MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 भारतीय संविधान

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 भारतीय संविधान

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) संविधान है 

( i ) सरकार का गठन 

( ii ) देश का शासन 

( iii ) नियम व कानूनों का संकलित प्रलेख 

( iv ) मौलिक अधिकार | 

 

( 2 ) निम्न में से कौन – सी विशेषता भारतीय संविधान की नहीं है ? 

( i ) संसदीय शासन प्रणाली 

( ii ) संघात्मक शासन 

( iii ) स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायपालिका 

( iv ) अलिखित संविधान । 

 

( 3 ) संविधान में मौलिक कर्तव्य कितने बताए गए हैं ?

( i ) 5 

( ii ) 14 

( iii ) 18

( iv ) 10 

 

उत्तर- ( 1 ) ( iii ) , ( 2 ) ( iv ) , ( 3 ) ( iv ) 

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

 

( 1 ) संविधान सभा के अध्यक्ष … थे

( 2 ) डॉ . बी.आर. अम्बेडकर संविधान की … के अध्यक्ष थे 

( 3 ) भारत का नव निर्मित संविधान संविधान सभा द्वारा … को अंगीकृत किया गया । 

( 4 ) समानता का अधिकार संविधान में वर्णित … में से एक है । 

 

उत्तर- 

( 1 ) डॉ . राजेन्द्र प्रसाद 

( 2 ) प्रारूप समिति 

( 3 ) 26 नवम्बर , 1949 

( 4 ) मौलिक अधिकारों ।

 

सही जोड़ी बनाइए 

सत्य / असत्य बताइए 

 

  1. भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान हैं । 

 

उत्तर- सत्य । 

 

सत्य / असत्य को स्पष्ट कीजिए 

 

( i ) संविधान में 12 अनुसूचियाँ हैं । 

( ii ) भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद हैं । 

उत्तर- 

( i ) सत्य

( ii ) सत्य । 

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए 

 

( i ) समतावादी ढांचे पर आधारित व्यवस्था ।

( ii ) लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है . ? 

( iii ) सूचना का अधिकार भारत सरकार के द्वारा किस वर्ष बनाया गया है ? 

( iv ) भारतीय योजना आयोग का गठन कब किया गया था ? 

( v ) संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी ? 

( vi ) सर्वोच्च संविधान के न्यायधीश की आयु कितने वर्ष होती है ? 

( vii ) भारत का संविधान कब लागू हुआ है ? 

 

उत्तर- 

( i ) समाजवाद

( ii ) लोकसभा के सदस्य

( iii ) सूचना का अधिकार भारत सरकार द्वारा वर्ष 2005 वर्ष में बनाया गया

( iv ) 15 मार्च 1950 में 

( v ) 09 दिसम्बर 1946

( vi ) 65 वर्ष 

( vi ) 26 जनवरी 1950 को

 

भारतीय संविधान अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. संविधान क्या है ? 

उत्तर- किसी देश का शासन जिन मूलभूत नियमों एवं कानूनों के अनुसार चलाया जाता है , उनके संकलित प्रलेख को ‘ संविधान ‘ कहते हैं । 

 

प्रश्न 2. भारत में मौलिक अधिकारों का संरक्षक कौन है ? 

उत्तर- भारत में मौलिक अधिकारों का संरक्षक सर्वोच्च न्यायालय है । 

 

प्रश्न 3. संविधान में मौलिक कर्तव्य कब जोड़े गए ? 

उत्तर – सन् 1976 में संविधान के 42 वें संशोधन में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया ।

 

भारतीय संविधान लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. संविधान का क्या महत्व है ? लिखिए । 

उत्तर- प्रत्येक राष्ट्र के लिए संविधान का बहुत महत्व है । शासन व्यवस्था के सुचारू संचालन हेतु व्यवस्थापिका , कार्यपालिका व न्यायपालिका का गठन एवं उनके कार्यों और अधिकारों की सीमाओं के निर्धारण के लिए संविधान की आवश्यकता होती है । संविधान के अभाव में शासन का सुचारु रूप से संचालित होना कठिन है और अराजकता की स्थिति निर्मित होने की प्रबल सम्भावना रहती है । संविधान में नागरिकों के मूल अधिकारों एवं कर्तव्यों का भी विवरण होता है । अतः संविधान शासन व्यवस्था का आधार है । 

 

प्रश्न 2 . संविधान सभा का परिचय दीजिए । 

उत्तर- भारत का संविधान एक संविधान सभा द्वारा निर्मित किया गया है । संविधान सभा का गठन ब्रिटिश शासन तथा भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के नेतृत्वकर्ताओं के मध्य परस्पर सहमति से किया गया । उसका आधार 1946 की केबिनेट मिशन योजना रही । संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव तत्कालीन प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव के आधार पर किया गया । संविधान सभा में प्रान्तों से 292 , देशी रियासतों ( ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के कुछ भाग सीधे ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में नहीं थे । ऐसे भाग देशी रियासतें कहलाती थीं ये रियासतें राजाओं के अधीन थीं तथा इनकी संख्या लगभग 562 थी । काश्मीर , हैदराबाद , ग्वालियर , पटियाला , मैसूर , बड़ौदा , ट्रावनकोर बड़ी रियासतें थीं , से 93 तथा चीफ कमिश्नरियों से 4 प्रतिनिधियों का प्रावधान था । इस प्रकार इसमें कुल 389 सदस्य थे । संविधान सभा में जनसंख्या के अनुपात में सदस्य निर्धारित किए गए थे । सामान्यतः 10 लाख की जनसंख्या पर एक सदस्य का प्रावधान किया गया था । भारत के विभाजन के उपरांत संविधान सभा में 299 सदस्य शेष रह गये थे , क्योंकि मुस्लिम लीग के सदस्यों ने संविधान सभा की बैठकों में भाग नहीं लिया । 

 

प्रश्न 3. मध्यप्रदेश से संबंधित संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों के नाम लिखिए । 

उत्तर – मध्यप्रदेश से सम्बन्धित संविधान सभा के प्रमुख सदस्य ये थे- 

( 1 ) पंडित रविशंकर शुक्ल

( 2 ) सेठ गोविन्द दास 

( 3 ) डॉ . हरीसिंह गौर

( 4 ) हरिविष्णु कामथ आदि । 

 

प्रश्न 4. राज्य के नीति निर्देशक तत्वों से क्या आशय है ? 

उत्तर- भारतीय संविधान के चौथे भाग में शासन संचालन के लिए मूलभूत सिद्धान्तों का वर्णन किया गया है , जिन्हें राज्य के नीतिनिर्धारण करने वाले निर्देशक तत्व कहा गया है । ये तत्व आधुनिक प्रजातंत्र के लिए राजनीतिक , सामाजिक तथा आर्थिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं । नीति निर्देशक तत्वों को किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता , किन्तु ये तत्व देश के शासन में मूलभूत स्थान रखते हैं । इन तत्वों के माध्यम से भारत में एक लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना का प्रयास किया गया है । 

 

प्रश्न 5. संविधान में प्रस्तावना का महत्व है ? 

उत्तर- भारतीय संविधान में प्रस्तावना का बहुत महत्व है । संविधान की प्रस्तावना में संविधान निर्माताओं ने संविधान निर्माण के लक्ष्यों , मूल्यों एवं विचारों का समावेश किया हैं । इसे संविधान की आत्मा अथवा कुंजी भी कहा जाता है । प्रस्तावना संविधान निर्माताओं की मनोभावना एवं संकल्प का प्रतीक है । प्रस्तावना के प्रारम्भिक शब्दों में ही यह भाव निहित है कि संविधान का निर्माण जनता की इच्छा से ही हुआ है व अंतिम सत्ता जनता में निहित है । प्रस्तावना में संविधान सभा के इस संकल्प की घोषणा है कि भारत सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न गणराज्य होगा । 1976 में 42 वें संविधान संशोधन द्वारा भारत को समाजवादी एवं पंथ निरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है । 

 

प्रश्न 6. समाजवादी एवं पंथ निरपेक्षता का आशय समझाइए । 

उत्तर – समाजवादी – समाजवादी राज्य से अभिप्राय है कि भारतीय व्यवस्था ‘ समाज के समतावादी ढाँचे ‘ पर आधारित होगी । प्रत्येक भारतीय की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी । भारतीय परिस्थिति के अनुसार समाजवाद को अपनाया जाएगा । पंथ निरपेक्षता – पंथ निरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य सभी पंथों की समान रूप से रक्षा करेगा और स्वयं किसी भी पंथ को राज्य के धर्म के रूप में नहीं मानेगा । सरकार द्वारा नागरिकों के मध्य पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा । प्रत्येक व्यक्ति को अपने विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता होगी । 

 

भारतीय संविधान दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारतीय संविधान की विशेषताओं का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- 1. लिखित एवं विशाल संविधान- 

भारत का संविधान लिखित और निर्मित संविधान है . जिसका निर्माण विधिवत् गठित संविधान सभा द्वारा किया गया है । भारत का संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है । भारत के वर्तमान संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं , जो 22 भागों में विभाजित हैं , जबकि अमेरिका के संविधान में 7 , कनाड़ा के संविधान में 147 और आस्ट्रेलिया के संविधान में 128 अनुच्छेद ही हैं । 

 

  1. कठोरता एवं लचीलेपन का सम्मिश्रण- 

संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के आधार पर संविधान का वर्गीकरण कठोर अथवा लचीलेपन के रुप में किया जाता है । भारत के संविधान में संशोधन की तीन प्रक्रियाओं का उल्लेख है , जिसके अनुसार संविधान के कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से , कुछ प्रावधानों में विशिष्ट बहुमत से तथा महत्वपूर्ण शेष प्रावधानों में संसद के विशिष्ट बहुमत के साथ – साथ आधे राज्यों के अनुसमर्थन से बदले जा सकते हैं । इस दृष्टि से भारत का संविधान लचीलपन व कठोरता का सम्मिश्रण है । 

 

  1. सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न – 

सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न का अर्थ यह है कि भारत अपनी आंतरिक व विदेश नीति का निर्धारण स्वयं करेगा । भारत पर किसी विदेशी सत्ता का अधिकार नहीं है व भारत अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी इच्छानुसार आचरण कर सकता है । 

 

  1. संसदीय शासन प्रणाली- 

भारतीय संविधान द्वारा देश में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना की गई है । इस शासन प्रणाली में कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं तथा राष्ट्रपति नाममात्र का शासक होता है । 

 

  1. संघात्मक शासन व्यवस्था- 

भारतीय संविधान के प्रथम अनुच्छेद के अनुसार भारत राज्यों का एक संघ हैं । इस प्रकार भारत में संघात्मक शासन की स्थापना की गई है । संविधान ने शासन की शक्ति को एक स्थान पर केन्द्रित न कर केन्द्र और राज्य सरकारों में विभाजित किया है और दोनों ही अपने – अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हैं । 

 

  1. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका- 

नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा और संविधान की व्याख्या करने का अधिकार होने के कारण न्यायपालिका को स्वतंत्र घोषित किया गया है । संविधान न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन का अधिकार देता है , जिसके अन्र्तगत न्यायपालिका संसद तथा विधानमण्डलों द्वारा पारित कानूनों तथा कार्यपालिका द्वारा जारी ऐसे आदेशों को अवैध घोषित कर सकती हैं , जो संविधान के प्रतिकूल हैं । 

 

  1. मौलिक अधिकार एवं मूल कर्त्तव्य- 

नागरिकों के सर्वांगीण विकास हेतु मौलिक अधिकार आवश्यक हैं । भारत के संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रावधान है । ये ऐसे अधिकार हैं , जो न्याय योग्य हैं , अर्थात् जिनका उल्लंघन होने पर नागरिक उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की शरण ले सकता है । संविधान के 42 वें संशोधन ( 1976 ) के द्वारा संविधान में एक नया प्रावधान ‘ मूलकर्तव्य जोड़ा गया है , उसके द्वारा नागरिकों के 10 कर्तव्य निश्चित किए गये हैं । 

 

  1. सार्वभौम वयस्क मताधिकार- 

संविधान द्वारा भारतीय नागरिकों को सार्वभौम वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है । वयस्क मताधिकार का अर्थ प्रत्येक नागरिक को एक निश्चित आयु पर वोट ( मत ) देने के अधिकार से है । हमारे संविधान में यह मताधिकार 18 वर्ष की आयु प्राप्त सभी नागरिकों को किसी धर्म , वंश , जाति , वर्ण , लिंग , जन्मस्थान के भेदभाव के बिना समान रूप से दिया गया है । 

 

प्रश्न 2. भारत का संविधान लिखित एवं विस्तृत क्यों है ? वर्णन कीजिए । 

उत्तर- भारत का संविधान विभिन्न राष्ट्रों के संविधान से अत्यन्त कल्याणकारी नियमों व कानूनों को लेकर निर्मित किया गया है तथा इस संविधान का निर्माण करते समय हर प्रकार की सावधानी रखी गयी है इसीलिए भारत का संविधान 2 वर्ष , 11 माह और 18 दिन में निर्मित हुआ । इतने विशाल संविधान को अलिखित नहीं रखा जा सकता था । अतः भारत के संविधान को लिखित रूप प्रदान किया गया । लिखित संविधान के कारण संविधान सम्बन्धी विभिन्न मामलों में स्पष्टता लाना भी था । भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है । वर्तमान में इस संविधान में 395 अनुच्छेद 12 अनुसूचियाँ हैं , जो कि 22 भागों में विभक्त हैं । विश्व के किसी भी संविधान में इतने अनुच्छेद नहीं हैं , इसलिए भारत का संविधान बहुत विस्तृत है । उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट होता है कि भारत का संविधान लिखित एवं विस्तृत उसकी विशालता व स्पष्टता के कारण ही है । 

 

प्रश्न 3. संघात्मक एवं संसदीय शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए ।

उत्तर – संघात्मक शासन व्यवस्था- जब किसी राष्ट्र के संविधान द्वारा केन्द्रीय व प्रान्तीय सरकारों के बीच शक्ति – विभाजन कर दिया जाता है और ऐसा प्रबन्ध कर दिया जाता है कि इन दोनों पक्षों में से कोई एक अकेला इस शक्ति – विभाजन में परिवर्तन न कर सके , उसे संघात्मक शासन कहते हैं । 

 

संघात्मक शासन की निम्न विशेषताएँ हैं- 

( 1 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में राज्य की इकाइयों को शक्तियाँ संविधान से प्राप्त होती हैं । 

( 2 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में संविधान द्वारा केन्द्रीय और स्थानीय सरकारों के बीच शक्ति का विभाजन कर दिया जाता है । 

( 3 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में संविधान की सर्वोच्चता होती है । 

( 4 ) संविधान की व्याख्या एवं रक्षा करने हेतु उच्चतम न्यायालय की स्थापना इस शासन व्यवस्था में की जाती है । संसदीय शासन व्यवस्था- संसदात्मक व्यवस्था वह शासन प्रणाली है , जिसमें वास्तविक कार्यपालिका उसके लोकप्रिय सदन के प्रति तथा अन्तिम रूप में निर्वाचन मण्डल के प्रति अपनी राजनीतिक नीतियों एवं कार्यों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होती है और राज्य का प्रधान नाममात्र तथा अनुत्तरदायी होता है । 

 

संसदीय शासन व्यवस्था की विशेषताएँ- 

( 1 ) इस शासन व्यवस्था में नाममात्र की व वास्तविक कार्यपालिका में भेद होता है । राज्य का प्रधान नाममात्र की कार्यपालिका व मंत्रिपरिषद् वास्तविक कार्य – पालिका होती है । 

( 2 ) इस व्यवस्था में व्यवस्थापिका एवं कार्यपालिका में घनिष्ट सम्बन्ध होता है । 

( 3 ) इस व्यवस्था में कार्यपालिका का कार्यकाल अनिश्चित होता है । 

( 4 ) इस व्यवस्था में संसद के प्रति मंत्रिमण्डल का सामूहिक उत्तरदायित्व होता है । 

 

प्रश्न 4. संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को एक स्वतंत्र एवं विकासशील जीवन प्रदान करने के लिए मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं । संविधान द्वारा नागरिक को छह मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं , जो निम्नलिखित हैं 

 

  1. समानता का अधिकार- 

भारतीय संविधान में कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं । धर्म , जाति , लिंग , भाषा , जन्म आदि की दृष्टि से किसी भी प्रकार की असमानता को नहीं माना गया है । 

 

  1. स्वतंत्रता का अधिकार- 

भारतीय नागरिकों को भाषण देने , शांतिपूर्ण सम्मेलन करने , इच्छानुसार व्यापार – व्यवसाय करने , किसी भी धर्म का पालन करने आदि की स्वतंत्रता है । ‘ 

 

  1. शोषण के विरुद्ध अधिकार- 

यदि किसी भी व्यक्ति का शारीरिक , भावनात्मक , मानसिक , आर्थिक या किसी भी प्रकार का शोषण किया जाता है , तो उसके विरुद्ध यह व्यक्ति कानून की सहायता लेकर शोषण मुक्त हो सकता है । 

 

  1. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार- 

व्यक्ति अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म को अपना सकता है , उसका पालन कर सकता है । 

 

  1. संस्कृति तथा शिक्षा सम्बन्धी अधिकार- 

प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भाषा , लिपि एवं संस्कृति को सुरक्षित रखने तथा शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करने का अधिकार है ।

 

  1. संवैधानिक उपचारों का अधिकार- 

यदि किसी भी नागरिक के किसी भी अधिकार का हनन होता है , तो यह न्यायालय की सहायता से अपने अधिकारों को सुरक्षित रख सकता है । संविधान में उल्लेखित मूल कर्त्तव्य – भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह 

( 1 ) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों , संस्थानों , राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे । 

( 2 ) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे । 

( 3 ) भारत की सम्प्रभुता , एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे । 

( 4 ) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे । 

( 5 ) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करे , जो धर्म , भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो । ऐसी प्रथाओं का त्याग करे , जो स्त्रियों के सम्मान के 

( 6 ) हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्व समझे और इसका परिरक्षण करे । 

( 7 ) प्राकृतिक पर्यावरण की , जिसके अन्तर्गत बन , झील , नदी और वन्य जीव हैं , रक्षा करे और उनका सम्बर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दया रखे । 

( 8 ) वैज्ञानिक दृष्टिकोण , मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे । 

( 9 ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे । 

( 10 ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का प्रयास करे , जिससे राष्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू सके । 

 

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारत के संविधान की उद्देशिका या प्रस्तावना को लिखिए । 

उत्तर- भारत का संविधान उद्देशिका या प्रस्तावना हम , भारत के लोग , भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व – सम्पन्न , समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक , आर्थिक और राजनैतिक न्याय ; विचार , अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता ; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए : दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर , 1949 ई . ( मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी , संवत् दो हजार छह विक्रमी ) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं ।

 

प्रश्न 2. भारत के संविधान निर्माण हेतु बनाई गई समितियों पर टिप्पणी लिखिए । 

उत्तर- भारत के संविधान का निर्माण कार्य सरल नहीं था , अतः संविधान निर्माण को सुगम बनाने के लिए विभिन्न समितियाँ बनाई गई । प्रक्रियागत मामलों से सम्बन्धित 10 समितियाँ एवं तथ्यगत मामलों की 8 समितियाँ बनाई गयी थीं । इनमें प्रमुख समितियाँ थीं- प्रक्रिया समिति , वार्ता समिति , संचालन समिति , कार्य समिति , संविधान का निर्माण करने के लिए संविधान समिति , संघ शक्ति समिति , मूल अधिकारों और अल्पसंख्यकों आदि से सम्बन्धित समितियाँ । उपर्युक्त समस्त समितियों के प्रतिवेदनों एवं सुझावों के अनुसार संविधान को अंतिम स्वरूप देने हेतु एक प्रारूप समिति ( Drafting Committee ) बनाई गई । प्रारूप समितिका सभापति डॉ . भीमराव अम्बेडकर को बनाया गया । इस समिति में एन . गोपालस्वामी आयंगर , अल्लादीकृष्णा स्वामी अय्यर , सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला , के.एम. मुंशी , बी.एल. मित्तल , डी.पी. खेतान सदस्य थे । बाद में श्री मित्तल व खेतान का स्थान एन . माधवन रॉव व टी.टी. कृष्णामचारी ने ले लिया । 

 

प्रश्न 3. इकहरी नागरिकता किसे कहते हैं ?

उत्तर- भारतीय संविधान ने इकहरी नागरिकता को अपनाया है अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक है , चाहे वह किसी भी स्थान पर निवास करता हो । वह अपने राज्य जैसे- मध्यप्रदेश , उत्तरप्रदेश , हरियाणा , पंजाब आदि का नागरिक नहीं होता है । भारत के सभी नागरिक देश में कहीं भी रोजगार प्राप्त कर सकते हैं तथा देश के सभी भागों में समान अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं । यही इकहरी नागरिकता है । 

 

प्रश्न 4. संसदीय शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए । 

अथवा 

संसदीय शासन प्रणाली की विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर – संसदीय शासन व्यवस्था – संसदात्मक व्यवस्था वह शासन प्रणाली है , जिसमें वास्तविक कार्यपालिका उसके लोकप्रिय सदन के प्रति तथा अन्तिम रूप में निर्वाचन मण्डल के प्रति अपनी राजनीतिक नीतियों एवं कार्यों के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होती है और राज्य का प्रधान नाममात्र तथा अनुत्तरदायी होता है । 

 

संसदीय शासन व्यवस्था की विशेषताएँ- 

 

( 1 ) इस शासन व्यवस्था में नाममात्र की व वास्तविक कार्यपालिका में भेद होता है । राज्य का प्रधान नाममात्र की कार्यपालिका व मंत्रिपरिषद् वास्तविक कार्यपालिका होती है । 

( 2 ) इस व्यवस्था में व्यवस्थापिका एवं कार्यपालिका में घनिष्ठ सम्बन्ध होता है । 

( 3 ) इस व्यवस्था में कार्यपालिका का कार्यकाल अनिश्चित होता है । 

( 4 ) इस व्यवस्था में संसद के प्रति मंत्रिमण्डल का सामूहिक उत्तरदायित्व होता है ।

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