक्षण किये थे । भारत आरंभ से ही शांति दूत रहा है और उसने आण्विक शक्ति दूसरों पर अपनी प्रभुता स्थापित करने तथा दूसरे राष्ट्रों के मामलों में हस्तक्षेप प्राप्त करने के लिए नहीं की है ।

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