MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 13 भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 13 भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 13 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) मध्यप्रदेश की विधान सभा की सदस्य संख्या है 

( i ) 320 

( ii ) 270

( iii ) 250 

( iv ) 230 

 

( 2 ) राज्य सभा के सदस्यों को नामजद करने का अधिकार किसे है ? 

 

( i ) राष्ट्रपति को 

( ii ) प्रधानमंत्री को 

( iii ) राज्यपाल को 

( iv ) सर्वोच्च न्यायालय को । 

 

( 3 ) राज्य में अध्यादेश जारी करने का अधिकार इनमें से किसे है ? 

( i ) राज्यपाल 

( ii ) गृह मन्त्री 

( iii ) मुख्यमंत्री 

( iv ) राष्ट्रपति । 

 

( 4 ) किसी राज्य का राज्यपाल किसका अनिवार्य अंग रहता है ? 

 

( i ) संसद 

( ii ) विधान सभा 

( iii ) न्यायपालिका 

( iv ) राज्य सभा

 

( 5 ) राज्यसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु क्या है ? 

( 1 ) 25 वर्ष 

( ii ) 30 वर्ष 

( iv ) 50 वर्ष 

 

( 6 ) संसद का दूसरा सदन किस नाम से जाना जाता है । 

( i ) राज्य सभा 

( ii ) विधान सभा

( ii ) लोकसभा 

( iv ) उच्च न्यायालय । 

 

( 7 ) प्रधानमंत्री की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है ? 

( i ) मुख्यमंत्री 

( ii ) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 

( ii ) राष्ट्रपति 

( iv ) राज्यपाल 

 

( 8 ) मद्यनिषेध अभियान किस भारतीय नेता के द्वारा चलाया गया । 

( 1 ) महात्मा गाँधी 

( i ) विनोबा भावे 

( ii ) सरदार वल्लभ भाई पटेल 

( iv ) जवाहरलाल नेहरू 

 

उत्तर- ( 1 ) ( iv ) , ( 2 ) ( i ) , ( 3 ) ( i ) , ( 4 ) ( ii ) , ( 5 ) ( ii ) , ( 6 ) ( i ) , ( 7 ) ( iii ) , ( 8 ) ( i ) 

 

सही जोड़ी मिलाइए 

सत्य / असत्य को स्पष्ट कीजिए

 

( i ) पंचायत का कार्यकाल सात वर्ष का होता है । 

( ii ) भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रधानमंत्री करते हैं । 

( iii ) कानून का क्रियान्वयन कार्यपालिका करती है । 

( iv ) म.प्र . में लोकसभा की सदस्य संख्या 29 है । 

( v ) राज्य सभा के सदस्य 250 होते हैं ।

 

उत्तर-

( i ) असत्य 

( ii ) असत्य 

( iii ) सत्य 

( iv ) सत्य 

( v ) सत्य । 

 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए

 

( 1 ) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश कब सेवानिवृत्त होते हैं ? 

( 2 ) लोकसभा की सदस्य संख्या म.प्र . में कितनी है ? 

( 3 ) लोकसभा की सदस्य संख्या लिखो । 

( 4 ) राज्यपाल को पद की शपथ कौन दिलाता है । 

( 5 ) राज्यसभा सदस्य के निर्वाचन के लिए न्यूनतम आयु क्या है ? 

( 6 ) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का श्रेय किस अंग्रेज अधिकारी को जाता है ?

( 7 ) राज्य की कार्यपालिका का प्रधान कौन होता है ? 

 

उत्तर- 

( 1 ) 65 वर्ष 

( 2 ) 29 

( 3 ) 545 

( 4 ) राष्ट्रपति 

( 5 ) 30 वर्ष 

( 6 ) ए.ओ.यूम

( 7 ) मुख्यमंत्री 

 

भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश किस आयु में सेवानिवृत्त होते हैं ? 

उत्तर- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं । 

 

प्रश्न 2. लोकसभा की सदस्य संख्या मध्यप्रदेश में कितनी है ? 

उत्तर- लोकसभा की सदस्य संख्या मध्यप्रदेश में 29 है । 

 

प्रश्न 3. लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है ? 

उत्तर- लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा सदस्य अपने मध्य में से ही करते हैं । 

 

भारतीय प्रजातन्त्र की कार्यप्रणाली लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. लोक सभा के सदस्य की योग्यताएं लिखिए ।

उत्तर – लोकसभा सदस्यों के लिए योग्यताएँ इस प्रकार हैं- 

( 1 ) वह भारत का नागरिक हो । 

( 2 ) उसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक हो । 

( 3 ) वह केन्द्र या प्रांत सरकारों के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो । 

( 4 ) उसे किसी सक्षम न्यायालय ने पागल या दिवालिया घोषित न किया हो । 

( 5 ) उसे संसद के किसी कानून द्वारा चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित न किया गया हो ।

 

प्रश्न 2. जिला पंचायत के कार्य लिखिए । उत्तर – जिला पंचायत के कार्य ये हैं- 

( 1 ) जिले की जनपद पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों पर नियन्त्रण रखना , उनके मध्य समन्वय करना और उनका मार्गदर्शन करना । 

( 2 ) जनपद पंचायत की योजनाओं को समन्वित करना । 

( 3 ) विशेष प्रयोजनों के लिए जनपद पंचायतों द्वारा की गई अनुदान की मांग को राज्य सरकार तक पहुंचाना । 

( 4 ) जिले की ऐसी योजनाओं को , जो दो से अधिक जनपद पंचायतों में हों । 

( 5 ) विकास सम्बन्धी क्रियाकलापों , सामाजिक वानिकी , परिवार कल्याण तथा बाल कल्याण और खेलकूद के सम्बन्ध में राज्य सरकार को सलाह देना । 

( 6 ) राज्य सरकार द्वारा निर्देशित अन्य कार्य करना । 

 

प्रश्न 3. प्रधानमंत्री के कार्य लिखिए ।

उत्तर- प्रधानमंत्री के ये कार्य हैं- 

( 1 ) प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है । 

( 2 ) मंत्रिपरिषद में अन्य मंत्रियों को नियुक्ति करने हेतु राष्ट्रपति को सलाह देता है । 

( 3 ) मंत्रिपरिषद् के मंत्रियों के बीच उसकी सलाह पर राष्ट्रपति विभागों का बँटवारा करता है । 

( 4 ) विभिन्न विभागों का समन्वय करता है । 

( 5 ) वह राष्ट्रपति का प्रधान सलाहकार होता है । 

( 6 ) वह योजना आयोग का अध्यक्ष होता है । आर्थिक विकास की योजनाएं बनाता है । 

 

प्रश्न 4. राज्य सभा के कार्य लिखिए । 

उत्तर- राज्य सभा के कार्य इस प्रकार हैं- 

( 1 ) राज्य सभा , लोकसभा के समान विधि निर्माण का कार्य कर सकती है । 

( 2 ) राज्य सभा धन विधेयक पर विचार कर उसे पारित करती है । 

( 3 ) राज्य सभा मंत्रिमण्डल पर नियन्त्रण रखती है । 

( 4 ) राज्य सभा के सदस्य राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं । 

( 5 ) राष्ट्रपति द्वारा घोषित आपातकाल की पुष्टि राज्यसभा द्वारा की जाती है । 

( 6 ) राज्य सभा राज्यसभा के किसी विषय को 2/3 बहुमत से राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर सकती है । 

 

प्रश्न 5. राज्यपाल के चार कार्य लिखिए ।

उत्तर- राज्यपाल के प्रमुख कार्य- 

( 1 ) राज्यपाल राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है । 

( 2 ) राज्यपाल विधानसभा की बैठकों को बुलाता है तथा उन्हें स्थगित भी कर सकता है । वह मुख्यमंत्री के परामर्श पर विधानसभा भंग भी कर सकता है । 

( 3 ) विधानमण्डलों द्वारा स्वीकृत विधेयकों को राज्यपाल स्वीकृत करता है । 

( 4 ) जब विधानसभा का अधिवेशन न चल रहा हो , तब राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है । 

 

प्रश्न 6. मुख्यमंत्री के कोई पाँच कार्य लिखिए ।

उत्तर- मुख्यमंत्री के कार्य निम्न हैं- 

( 1 ) राज्यपाल का सलाहकार । 

( 2 ) स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएं मुहैया करवाना । 

( 3 ) राज्य में सुरक्षा व्यवस्था । 

( 4 ) राज्य के विकास हेतु कार्य करवाना । 

( 5 ) राज्य में सड़क , पानी , बिजली की व्यवस्था करवाना । 

 

भारतीय प्रजातन्त्र की कार्य प्रणाली दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. संघात्मक शासन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- संघात्मक शासन की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं- 

( 1 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में संघ और राज्य की सरकारें होती हैं । संघ में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का नेतृत्व होता है , व राज्य राज्यपाल और मुख्यमंत्री का । 

( 2 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में संघ और राज्यों के मध्य शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है । इस शक्ति विभाजन के आधार पर ही संघ और राज्य सरकारें कानून का निर्माण करती हैं । 

( 3 ) संघात्मक शासन प्रणाली में संविधान लिखित स्वरूप में होता है तथा उसकी सर्वोच्चता होती है । संविधान ही उस राष्ट्र का सर्वोच्च कानून होता है । 

( 4 ) संघात्मक शासन प्रणाली में न्यायपालिका स्वतन्त्र व सर्वोच्च होती है एवं न्यायपालिका संविधान की संरक्षक होती है । 

( 5 ) संघात्मक शासन व्यवस्था में द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका होती है । प्रथम सदन लोकसभा तथा द्वितीय सदन राज्यसभा कहलाता है । 

 

प्रश्न 2. केन्द्र व राज्य सरकारों के मध्य प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन किस प्रकार किया जाता है ? समझाइए । 

उत्तर- केन्द्र व राज्य सरकार के मध्य प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन निम्न प्रकार किया गया है 

 

  1. राज्य सरकारों को निर्देश- 

राष्ट्रीय महत्व के विषयों में केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को निर्देश देती है । इन निर्देशों का पालन राज्यों द्वारा किया जाता है । राष्ट्रीय सुरक्षा , विदेशों से राजनयिक सम्पर्क आदि इस श्रेणी में आते हैं । 

 

  1. संघीय कार्यों को राज्य सरकारों को सौंपना – 

संघीय कार्यपालिका कुछ कार्य राज्य सरकारों को सौंप सकती है । किसी अन्तर्राष्ट्रीय संधि या समझौते के पालन के लिए संघ राज्यों को आदेश दे सकता है । लव मार्गों की सुरक्षा आदि विषयों से सम्बन्धित ऐसे ही आदेश दिए जा सकते हैं । 

 

  1. अखिल भारतीय सेवाएँ- 

भारत में कुछ सेवाएँ अखिल भारतीय सेवाएं हैं , जैसे- आई.ए.एस. ( भारतीय प्रशासनिक सेवा ) , आई.पी.एस. ( भारतीय पुलिस सेवा ) आदि । इन सेवाओं के अधिकारियों का चयन संघीय लोक सेवा आयोग करता है । इन अधिकारियों की सेवा शर्तों का निर्धारण केन्द्रीय सरकार करती है । अपने सम्बन्धित राज्यों में सेवा करने के अतिरिक्त ये अधिकारी समय – समय पर केन्द्र में भी सेवा करते हैं । इस प्रकार संघ सरकार राज्यों पर अपना प्रभाव रखती है । 

 

4.आर्थिक सहायता- 

राज्य सरकार को जो राशि करों से प्राप्त होती हैं , वह अपर्याप्त होती है । आय के महत्वपूर्ण साधन केन्द्र के पास है । केन्द्र सरकार राज्यों को समय – समय पर अनुदान देती है । इस सहायता माध्यम से केन्द्र राज्यों अपना प्रभाव रखता है । 

 

5.संसद के अधिकार – 

संसद को यह अधिकार है कि वह कानून बनाकर एक राज्य को विभाजित कर देया दो राज्यों या उनके भाग को मिलाकर एक नया राज्य बना दे । किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ाने , घटाने उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने की शक्ति संसद को प्राप्त है । 

 

  1. राज्य सूची में वर्णित विषयों पर कानून बनाना – 

राज्यों को यह अधिकार है कि वह राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सके तथा प्रशासन कर सके , परन्तु राज्यों का यह अधिकार अन्तिम नहीं है । निम्न परिस्थितियों में संसद , राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है । 

 

( अ ) राज्य सभा द्वारा किसी प्रांतीय सूची के विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित करने पर । 

( ब ) राष्ट्रपति द्वारा आपात्काल की घोषणा किए जाने पर । 

( स ) राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राष्ट्रपति के द्वारा राज्य की विधायनी शक्ति संसद को सौंपने पर । 

( द ) यदि राज्य विधान मण्डल स्वयं इस आशय का प्रस्ताव पारित कर दे कि किसी विषय विशेष पर संसद कानून बनाए । 

 

प्रश्न 3. संसद में विधेयक पारित होने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए । 

उत्तर – संसद में विधेयक पारित होने की प्रक्रिया निम्नलिखित है 

 

1.प्रथम वाचन या विधेयक का प्रस्तुतीकरण-

संसद का कोई भी सदस्य एक माह की पूर्व सूचना पर लोकसभा / राज्यसभा अध्यक्ष की अनुमति मिलने पर विधेयक को प्रस्तुत करता है । प्रथम वाचन के समय केवल शीर्षक को पढ़कर सुनाया जाता है । साधारणतः प्रथम वाचन पर कोई वाद – विवाद नहीं होता । अर्थात् विधेयक का प्रस्तुतीकरण ही प्रथम वाचन है । प्रस्तुतीकरण उपरांत विधेयक को भारतीय गजट में प्रकाशित किया जाता है । 

 

  1. द्वितीय वाचन – 

द्वितीय वाचन के शुरु होने के पूर्व विधेयक की प्रतियाँ सभी सदस्यों को वितरित की जाती हैं । इस स्तर पर विधेयक के प्रत्येक अनुच्छेद पर विस्तार से विचार नहीं होता , केवल मूल अवधारणा पर विचार होता है । उस अवसर पर कोई संशोधन भी प्रस्तुत नहीं किया जाता । यदि आवश्यक समझा जाता है , तो विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजा जाता है । 

 

  1. समिति अवस्था- 

गहन विचार के लिए सदन को छोटी – छोटी समितियों में विभाजित किया जाता है । समिति के सदस्य विधेयक के प्रत्येक अनुच्छेद पर सूक्ष्मता से विचार करते हैं । समिति चाहे तो विशेषज्ञों से परामर्श ले सकती है । समिति को विधेयक में संशोधन करने का भी अधिकार है । पूर्णरूप से विचार उपरांत समिति अपना प्रतिवेदन लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को ( जैसी आवश्यकता हो ) प्रस्तुत करती है । 

 

  1. प्रतिवेदन स्तर – 

समिति प्रतिवेदन तथा समिति द्वारा विधेयक में जो संशोधन किया जाता है , की प्रतियाँ सदन के सदस्यों को दी जाती हैं । सदन चाहे तो समिति के प्रतिवेदन को उसी स्वरूप में स्वीकार कर सकता है । सदन में विधेयक पर चर्चा होती है । सदस्य अपनी ओर से संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं । संशोधन से सम्बन्धित प्रत्येक पार विचार – विमर्श तथा वाद – विवाद होता है । अंत में विधेयक पर मतदान होता है । यदि मतदान उपरांत विधेयक को स्वीकार कर लिया जाता है , तो यह चरण पूर्ण हो जाता है ।

 

  1. तृतीय वाचन- 

प्रतिवेदन स्तर के उपरांत विधेयक पारित होने की अवस्था अंतिम अवस्था या तृतीय वाचन कहलाता है । उस स्तर पर विधेयक की प्रत्येक धारा पर विचार न होकर मूल भावना पर विचार होता है । इस अवस्था में विधेयक में कोई परिवर्तन नहीं होता । यदि विधेयक को सदन पारित कर देता है , तो सदन के अध्यक्ष या सभापति के हस्ताक्षर से विधेयक को प्रमाणित कर उसे दूसरे सदन में भेज दिया जाता है । 

 

  1. विधेयक का दूसरे सदन में जाना- 

किसी भी एक सदन में जब विधेयक स्वीकृत हो जाता है , तो उसे दूसरे सदन में भेजा जाता है । दूसरे सदन में विधेयक उपर्युक्त प्रक्रिया से ही गुजरता है । 

 

  1. राष्ट्रपति की स्वीकृति- 

संसद के दोनों सदनों में जब विधेयक पारित हो जाता है , तब उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति हेतु भेजा जाता है । राष्ट्रपति की स्वीकृति उपरांत वह विधेयक कानून बन जाता है , तब उसे सरकारी गजट में प्रकाशित कर दिया जाता है । साधारण विधेयकों पर राष्ट्रपति अपनी स्वीकृति दे सकता है , या उसे पुनर्विचार हेतु सदनों को वापिस भेज सकते हैं । परन्तु यदि दोनों सदन पुनः विधेयक को पारित कर देते हैं , तो उस विधेयक पर राष्ट्रपति को स्वीकृति देनी ही होती है । 

 

प्रश्न 4. राष्ट्रपति के संकटकालीन अधिकारों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- राष्ट्रपति की संकटकालीन ( आपात्कालीन ) शक्तियाँ निम्नलिखित हैं- 

 

( 1 ) देश पर बाह्य आक्रमण , देश में हमे वाले सशस्त्र विद्रोह , राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था विफल होने पर या वित्तीय संकट आने पर राष्ट्रपति आपात्काल लागू कर सकते हैं । मंत्रिमंडल की सलाह पर ही राष्ट्रपति आपात्काल की घोषणा कर सकते हैं । ऐसी किसी भी घोषणा पर दो माह के भीतर संसद के दोनों सदनों की पुष्टि आवश्यक है । इस अवस्था में संसद को सम्पूर्ण भारत अथवा उसके किसी भाग के लिए विधि निर्माण का अधिकार प्राप्त हो जाता है । संघ सरकार ऐसी स्थिति में राज्य सरकारों को आवश्यक आदेश दे सकते हैं । 

 

( 2 ) राज्यपाल के प्रतिवेदन से या अन्य तरीके से राष्ट्रपति को यदि यह विश्वास हो जाता है कि किसी राज्य का प्रशासन , संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल पा रहा है , तब राष्ट्रपति केन्द्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति से राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है । ऐसी अधिसूचना पर दो माह के भीतर संसद के देनों सदनों की पुष्टि आवश्यक है । घोषणा अवधि में सम्बन्धित राज्य का सम्पूर्ण या आंशिक शासन राष्ट्रपति के साथ में आ जाता है । राज्य के शासन संचालन का अधिकार वह राज्यपाल को सौंप सकता है । इस अवधि में प्रतों की विधि निर्माण की शक्ति संसद को प्राप्त हो जाती है । इस अवधि में राज्यपाल उच्च न्यायालयों की शक्ति को छेड़का राज्य की समस्त प्रशासकीय शक्तियों का प्रयोग कर सकता है । 

 

( 3 ) जब राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाता है कि देश में गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है , तो वह ‘ आर्थिक आपातकाल लागू का सक्ता है । 

 

प्रश्न 5. मंत्रिपरिषद् के कार्यों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- मंत्रिपरिषद् के कार्य ( शक्तियाँ ) निम्नलिखित हैं 

 

  1. नीति निर्धारित करना- 

देश की आर्थिक , सामाजिक , राजनीतिक , वैदेशिक आदि समस्याओं का हल करने के लिए मंत्रिपरिषद् समस्त पहलुओं पर विचार करके नीति निर्धारित करता है । 

 

  1. नियुक्ति सम्बन्धी कार्य- 

देश के भीतर एवं बाह्य महत्वपूर्ण पदों पर की जाने वाली महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ , जैसे – राजदूत , राज्यपाल विभिन्न आयोगों के सदस्य एवं अध्यक्ष , महान्यायवादी आदि की नियुक्ति मंत्रिमंडल द्वारा की जाती है । 

 

  1. वित्त सम्बन्धी कार्य – 

देश के आय – व्यय पर मंत्रिमण्डल का नियंत्रण रहता है । वित्तमंत्री बजट तैयार करता है , मंत्रिमण्डल में प्रस्तुत करता है । मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद उसे सदन में प्रस्तुत करता है । यदि बजट को लोकसभा स्वीकृति नहीं देती , तो सम्पूर्ण मंत्रिमण्डल को त्यागपत्र देना होता है । 

 

  1. राष्ट्रपति को परामर्श- 

मंत्रिपरिषद् समय – समय पर राष्ट्रपति को परामर्श देता है । राष्ट्रपति मंत्रिमण्डल की सलाह को मानने के लिए बाध्य है । 

 

प्रश्न 6. सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- भारत के सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ निम्नानुसार हैं 

 

  1. प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार- 

ऐसे विवाद , जो देश के अन्य न्यायालयों में नहीं जाते , केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही प्रस्तुत होते हैं ।

  1. राज्यों के मध्य विवाद- 

( 1 ) संघीय सरकार एवं एक या एक से अधिक राज्यों के बीच 

( 2 ) ऐसा विवाद , जिसमें एक ओर संघीय शासन व एक या अधिक राज्य हों तथा दूसरी और एक या अधिक राज्य हों ।

( 3 ) दो या दो से अधिक राज्यों के बीच विवाद । 

( ख ) मौलिक अधिकारों से सम्बन्धित विवाद- नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय को समुचित कार्रवाई करने की शक्ति प्राप्त है । 

 

  1. अपीलीय क्षेत्राधिकार- 

सर्वोच्च न्यायालय देश का सबसे बड़ा अंतिम अपीलीय न्यायालय है । उस क्षेत्राधिकार के तहत सर्वोच्च न्यायालय को निम्न अपील सुनने का अधिकार है । 

( क ) संवैधानिक अपीलें 

( ख ) दीवानी अपीलें 

( ग ) फौजदारी अपीलें 

( घ ) विशेष अपीलें 

 

  1. परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार- 

संविधान की धारा 143 के अनुसार यदि राष्ट्रपति किसी संवैधानिक या कानूनी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेना चाहे तो राष्ट्रपति को परामर्श दे सकता है । न्यायिक पुनरावलोकन सम्बन्धी क्षेत्राधिकार- सर्वोच्च न्यायालयों को संसद एवं विधानसभाओं द्वारा निर्मित विधियों एवं प्रशासकीय निर्देशों की वैधता को जाँचने का अधिकार है । इस अधिकार के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय विधियों या नियमों की वैधता की जाँच करता है कि ये नियम या विधियाँ संविधान के अनुसार हैं , या नहीं । अपनी इस शक्ति के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय विधान की रक्षा करता है । 

 

  1. अभिलेख न्यायालय- 

सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय भी है अर्थात् उसके समस्त निर्णय एवं अभिलेख लिखित रहते हैं तथा प्रकाशित किए जाते हैं तथा इन्हें अभिलेख के रूप में रखा जाता है । अधीनस्थ न्यायालयों के सम्मुख इन निर्णयों को नजीर ( उदाहरण ) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तथा अधीनस्थ न्यायालय इन नजीरों को मानते हैं 

 

  1. अन्य कार्य – 

सर्वोच्च न्यायालय उपर्युक्त अधिकारों के अलावा ये कार्य भी करता है- 

( अ ) अपने अधीनस्थ न्यायालयों का निरीक्षण एवं जाँच । 

( ब ) अपने तथा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों व अधि कारियों की सेवा – शर्तों का निर्धारण व उन्हें पदोन्नत तथा पदच्युत करना । 

( स ) न्यायालय की अवमानना करने वाले किसी भी व्यक्ति को दण्डित करने की शक्ति । 

 

प्रश्न 7. पंचायती राज व्यवस्था को समझाते हुए स्थानीय संस्थाओं के कार्यों का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- पंचायती राज व्यवस्था – प्रदेश के ग्रामों में साफ – सफाई , स्वास्थ्य सेवाएँ , रोशनी , पीने का पानी आदि सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं । यदि गाँव छोटे हैं , तो वहाँ दो या दो से अधिक गांवों को मिलाकर ग्राम पंचायत बनती हैं । ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी अपने गाँवों का प्रबन्ध स्वयं करते हैं । गाँव के लिए यह व्यवस्था पंचायत राज व्यवस्था नाम से विख्यात है । महात्मा गाँधी पंचायती राज व्यवस्था के बड़े पक्षधर थे । वे यह मानते थे कि जब तक भारत के ग्रामों में जीवन का आधार लोकतान्त्रिक नहीं होगा , तब तक देश में वास्तविक लोकतन्त्र की स्थापना नहीं होगी । देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय शासन की स्थापना उन राज्यों के विधान मण्डलों द्वारा निर्मित कानूनों के अनुसार की गई है । इस कारण सभी राज्यों के स्थानीय शासन समान न होकर भिन्न – भिन्न प्रकार के हैं । 

 

मध्यप्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था का ढाँचा प्रकार का है- 

( 1 ) ग्रामों के लिए ग्राम सभा और ग्राम पंचायत । 

( 2 ) प्रत्येक विकास खण्ड के लिए जनपद पंचायत । 

( 3 ) प्रत्येक जिले के लिए जिला पंचायत । इस प्रकार पंचायतों के तीन स्तर हैं । स्थानीय संस्थाओं के कार्य- नगर पंचायत , नगर पालिका और नगर निगम के कार्य समान ही हैं । 

 

तीनों संस्थाएं अपने – अपने क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य करती हैं- 

( 1 ) सड़कों , सार्वजनिक भवनों में प्रकाश व्यवस्था करना । 

( 2 ) नगर की साफ – सफाई कराना । 

( 3 ) कांजी हाऊस खोलना और उनका प्रबन्ध करना । 

( 4 ) जन्म – मृत्यु पंजीयन । 

( 5 ) पानी की व्यवस्था । 

( 6 ) मकान , सड़क आदि की व्यवस्था । 

( 7 ) अग्निशामक यंत्र आदि से आग लगने पर सहायता करना । 

( 8 ) जनता के मनोरंजन हेतु मेलों आदि का आयोजन करना आदि । स्थानीय शहरी निकाय नागरिकों को अनेक प्रकार की सुविधाएँ देता है । यह नागरिकों को स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करता है ।

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. धन विधेयक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए । 

उत्तर – धन विधेयक साधारण विधेयक से भिन्न तरीके से पारित होते हैं । धन विधेयक केवल लोकसभा प्रस्तुत होते हैं । लोकसभा धन विधेयक पारित होने के बाद धन विधेयक विचार के लिए राज्यसभा में भेजा जाता है । राज्यसभा को उसे 14 दिवस में पारित करना होता है । धन विधेयक में राज्यसभा किसी प्रकार से कोई संशोधन नहीं कर सकती । यदि राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन करती भी है , तो यह विधेयक उसी रूप में पारित समझे जाते हैं , जिस रूप में उसे लोकसभा ने पारित किया है । वित्तीय मामलों में राज्यसभा की शक्तियाँ नगण्य हैं । लोकसभा द्वारा पारित होने और राज्यसभा में विचार उपरांत लोकसभा अध्यक्ष वित्त विधेयक पर हस्ताक्षर करके ( प्रमाणीकरण करके ) राष्ट्रपति को भेजता है । राष्ट्रपति द्वारा इस प्रकार पारित वित्त विधेयक पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है । 

 

प्रश्न 2. विधान सभा की शक्तियों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर – 1. विधि निर्माण का कार्य- 

राज्य सूची एवं समवर्ती सूची के सभी विषयों पर विधान सभाओं को विधि निर्माण का अधिकार है । समवर्ती सूची के किसी विषय पर यदि पूर्व में ही संसद विधि बना चुकी है , तो राज्य की विधानसभा द्वारा बनाया गया कानून उसके प्रतिकूल नहीं हो सकता । 

 

  1. कार्यपालिका सम्बन्धी कार्य – 

विधानसभा का कार्यपालिका पर पूर्ण नियंत्रण होता है । राज्य मंत्रिमण्डल सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है । विधानसभा अविश्वास प्रस्ताव के द्वारा मंत्रिपरिषद् को अपदस्थ कर सकती है । विधानसभा के विश्वासपर्यन्त ही मंत्रिमण्डल अपने पद पर रह सकता है । 

 

  1. वित्तीय कार्य- 

राज्य विधानसभा को वित्तीय अधिकार हैं । कार्यपालिका विधानसभा की स्वीकृति के बिना न तो कोई कर लगा सकती है और न ही कोई सार्वजनिक धन व्यय कर सकती है । 

 

  1. अन्य शक्तियाँ- 

विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं । इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान के कुछ उपबंधों में संशोधनों के लिए आधे से ज्यादा राज्यों के विधान मण्डलों की स्वीकृति आवश्यक है । 

 

प्रश्न 3. लोकसभा की शक्तियों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर – 1. विधायी शक्ति- 

लोकसभा का प्रमुख कार्य विधि निर्माण है । संविधान के अनुसार विधि निर्माण में लोकसभा एवं राज्यसभा की शक्तियाँ बराबर हैं , परन्तु व्यवहार में लोकसभा ज्यादा शक्तिशाली है । साधारण रूप से समस्त महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जाते हैं । 

 

  1. वित्तीय शक्ति- 

संविधान के द्वारा वित्तीय मामलों में लोकसभा को शक्तिशाली बनाया गया है । वित्त विधेयक लोकसभा में ही पारित किए जाते हैं । यद्यपि वित्त विधेयक लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में जाते हैं , तथापि राज्यसभा के द्वारा धन विधेयकों पर 14 दिन के अन्दर स्वीकृति देनी होती है । 

 

  1. कार्यपालिका पर नियन्त्रण- 

संविधान के अनुसार मंत्रिमण्डल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है । मंत्रिमण्डल तब तक ही क्रियाशील रह सकता है , जब तक लोकसभा का उसमें विश्वास है । लोकसभा के सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछकर शासकीय नीतियों पर कार्यस्थगन प्रस्ताव तथा अविश्वास प्रस्ताव रखकर सरकार पर नियंत्रण रखते हैं । 

 

  1. संविधान में संशोधन- 

लोकसभा राज्यसभा के साथ मिलकर संविधान में संशोधन कर सकती है । 

 

  1. राष्ट्रपति – 

उपराष्ट्रपति का चुनाव- राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मण्डल द्वारा किया जाता है , जिसमें संसद के दोनों सदनों के चुने हुए सदस्य तथा राज्यों की विधान सभाओं के सदस्य होते हैं । इस तरह लोकसभा के सदस्य राज्यसभा के सदस्यों के साथ मिलकर उपराष्ट्रपति का निर्वाचन करते हैं । यह निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है और निर्वाचन में मतदान गुप्त होता है । 

 

  1. जनता के विचारों का मंच – 

लोकसभा चूँकि जनता के चुने हुए लोगों का सदन है , अतः इसके सदस्यों द्वारा व्यक्त किए विचार जनता के विचार माने जाते हैं । लोकसभा जनता की आकांक्षाओं एवं भावनाओं का दर्पण है । 

 

  1. विविध कार्य- 

लोकसभा राष्ट्रपति पर महाभियोग लगा सकती है , उपराष्ट्रपति हटाने के लिए राज्यसभा के पारित प्रस्ताव पर चर्चा करती है , उच्च एवं उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीशों के विरूद्ध महाभियोग प्रस्तावों पर चर्चा करती हैं । राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए संकटकाल की पुष्टि एक माह के भीतर लोकसभा द्वारा होना अनिवार्य है , अन्यथा ऐसी घोषणा स्वतः रद्द हो जाएगी । 

 

प्रश्न 4. व्यवस्थापिका के प्रमुख कार्यों को वर्णन कीजिए । 

उत्तर- 1. कानून का निर्माण- 

देश के शासन को संचालित करने के लिए कानूनों के निर्माण का कार्य व्यवस्थापिका करती है । 

 

  1. संविधान संशोधन- 

आवश्यकतानुसार संविधान में अगर परिवर्तन करना आवश्यक होता है , तो यह कार्य संविधान द्वारा व्यवस्थापिका को दिया गया है । व्यवस्थापिका आवश्यक संशोधन करने का कार्य 

 

3.प्रशासनिक कार्य – 

व्यवस्थापिका कार्यपालिका पर नियंत्रण करने का महत्वपूर्ण कार्य करती है । संसदात्मक शासन व्यवस्था में कार्यपालिका व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी रहती है । इस तरह व्यवस्थापिका प्रशासनिक नियंत्रण का कार्य करती है । 

 

  1. राज्य व शासन की नीति का निर्धारण- 

राज्य को दिशा देने एवं नीति निर्धारण का कार्य व्यवस्थापिका करती है । कार्यपालिका द्वारा निर्धारित नीति को व्यवस्थापिका ही स्वीकृति प्रदान करती है । 

 

  1. वित्त सम्बन्धी कार्य – 

सरकार द्वारा निर्धारित करों को लगाने और करों को कम अथवा समाप्त करने तथा शासन के व्ययों को स्वीकृति प्रदान करने का कार्य व्यवस्थापिका द्वारा किया जाता है । इस तरह वह जनता से प्राप्त धन ( वित्त ) पर नियंत्रण रखती है । 

 

  1. विचार विमर्श का कार्य- 

सदन में प्रस्तुत विषयों एवं विविध समस्याओं पर समग्र दृष्टिकोण से सदस्यों द्वारा चर्चा की जाती है । कानून बनाने से पहले हर सम्बन्धित पक्ष पर विचार से चर्चा कर ली जाती है , जिससे विधि का निर्माण पूर्णतया जनता के हित में हो । 

 

  1. न्यायिक कार्य- 

कई देशों में व्यवस्थापिका न्याय सम्बन्धी कार्य भी करती है । राष्ट्रपति को व्यवस्थापिका ही महाभियोग द्वारा पद से हटा सकती है । अमेरिका में भी राष्ट्रपति पर लगाए गए महाभियोग का निर्णय वहाँ की व्यवस्थापिका करती है । 

 

  1. समिति और आयोगों का गठन – 

जिन विषयों पर बारीकी से विचार करने की आवश्यकता है , उन पर विचार करने के लिए विविध समितियों और आयोगों का गठन एवं अधिकारी की नियुक्ति करने का कार्य व्यवस्थापिका द्वारा किया जाता है । 

 

  1. विदेशनीति पर नियन्त्रण- 

अनेक देशों में व्यवस्थापिका की स्वीकृति के बिना संधियाँ और समझौतों को लागू नहीं किया जाता है । कई देशों में दूसरे देश से युद्ध करने के लिए भी व्यवस्थापिका की स्वीकृति लेनी होती है । 

 

  1. निर्वाचन सम्बन्धी कार्य- 

भारत में राष्ट्रपति का निर्वाचन संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है । अनेक देशों में व्यवस्थापिका निर्वाचन सम्बन्धी कार्य करती है । 

 

प्रश्न 5. लोकसभा अध्यक्ष के कार्य लिखिए । 

उत्तर – लोकसभा के कार्य- 

( 1 ) सदन की कार्रवाईयों की अध्यक्षता करना । 

( 2 ) सदन की कार्रवाई को संचालित करना । 

( 3 ) सदन में शांति – व्यवस्था स्थापित करना । 

( 4 ) कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं , यह निर्धारण करना । 

( 5 ) लोकसभा की समितियों का गठन करना । 

( 6 ) लोकसभा के सदस्यों के अधिकारों का संरक्षण करना । 

( 7 ) सदन में किसी विषय पर होने वाले विचार – विमर्श के लिए समय निर्धारित करना । 

 

प्रश्न 6. भारत के राष्ट्रपति की निर्धारित योग्यताएँ बताइए । 

उत्तर- भारत के राष्ट्रपति के लिए निर्धारित योग्यताएँ अधोलिखित हैं- 

( 1 ) वह भारत का नागरिक हो । 

( 2 ) उसकी आयु 35 वर्ष से कम न हो । 

( 3 ) वह लोक सभा सदस्य बनने की योग्यता हो 

( 4 ) वह केन्द्र या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो । 

 

प्रश्न 7. साधारण विधेयक और वित्त विधेयक में क्या अन्तर है ? 

उत्तर – विधेयक दो प्रकार के होते हैं- 

( 1 ) साधारण विधेयक 

( 2 ) वित्त विधेयक । साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तु किए जा सकते हैं , किन्तु वित्त विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति से लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं । यही दोनों में अन्तर है ।

 

प्रश्न 8. राज्यपाल की प्रमुख विधायी शक्तियाँ लिखिए । 

उत्तर- राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ निम्नलिखित हैं- 

 

( 1 ) राज्यपाल विधानसभा का अनिवार्य अंग होता है । यह विधानसभा की बैठकों को बुलाता है , बैठकों को स्थगित करता हैं तथा उन्हें विसर्जित करता है । मुख्यमंत्री के परामर्श पर विधानसभा को भंग कर सकता है । निर्वाचन के उपरांत और फिर प्रत्येक वर्ष वह विधानसभा के अधिवेशन के प्रारम्भ में अपना अभिभाषण देता है । वह आवश्यकतानुसार विधानमण्डलों को अपना संदेश भेज सकता है । 

 

( 2 ) विधान मण्डलों द्वारा स्वीकृत विधेयकों पर राज्यपाल की स्वीकृति अनिवार्य है । वित्त विधेयकों के अतिरिक्त राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को म . विधानसभा पुनर्विचार के लिए वापिस भेज सकता है । विधानसभा द्वारा पुनः विधेयक यदि पारित कर राज्यपाल को भेजा जाता है तो राज्यपाल को उस विधेयक पर स्वीकृति देना अनिवार्य है । 

 

( 3 ) अध्यादेश जारी करना- 

जब विधानसभा का अधिवेशन न चल रहा हो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकते हैं । राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेशों पर छः सप्ताह के भीतर विधानसभा की स्वीकृति अनिवार्य है । 

 

( 4 ) वित्तीय शक्तियाँ- 

राज्य का बजट प्रत्येक वर्ष राज्यपाल विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं । वह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत कराते हैं । 

 

( 5 ) अन्य शक्तियाँ- 

जब राज्यपाल को यह अनुभव होता है कि राज्य का प्रशासन संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चलना संभव नहीं हो रहा है तब वह राज्य में संविधान तंत्र की विफलता सूचना राष्ट्रपति को देता है । राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही राष्ट्रपति राज्य में संकटकाल लागू करता है । ऐसी अवस्था होने पर वह राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है ।

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