MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) आर्थिक विकास का परिणाम है

( i ) जीवन स्तर में सुधार 

( ii ) आर्थिक कल्याण में वृद्धि 

( iii ) जीवन प्रत्याशा में वृद्धि 

( iv ) उपर्युक्त सभी । 

 

( 2 ) देश की प्रतिव्यक्ति आय की गणना किस आधार पर की जाती है ? 

( i ) उस देश की जनसंख्या से 

( ii ) विश्व की जनसंख्या से 

( iii ) राज्यों की जनसंख्या से 

( iv ) अन्य देश की जनसंख्या से । 

 

( 3 ) प्रो. अमर्त्य सेन ने विकास का आधार माना है 

( i ) सम्पन्नता को 

( ii ) आत्मनिर्भरता को 

( iii ) जन – कल्याण को 

( iv ) विदेशी व्यापार को । 

 

( 4 ) विकसित देशों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है 

( i ) अतिअल्प 

( ii ) बिल्कुल नहीं 

( ii ) थोड़ा बहुत 

( iv ) बहुत अधिक । 

 

( 5 ) भारत में अब तक पूर्ण हुई पंचवर्षीय योजनाएँ – 

( i ) 5 

( ii ) 10 

( iii ) 15 

( iv ) 11 

 

उत्तर- ( 1 ) ( iv ) , ( 2 ) ( i ) , ( 3 ) ( iii ) , ( 4 ) ( iv ) , ( 5 ) ( ii ) 

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

 

( 1 ) आर्थिक विकास से जनता के … स्तर में वृद्धि होती है । 

( 2 ) इंडिया विजन- 2020 का प्रकाशन वर्ष … में हुआ था । 

( 3 ) जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचक का निर्माण … ने किया है । 

( 4 ) विश्व बैंक के अनुसार विकसित देश वह है , जिसकी प्रतिव्यक्ति आय … रु. प्रति वर्ष या उससे अधिक है । 

( 5 ) दसवीं योजना का कार्यकाल … से … तक था ।

 

उत्तर- 

( 1 ) जीवन 

( 2 ) 2003 

( 3 ) प्रो . मैरिस 

( 4 ) 45,000 

( 5 ) 1 अप्रैल 2002 , 31 मार्च 2007

 

एक वाक्य में उत्तर दीजिए

 

( i ) भारत और पाकिस्तान के मध्य सबसे अधिक उलझी हुई समस्या है ? 

( ii ) मानव विकास सूचकांक किस अन्तर्राष्ट्रीय संस्था ने तैयार किया है ? 

( iii ) भारतीय योजना आयोग का गठन कब किया गया था ? 

( iv ) भारत में आर्थिक नियोजन का प्रारम्भ कब किया ? 

( v ) राष्ट्रीय महत्व के कितने विषय संघीय सूची में शामिल किए गए हैं । 

 

उत्तर- 

( i ) कश्मीर की समस्या 

( ii ) संयुक्त राष्ट्र संघ 

( iii ) 15 मार्च , 1950 

( iv ) 1 अप्रैल , 1951 

( v ) 97

 

आर्थिक विकास और नियोजन अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. वणिकवाद के अनुसार आर्थिक विकास का क्या अर्थ है ? लिखिए । 

उत्तर- वणिकवाद के अनुसार सोने एवं चाँदी की प्राप्ति ही आर्थिक विकास है । 

 

प्रश्न 2. राष्ट्रीय आय की गणना किस समय अवधि में की जाती है ? लिखिए । 

उत्तर- राष्ट्रीय आय की गणना एक वर्ष की अवधि ( 1 अप्रैल से 31 मार्च ) के लिए जाती है । 

 

प्रश्न 3. मानव विकास सूचकांक की गणना किसके आधार पर की जाती है । लिखिए । 

उत्तर- मानव विकास सूचकांक की गणना जन्म के समय जीवन प्रत्याशा वयस्क साक्षरता दर एवं प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर की जाती है । 

 

प्रश्न 4. विश्व बैंक के अनुसार विकसित देशों की प्रतिव्यक्ति आय कितनी होनी चाहिए ? लिखिए । 

उत्तर- विश्व बैंक के अनुसार विकसित देशों की प्रतिव्यक्ति आय 45,000 रु . वार्षिक होना चाहिए । 

 

प्रश्न 5. आर्थिक विकास की माप के प्रमुख मापदण्ड कौन – कौन से हैं ? लिखिए । 

उत्तर- राष्ट्रीय आय , प्रतिव्यक्ति आय , जीवन स्तर , जन कल्याण , शिक्षा , रोजगार आदि आर्थिक विकास की माप के प्रमुख मापदण्ड हैं । 

 

आर्थिक विकास और नियोजन लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. राष्ट्रीय आय क्या है व इसे कैसे ज्ञात किया जाता है ? लिखिए । 

उत्तर- राष्ट्रीय आय- किसी भी देश या राष्ट्र की कुल आय को ‘ राष्ट्रीय आय ‘ कहा जाता है । राष्ट्रीय आय की गणना किसी राष्ट्र की एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को जोड़कर ज्ञात की जाती है । 

 

राष्ट्रीय आय के सम्बन्ध में निम्नलिखित बातें महत्वपूर्ण हैं- 

( 1 ) राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध किसी अवधि विशेष या वर्ष ( 1 अप्रैल से 31 मार्च ) में उत्पादित समस्त वस्तुओं एवं सेवाओं की मात्रा से है । 

( 2 ) राष्ट्रीय आय में सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की बाजार कीमतें सम्मिलित की जाती हैं । इसमें एक वस्तु की कीमत को एक ही बार गिना जाता है । 

( 3 ) इसमें विदेशों से प्राप्त आय को जोड़ा जाता है तथा विदेशियों द्वारा देश से प्राप्त आय को घटाया जाता है । 

 

प्रश्न 2. प्रतिव्यक्ति आय क्या है ? इसकी गणना का सूत्र लिखिए ।

उत्तर- किसी देश की राष्ट्रीय आय को जब उस देश की कुल जनसंख्या से भाग दे दिया जाये तो हमें प्रति व्यक्ति जो आय प्राप्त हो जाती है , उसे ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है- . प्रति व्यक्ति आय / राष्ट्रीय आय देश की कुल जनसंख्या प्रतिव्यक्ति आय हमें उस देश के निवासियों के जीवन स्तर की जानकारी प्रदान करती है । यदि किसी देश में प्रतिव्यक्ति आय में बढ़ोतरी हो रही है , तो इसका तात्पर्य है कि उस देश के निवासियों के जीवन स्तर में वृद्धि आ रही है , अर्थात् उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है । 

 

प्रश्न 3. मानव विकास संकेतक बनाने का मुख्य उद्देश्य लिखिए । 

उत्तर- विभिन्न देशों के मध्य विकास के स्तर की तुलना करने के लिए भौतिक एवं अभौतिक घटकों की सहायता से मानव विकास की गणना करना ही मानव विकास संकेतक का मुख्य उद्देश्य है । 

 

प्रश्न 4. भारत के विकसित एवं विकासशील राज्य कौन – कौन से हैं ? लिखिए । 

उत्तर- भारत के विकसित राज्य- पंजाब , महाराष्ट्र , हरियाणा , पश्चिम बंगाल , केरल , गुजरात , आन्ध्रप्रदेश , कर्नाटक , तमिलनाडु आदि हैं । भारत के विकासशील राज्य- उत्तरप्रदेश , मध्यप्रदेश , असम , उड़ीसा , राजस्थान , बिहार आदि हैं ।

 

प्रश्न 5. इण्डिया विजन 2020 क्या है ? लिखिए । 

उत्तर – इंडिया विजन – 2020 – 

भारतीय योजना आयोग ने जनवरी 2003 में इंडिया विजन -2020 के नाम से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया है । इस दस्तावेज के अनुसार भारत सन् 2020 तक विकसित देशों की श्रेणी में सम्मिलित हो जायेगा । फलतः देश से बेरोजगारी , गरीबी , निरक्षरता पूर्णतः दूर हो जाएगी । योजना आयोग का अनुमान है कि सन् 2020 तक देश की 135 करोड़ जनसंख्या बेहतर पोषित , अच्छे रहन – सहन के स्तर वाली , पूर्णतः स्वस्थ तथा अधिक औसत आयु वाली होगी । 

 

आर्थिक विकास और नियोजन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. आर्थिक विकास की प्राचीन एवं नवीन अवधारणा को समझाइए । 

उत्तर – आर्थिक विकास की प्राचीन अवधारणा – प्राचीन काल में वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास के अन्तर्गत भौतिक सम्पन्नता को विशेष स्थान प्राप्त था । जर्मनी एवं फ्रांस के ‘ वणिकवादी विचारक ‘ सोने एवं चाँदी की प्राप्ति को विकास का आधार मानते थे । समय के साथ – साथ विकास की अवधारणा भी बदलती रही । प्राचीन अर्थशास्त्री एडम स्मिथ का विचार था कि किसी देश में वस्तुओं तथा सेवाओं की वृद्धि ही आर्थिक विकास है । कार्ल मार्क्स ने समाजवाद की स्थापना को आर्थिक विकास माना है , परन्तु इन सबसे भिन्न जे.एस.मिल ने लोक कल्याण आर्थिक विकास के लिए सहकारिता के सिद्धान्त को अपनाने को आर्थिक विकास माना । आर्थिक विकास की नवीन अवधारणा – नवीन अर्थशास्त्रियों में पॉल एलवर्ट देश के उत्पादक साधनों के कुशलतम प्रयोग द्वारा राष्ट्रीय आय में वृद्धि को आर्थिक विकास मानते हैं 

 

जबकि विलियमसन और वैदिक का विचार है कि देश के निवासियों की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि आर्थिक विकास है । इनसे भिन्न डी . ब्राइट सिंह का विचार है कि यदि आय वृद्धि के साथ – साथ समाज कल्याण में भी वृद्धि होती है , तो वह आर्थिक विकास है । नोबल पुरस्कार से सम्मानित प्रो . अमर्त्य सेन ने भी आर्थिक कल्याण को विशेष महत्व दिया है । आर्थिक विकास को परिभाषित करते हुए मेयर एवं वाल्डविन ने लिखा है , ” आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है , जिसमें दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है । ” 

 

प्रश्न 2. विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्था में अंतर बताइए । 

उत्तर – 

क्र. विकसित अर्थव्यवस्था विकासशील अर्थव्यवस्था
(1) इस अर्थव्यवस्था में अर्थव्यवस्था बहुत ही उच्च स्तर पर होती है  इस अर्थव्यवस्था में अर्थव्यवस्था मध्य स्तर से उच्च स्तर की ओर प्रगतिशील होती है
(2) इस अर्थव्यवस्था में उद्योग – धंधे पूर्ण विकसित होते हैं इस अर्थव्यवस्था में नये उद्योग धंधे स्थापित होने की स्थिति होती है
(3) इस अर्थव्यवस्था में समाज में जीवन स्तर उच्च होता है इस अर्थव्यवस्था में समाज में जीवन स्तर सामान्य होता है
(4) इस अर्थव्यवस्था में विलासिता व भव्यता के दर्शन होते हैं इस अर्थव्यवस्था में जीवन साधारण होता है

 

प्रश्न 3. मानव विकास संकेतक का अर्थ बताते हुए इसके घटकों की व्याख्या कीजिए । 

उत्तर – विभिन्न देशों के विकास स्तर को मापने के लिए जो मापदण्ड संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अपनाये गये हैं , उन्हें मानव विकास संकेतक कहते हैं । मानव विकास संकेतकों में भौतिक एवं अभौतिक दोनों प्रकार के घटकों को सम्मिलित किया गया है । इनमें भौतिक घटक के रूप में सकल घरेलू उत्पाद और अभौतिक घटक के रूप में शिशु मृत्यु दर , जीवन की सम्भाव्यता और शैक्षणिक प्राप्तियाँ आदि को लिया गया है । स्थिति होती है । मानव विकास सूचक के निर्माण में जीवन के तीन आवश्यक मूलभूत घटकों का प्रयोग किया जाता है । ये घटक हैं- 

( 1 ) एक लम्बे और स्वस्थ जीवन के मापन हेतु जन्म के समय जीवन प्रत्याशा । 

( 2 ) वयस्क साक्षरता दर तथा कुल नामांकन अनुपात । 

( 3 ) प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद । मानव विकास सूचक की गणना करने के लिए सबसे पहले उपर्युक्त तीन घटकों के अलग – अलग सूचक तैयार किये जाते हैं । तदुपरांत उनका औसत ज्ञात करके उनके मूल्य को 0 से 1 के मध्य प्रदर्शित किया जाता है । सबसे अधिक विकसित देश का सूचक एक तथा सबसे अधिक पिछड़े देश का सूचक शून्य के निकट होता है । 

 

प्रश्न 4. आर्थिक नियोजन का अर्थ बताते हुए भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य बताइए । 

उत्तर- आर्थिक नियोजन से आशय – आर्थिक नियोजन का आशय एक ऐसी प्रक्रिया से है , जिसमें एक निर्धारित अवधि में सुनिश्चित एवं स्पष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आर्थिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है । इस प्रकार कहा जा सकता है कि आर्थिक नियोजन में दो बातें जरूरी होती हैं यथा-

 

( 1 ) पूर्व निर्धारित लक्ष्य , जिन्हें प्राप्त किया जाना है

( 2 ) निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु उपलब्ध साधन तथा उपयोग करने का ब्यौरा । आर्थिक नियोजन में सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि किस प्रकार समाज की अधिकतम सन्तुष्टि के लिए देश के संसाधनों का प्रयोग किया जाता है । नियोजन से पूर्व देश के आर्थिक संसाधनों का आकलन किया जाता है । इसमें घरेलू साधनों के साथ – साथ विदेशों से प्राप्त होने वाले साधनों को भी शामिल किया जाता है । इसके बाद आर्थिक लक्ष्यों का निर्धारण कर देश में उपलब्ध संसाधनों का श्रेष्ठतम प्रयोग करते हुए लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है । 

 

आर्थिक नियोजन के उद्देश्य – 

नियोजन का उद्देश्य आर्थिक विकास की गति को बढ़ाना है , ताकि जिस प्रगति को दीर्घकाल में प्राप्त किया जा सके , उसे नियोजन की सीमित अवधि में ही प्राप्त किया जा सके । प्रत्येक योजना के उद्देश्य तात्कालिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भिन्न – भिन्न रहे हैं , लेकिन समय योजना प्रक्रिया सामान्य दीर्घकालीन उद्देश्यों से प्रेरित रही है । ये उद्देश्य हैं 

 

  1. ऊँची विकास दर- 

जीवन स्तर में सुधार सभी पंचवर्षीय योजनाओं का उद्देश्य रहा है । इसलिए प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में ऊँची विकास दर व नीची जनसंख्या वृद्धि दर की कल्पना की जाती है , ताकि प्रति व्यक्ति आय में तेजी से वृद्धि हो । 

 

  1. सामाजिक न्याय – 

आय तथा सम्पत्ति की अत्यधिक असमानता सामाजिक तथा आर्थिक न्याय की विरोधी है । इसके लिए हर योजना में प्रयत्न किए गये हैं । सामाजिक न्याय सहित आर्थिक विकास हमारी योजनाओं का उद्देश्य है । 

 

  1. आत्मनिर्भरता- 

आत्मनिर्भरता से तात्पर्य है धीरे – धीरे विदेशी सहायता पर निर्भरता में कमी । विपरीत मानसून व अन्य कई राजनीतिक कारणों से पंचवर्षीय योजनाओं में वर्णित स्वावलम्बन का लक्ष्य अभी भी अप्राप्य है । 

 

प्रश्न 5. भारत के नियोजन की सफलताएँ एवं असफलताएँ लिखिए । 

उत्तर- भारत में नियोजन से प्रमुख सफलताएं निम्नलिखित हैं 

 

  1. राष्ट्रीय एवं प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि- 

भारत की राष्ट्रीय आय वर्ष 1950-51 में वर्तमान कीमतों पर केवल 9142 करोड़ रु . थी , जो वर्ष 2005-06 में बढ़कर 28,46,762 करोड़ रु . हो गई । इसी प्रकार प्रतिव्यक्ति आय इस अवधि में 255 रु . से बढ़कर 25,716 हो गई । इस प्रकार स्पष्ट है कि नियोजन की अवधि में राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय में तेजी से वृद्धि हुई है । 

 

  1. बचत व विनियोग दर में वृद्धि- 

आर्थिक विकास हेतु राष्ट्रीय आय के कुछ भाग को विनियोजित किया जाता है । इसके लिए प्रत्येक योजना में बचत व विनियोग के ऊँचे लक्ष्य निर्धारित किये गये थे , जिन्हें लगभग प्राप्त भी कर लिया गया है । चालू मूल्यों पर 1950-51 में सकल बचत व विनियोग दरें सकल राष्ट्रीय उत्पाद का केवल 8.9 व 8.7 प्रतिशत थीं , जो कि बढ़कर 2005-06 में क्रमशः 32.4 व 33.8 प्रतिशत हो गयी ।

 

  1. कृषि क्षेत्र में विकास- 

आर्थिक नियोजन के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में व्यापक वृद्धि हुई है । खाद्यान्नों का उत्पादन , जो 1950-51 में 508 लाख टन था , वह बढ़कर 2005-06 में 2083 लाख टन हो गया है । इस काल में हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप उन्नत बीजों , रासायनिक खादों , कीटनाशक दवाओं , सिंचाई सुविधाओं आदि को अपनाया गया । साथ ही कृषि क्षेत्र में आधारित संरचना का भी विकास हुआ है । 

 

  1. विद्युत् उत्पादन में वृद्धि- 

नियोजन काल में विद्युत उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि हुई । विद्युत उत्पादन , जो सन् 1950-51 में 5.1 अरब किलोवाट था , सन् 2005-06 में बढ़कर 623.2 अरब किलोवाट हो गया । योजना काल में देश में विद्युत उत्पादन में वृद्धि के साथ – साथ उपयोग में भी वृद्धि हुई । 1950-51 में प्रतिव्यक्ति विद्युत खपत 2.4 किलोवाट थी , जो वर्तमान में बढ़कर 83.6 किलोवाट हो गई । इसी प्रकार मार्च 2005 के अन्त तक देश के 85 प्रतिशत गाँवों का विद्युतीकरण किया जा चुका था । 

 

  1. परिवहन एवं संचार क्षेत्र में वृद्धि- 

योजना में परिवहन एवं संचार साधनों में काफी प्रगति हुई । 1950-51 में देश में 53.6 हजार किलोमीटर रेलमार्ग था , जो सन् 2005-06 में बढ़कर 63.3 हजार किलोमीटर हो गया । इसी प्रकार सन् 1950-51 में सड़कों की कुल लम्बाई 4.00 लाख किलोमीटर थी , जबकि आज इसकी लम्बाई 33.2 लाख किलोमीटर हो गई है । इसी प्रकार जल परिवहन एवं वायु परिवहन के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है । जहाँ तक संचार क्षेत्र का प्रश्न है , 1950-51 में देश में कुल 36,000 डाकघर थे , जिनकी संख्या आज बढ़कर 1,55,516 हो गयी है । 

 

  1. शिक्षा – 

योजनाओं के प्रारम्भ होने के समय देश में 27 विश्वविद्यालय थे , लेकिन आज इनकी संख्या 389 है । 1950-51 में देश की साक्षरता दर 16.6 प्रतिशत थी , जो 2001 में बढ़कर 64.8 प्रतिशत हो गयी । इसी प्रकार देश में प्राथमिक स्कूलों की संख्या 1950-51 में 2.3 लाख थी , जो आज बढ़कर 7,10 , लाख से अधिक हो गयी है । 1950-51 में 6 से 11 वर्ष तक उम्र के 42.6 प्रतिशत बच्चे स्कूल जाते थे , लेकिन आज यह प्रतिशत बढ़कर 98.31 हो गया है 1950-51 में 11 से 14 वर्ष की उम्र के 12.7 प्रतिशत बच्चे पढ़ने जाते थे , जिनका प्रतिशत आज बढ़कर 62.49 हो गया है । 1950-51 में 578 स्नातक तथा स्नातकोत्तर महाविद्यालय थे , लेकिन आज इनकी संख्या 46,796 है । 

 

  1. स्वास्थ्य – 

देश की स्वास्थ्य सेवाओं में भी योजना अवधि में विशेष प्रगति हुई । 1950-51 में अस्पतालों की कुल संख्या 9209 हजार थी , जो कि बढ़कर वर्ष 2005 में 27,770 लाख हो गयी । इसी – प्रकार देश में पंजीकृत डॉक्टरों की संख्या 1950-51 में 61.8 हजार थी , जो बढ़कर वर्ष 2005 में 6.56 लाख हो गई है । स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि के परिणामस्वरूप औसत जीवन काल , जो 1950-51 में 32.1 वर्ष था , 2006 में बढ़कर 65.4 वर्ष हो गया है । 

 

भारत में नियोजन की प्रमुख असफलताएँ निम्नलिखित हैं- 

 

  1. प्रतिव्यक्ति आय में धीमी प्रगति- 

भारत में आर्थिक नियोजन के बाद भी प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि बहुत ही धीमी गति से हुई है । भारत में लगभग 21 प्रतिशत जनसंख्या अभी भी गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है । 

 

  1. क्षेत्रीय असन्तुलन- 

नियोजन के फलस्वरूप देश में क्षेत्रीय असन्तुलन कम होना चाहिए था लेकिन उसमें कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है । आज भी उत्तरप्रदेश , उड़ीसा तथा बिहार आदिराज्य पिछड़े हुए हैं , जबकि महाराष्ट्र , तमिलनाडु , पश्चिम बंगाल , पंजाब , हरियाणा आदि राज्य तुलनात्मक रूप से विकसित श्रेणी में हैं । 

 

  1. मूल्य वृद्धि – 

नियोजन अवधि में मूल्यों में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है । थोक मूल्य सूचकांक 1993-94 के आधार पर बढ़कर दिसम्बर 2006 में 207.9 हो गया । अनुमान है कि नियोजन अवधि कीमतों में लगभग 27 गुनी से अधिक की वृद्धि हुई है । 

 

  1. बेरोजगारी में वृद्धि- 

आर्थिक नियोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बेरोजगारी में कमी करना था , लेकिन हर योजना के अन्त में बेरोजगारी बढ़ती ही गयी है जहाँ प्रथम योजना के प्रारम्भ में 33 लाख व्यक्ति बेरोजगार थे । वहीं वर्तमान में लगभग 4 करोड़ व्यक्तियों के बेरोजगार होने का अनुमान है ।

 

  1. आय व धन की असमानता में वृद्धि- 

आर्थिक नियोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य धन के केन्द्रीयकरण को समाप्त कर आर्थिक समानता को बढ़ाना रहा , लेकिन नियोजन के बावजूद धनी व्यक्ति अधिक धनी व गरीब और अधिक गरीब होता गया है । 

 

  1. सार्वजनिक उद्यमों की असफलता- 

देश में सार्वजनिक क्षेत्र में उद्यमों की संख्या 242 है । इनमें से अनेक उपक्रम हानि में चल रहे हैं । अतः सार्वजनिक उपक्रम आशा के अनुरूप परिणाम देने में असमर्थ रहे हैं । 

 

आर्थिक विकास और नियोजन अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. वस्तु विनिमय की प्रमुख समस्या क्या थी ? 

उत्तर- इस प्रणाली में सबसे बड़ी कठिनाई यह थी कि कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो एक व्यक्ति द्वारा उत्पादित वस्तु को स्वीकार करे एवं बदले में उसकी आवश्यकता की वस्तु उपलब्ध कराये । 

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