MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 16 ग्रामीण अर्थव्यवस्था व राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना-मध्य प्रदेश

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 16 ग्रामीण अर्थव्यवस्था व राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना-मध्य प्रदेश

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 16 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 16 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में रोजगार उपलब्ध कराया जाता है 

( अ ) 100 दिवस का 

( ब ) 150 दिवस का 

( स ) 200 दिवस का 

( द ) एक वर्ष का । 

 

( 2 ) सिंचाई से संबंधित योजना है 

( अ ) निर्मल नीर योजना 

( ब ) सहस्रधारा योजना 

( स ) वन्या उपयोजना 

( द ) भूमि शिल्प योजना । 

 

उत्तर- ( 1 ) ( अ ) , ( 2 ) ( अ ) । 

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

 

( 1 ) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य 

( 2 ) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत उन परिवार के सदस्यों को काम दिया जाता है , जिनके पास 

( 3 ) जॉब कार्ड धारक व्यक्ति को यदि रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सकता , तो उसे प्रदान किया जाता है । 

 

उत्तर- ( 1 ) स्थायी परिसम्पत्तियों , ( 2 ) रोजगार पत्र ( जॉब कार्ड ) , ( 3 ) बेरोजगारी भत्ता । 

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. केन्द्र सरकार ने काम का अधिकार लागू करने के लिए कौनसा अधिनियम बनाया है ? 

उत्तर- केन्द्र सरकार ने काम का अधिकार लागू करने के लिए ‘ राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम ‘ बनाया है । ‘ का सृजन करना है । ……..

 

प्रश्न 2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत किस प्रकार के श्रम का रोजगार दिया जाता है । 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अन्तर्गत ‘ अकुशल शारीरिक श्रम ‘ का रोजगार दिया जाता है । 

 

प्रश्न 3. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कुल आवेदकों में से कितनी महिलाओं को लाभ पहुंचाया जाता है ? 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत कुल आवेदकों में से एक तिहाई महिलाओं को लाभ पहुंचाया जाता है ? 

 

प्रश्न 4. जॉब कार्ड सम्बन्धी शिकायत का समाधान कौन करता है ? 

उत्तर – जॉब कार्ड सम्बन्धी शिकायत का समाधान ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है । 

 

प्रश्न 5. आवेदक को न्यूनतम मजदूरी का अतिरिक्त भुगतान कब किया जाता है ? 

उत्तर – रोजगार स्थल आवेदन के निवास स्थान से 5 किमी . की परिधि के बाहर हो , तब आवेदक को न्यूनतम मजदूरी का अतिरिक्त भुगतान किया जाता है । 

 

प्रश्न 6. बेरोजगारी भत्ता किसे दिया जाता है ? 

उत्तर – काम माँगने के दिन से 15 दिन तक अगर काम न मिले , तो आवेदक व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है । 

 

प्रश्न 7. सामुदायिक विकास मूलक कार्यों की किसी एक योजना का नाम बताइए । 

उत्तर – सामुदायिक विकास मूलक कार्य सम्बन्धी वृक्षारोपण की योजना ‘ वन्या उपयोजना ‘ है । 

 

लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के उद्देश्य बताइए । 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य अनलिखित है- 

( 1 ) इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत प्रत्येक परिवार के वयस्क व्यक्तियों को , जो अकुशल मानव श्रम करने हेतु तैयार हैं , एक वित्तीय वर्ष में कम – से – कम 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराना है । 

( 2 ) ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी परिसम्पत्तियों का सृजन करना । 

 

प्रश्न 2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना में रोजगार की उपलब्धता के विषय में बताइए । 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना में रोजगार की उपलब्धता ‘ प्रथम आओ – प्रथम पाओ ‘ के सिद्धान्त पर आधारित है । इस योजना में रोजगार या तो क्षेत्र में पहले से चल रहे रोजगार मूलक कार्यों में दिया जाता है , अथवा पंचायत के स्तर पर शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट में से कार्य आरंभ करते हुए दिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य एजेंसी द्वारा क्रियान्वित किए जा रहे कार्य में भी रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है । 

 

प्रश्न 3. सामुदायिक विकास मूलक कार्य सम्बन्धी योजनाएँ कौन – कौनसी हैं ? बताइए । 

उत्तर- 

 

प्रश्न 4. जॉब कार्ड क्या है ? उसे कैसे प्राप्त किया जाता है ।

उत्तर- जाब कार्ड- राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 के अंतर्गत रोजगार प्राप्त करने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा पंजीयत परिवारों को एक कार्ड जारी किया जाता है , जिसे जॉब कार्ड या ‘ रोजगार पत्र ‘ कहा जाता है । यह रोजगार – पत्र ( जॉब कार्ड ) जारी होने से 5 वर्ष तक वैध रहता है । इस कार्ड में परिवर्तन हेतु ग्राम पंचायत सक्षम होती है । जॉब कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया- जॉब कार्ड प्राप्त करने हेतु निर्धारित प्रारूप में ग्राम पंचायत में परिवार की सम्पूर्ण जानकारी देकर पंजीयन कराया जाता है तथा ग्राम पंचायत सूचनाओं की जाँच करके जॉब कार्ड जारी करती है । 

 

प्रश्न 5. बेरोजगारी भत्ता प्राप्ति की प्रक्रिया बताइए । 

उत्तर – काम माँगने वाले व्यक्ति को यदि काम मांगने के दिन से 15 दिन तक अगर काम न मिले , तो आवेदन करने वाले व्यक्ति को बेरोजगारी – भत्ता पाने की पात्रता होती है । अतः आवेदक इसकी सूचना देकर भत्ता प्राप्त कर सकता है । 

 

प्रश्न 6. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में ग्राम पंचायत की भूमिका को स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में ग्राम पंचायत निम्नलिखित कार्यों के द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है – 

( 1 ) परिवारों का पंजीकरण एवं जिन परिवारों का नाम लिखा हुआ है , उनको जॉबकार्ड देना । 

( 2 ) लोगों द्वारा रोजगार के लिए दिए गए आवेदन – पत्र लेना एवं उन्हें काम कहाँ मिलेगा , यह जानकारी देना । 

( 3 ) ग्रामसभा के फैसले के अनुसार कार्यों के प्रस्ताव तैयार करना । 

( 4 ) जो काम होना है , उस काम का पूरा एस्टीमेट सब इंजीनियर द्वारा तैयार करवाना । 

( 5 ) निर्माण कार्य के एस्टीमेट में मजदूरी , सामग्री एवं अन्य मद में होने वाले अनुमानित खर्चे का उल्लेख करना । 

( 6 ) जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी / कार्यक्रम अधिकारी द्वारा मंजूर काम शुरू करवाना । 

( 7 ) अपने क्षेत्र में किए जा रहे कार्यो की निगरानी करना । 

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से आशय , उद्देश्य एवं विशेषताएँ बताइए । 

उत्तर- 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना से आशय- 

भारत सरकार ने ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने , माँग पर राहत कार्य या रोजगार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण अंचल आजीविका के स्थाई स्रोत विकसित करने के लिए एक योजना लागू की है , जिसे ‘ राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना ‘ कहा जाता है । 

 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य- 

 

( 1 ) इस योजना का उद्देश्य है – 

ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत प्रत्येक परिवार के वयस्क व्यक्तियों को , जो अकुशल मानव श्रम करने हेतु तैयार हैं , एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराना । 

( 2 ) ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी परिसम्पत्तियों का सृजन करना । 

 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना , मध्यप्रदेश की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं 

 

( 1 ) योजना में रोजगार की उपलब्धता प्रथम आओ , प्रथम पाओ के सिद्धान्त पर आधारित है । 

 

( 2 ) रोजगार या तो क्षेत्र में पहले से चल रहे रोजगार मूलक कार्यों में दिया जाता है , अथवा पंचायत स्तर पर शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट में से कार्य आरंभ करते हुए दिया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी अन्य एजेंसी द्वारा क्रियान्वित किए जा रहे कार्य में भी रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है । 

 

( 3 ) रोजगार प्रदान करते समय ध्यान रखा जाता है कि रोजगार आवेदक के निवास के 5 कि.मी. की परिधि में ही हो । 5 कि.मी. की परिधि में रोजगार न होने की स्थिति में जनपद स्तर पर रोजगार प्रदान किया जाता है और तब परिवहन व्यय आदि हेतु आवेदक को न्यूनतम मजदूरी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त भी भुगतान किया जाता है । 

 

( 4 ) महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में प्राथमिकता देते हुए आवेदकों में से एक – तिहाई महिलाओं को लाभान्वित कराया जाना योजना में प्रावधानित है । 

 

( 5 ) निःशक्तजनों , अपंग , बुजुर्ग व्यक्ति आदि आवेदन करते हैं , तो उनकी योग्यता व दक्षता के अनुसार उन्हें काम दिया जाता है , अर्थात् सभी के लिए रोजगार का प्रावधान हैं । 

 

( 6 ) योजना के अंतर्गत कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को राज्य शासन द्वारा निर्धारित अथवा सक्षम अधिकारी द्वारा कृषि श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अंतर्गत निर्धारित अधिसूचित मजदूरी पाने का हक है । महिला एवं पुरुषों में मजदूरी भुगतान में कोई भेद – भाव नहीं किया जाता । मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक अथवा अधिकतम पाक्षिक आधार पर किया जाता है । 

 

( 7 ) काम के दौरान चोट लगने पर बिना पैसे के इलाज और अपंग व मृत्यु होने पर मुआवजे का प्रावधान है । 

 

( 8 ) गाँव में जल , जंगल , जमीन से जुड़े काम और खेती तथा सड़क बनाने एवं सुधारने आदि के काम होंगे । ठेकेदार से काम कराने पर रोक रहेगी । 

 

( 9 ) योजना के क्रियान्वयन में ठेकेदारी प्रथा प्रतिबंधित है । संरचना की सुरक्षा एवं गुणवत्ता के निर्धारित मापदण्डों को सुनिश्चित करते हुए मानव – श्रम के स्थान पर कार्य करने वाली मशीनों का प्रयोग प्रतिबंधित होता है । 

 

( 10 ) योजना में पारदर्शिता एवं आमजन की भागीदारी बढ़ाने हेतु सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था है । 

 

( 11 ) गाँव में काम की देखरेख एवं निगरानी के लिए एक सर्तकता एवं मूल्यांकन समिति होती है । यह समिति काम की निगरानी एवं देखरेख करती है । ग्रामसभा गाँव में कराए गए हर काम की जाँच पड़ताल करेगी , अर्थात् क्या काम हुए , काम में कितने मजदूरों ने काम किया , सबको मजदूरी मिली की नहीं , आदि बातों पर ग्रामसभा में बातचीत होती है । 

 

प्रश्न 2. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना क्या है ? उसका महत्व स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना- 

ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने , माँग पर राहत कार्य रोजगार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण अंचलों में आजीविका के स्थाई स्रोत विकसित करने हेतु सरकार ने इस योजना को आरंभ किया है । इस योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार के वयस्क व्यक्तियों को , जो अकुशल मानव – श्रम करने हेतु तैयार हैं , एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है । यदि काम माँगने के 15 दिन तक आवेदक को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है , तो उसे बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान दिया गया है । साथ ही कई अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की गई हैं । 

 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना का महत्व इस प्रकार है – 

 

( 1 ) यह ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी , बेरोजगारी एवं भुखमरी की समस्या के समाधान में सहायक है । 

( 2 ) ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करने में सहायक है । 

( 3 ) महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आर्थिक सम्पन्नता प्रदान करने में सहायक है । 

( 4 ) ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी परिसम्पत्तियों का निर्माण सम्भव हुआ है । समाज के निम्न आय वर्ग परिवारों की आर्थिक स्थिति के सुधार में सहायक है और उनकी परिसम्पत्तियों में वृद्धि करने में सहायक है । 

( 5 ) पंचायती राज संस्थाएँ- ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायतें सक्रिय एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती हैं । 

( 6 ) एक ऐसी ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था विकसित करने में सहायक है , जो शक्ति संतुलन समता पर आधारित होगी । 

 

प्रश्न 3. सामाजिक अंकेक्षण का आशय एवं महत्व समझाइए । 

उत्तर – 

 

क्र. कार्य योजनाएं
(1) जल संरक्षण एवं संवर्द्धन शैल पर्ण योजना
(2) वृक्षारोपण वन्या उपयोजना
(3) नहर निर्माण सहस्रधारा योजना
(4) सिंचाई निर्मल नीर योजना

 

सामाजिक अंकेक्षण से आशय – 

अंकेक्षण वह प्रक्रिया होती है , जिसके द्वारा कराए गए कार्यों का एवं उस पर किए गए व्यय विवरण की जाँच की जाती है । राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के सामाजिक अंकेक्षण के अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर किये गये कार्यों , भुगतानों के विवरण , कार्य में कार्यरत मजदूरों की संख्या एवं सामग्री का विवरण सम्मिलित होता है । यदि किसी कार्य की जाँच का प्रावधान न हो , तो कार्य में शिथिलता आ जाती है तथा वित्तीय हिसाब – किताब में गड़बड़ियाँ , भ्रष्टाचार एवं अनियमित ताओं की संभावना बढ़ जाती है । लोगों की अज्ञानता का कई स्वार्थी लोग अनुचित लाभ उठाने लगते हैं । अतः भ्रष्टाचार , अनियमितताओं एवं योजना के क्रियान्वयन में शिथिलता से बचने के लिए योजना का सामाजिक अंकेक्षण एक अनिवार्य आवश्यकता होती है । 

 

अंकेक्षण का महत्व निम्नानुसार है 

 

  1. योजना में पारदर्शिता लाना- 

पारदर्शिता से आशय है कि योजना सम्पूर्ण तथ्यों की जानकारी सभी को हो । कोई भी बात जनता से छुपी न रहे । पारदर्शिता के कारण जो कुछ होता है , वह जनता के समक्ष खुली किताब के रूप में होता है । अतएव न तो जनता अंधकार में रहती है , और न ही योजना के क्रियान्वयन में कदाचरण का भय रह जाता है ।

 

  1. आमजन की भागीदारी बढ़ाने में सहायक – 

सामाजिक अंकेक्षण से योजना में आम लोगों की भागीदारी बढ़ती है । इसमें लक्षित समूह के साथ समूह – चर्चा एवं व्यक्तिगत साक्षात्कार के द्वारा योजना के क्रियान्वयन का विवरण प्राप्त करने का प्रावधान है । योजना सम्बन्धी कार्यों के दस्तावेजों की पुष्टि सभा में उपस्थित मजदूरों से कराने का प्रावधान हैं । साथ ही अनियमितताओं के लिखित नोट पर सम्बन्धित मजदूरों के हस्ताक्षर भी लिए जाते हैं । इस प्रकार सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया इस प्रकार रखी गई है कि योजना में आम ग्रामीण नागरिकों की भागीदारी बढ़ जाती है और वे योजना के प्रति सजग व सतर्क हो जाते हैं । 

 

  1. उत्तरदायित्व का बोध कराने में सहायक – 

ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायतों को योजना के क्रियान्वयन का भार सौंपा गया है । मजदूरों की भागीदारी का प्रावधान भी रखा गया है । अतः सामाजिक अंकेक्षण उन्हें उनके उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए जागरूक बनाता है । 

 

  1. अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने में सहायक- 

सामाजिक अंकेक्षण लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने में सहायक होता है व उन्हें उनके अधिकारों का उपयोग करने में सक्षम बनाता है । 

 

  1. योजना को प्रभावशाली बनाने में सहायक – 

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में सामाजिक अंकेक्षण की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है । अंकेक्षण के कारण कार्यकर्ता में काम को ठीक से एवं समय पर पूरा करने का भय सा रहता है अथवा भय के स्थान पर कार्य को सही ढंग से निर्धारित अवधि में पूरा कर दिखाने का एक उत्साह बना रहता है व योजना का क्रियान्वयन उचित ढंग से होने लगता है 

 

  1. अनियमितताओं को नियंत्रित करने में सहायक- 

अंकेक्षण का सर्वाधिक महत्व योजना के उचित क्रियान्वयन एवं अनियमितताओं को नियंत्रित करने में है । समय – समय पर इनका अंकेक्षण होने से कार्यकर्ताओं को मजदूरों की संख्या , कार्य एवं कार्य के प्रकार , कार्यों पर किए गए व्यय राशि का सम्पूर्ण विवरण रखना पड़ता है , जिनकी अंकेक्षण के माध्यम से जांच की जाती है । जांच में खरा उतरना कर्ताधर्ताओं की जिम्मेवारी होती है । इसमें योजना का लाभ जिसे मिलना चाहिए , उसी को मिलता है । इससे योजना सफल होती है । 

 

प्रश्न 4. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में शिकायत निपटाने हेतु विभिन्न स्तरों पर की गई व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना में शिकायत निपटाने हेतु निम्न स्तरों पर व्यवस्था की गई है – 

 

  1. पंचायत स्तर पर- 

इस योजना में ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक शिकायत पुस्तिका रखी जाती है । कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत इस पुस्तिका में दर्ज करा सकता है । हर छह माह में ग्रामसभा किए गए कार्यों की जाँच पड़ताल करती है । कोई गड़बड़ी होने पर ग्रामसभा प्रस्ताव पास कर अनुविभागीय अधिकारी ( एस.डी.एम. ) को भेजती है । शिकायत प्राप्त होने पर अनुविभागीय अधिकारी जाँच समिति का गठन करता है । समिति में उसी पंचायत का एक पंच , जो निर्माण एवं विकास समिति का सदस्य ना हो , जनपद का सब – इंजीनियर और अनुविभागीय अधिकारी द्वारा नामांकित एक सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य के रूप में शामिल होता है । उस पंचायत क्षेत्र के जनपद सदस्य और संबंधित विभाग के ब्लाक स्तरीय अधिकारी भी समिति में रहते हैं । जाँच की रिपोर्ट मिलने के बाद उसे सचिव द्वारा ग्रामसभा में पढ़कर सुनाया जाता है । यदि ग्रामसभा तय करती है , तो प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी द्वारा समाप्त किया जा सकता है । यदि ग्रामसभा मानती है कि गड़बड़ी हुई है , तो वह अनुभागीय अधिकारी को कार्रवाई की अनुशंसा करती है । अनुविभागीय अधिकारी द्वारा पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 , 89 , 92 या 100 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है । 

 

  1. जनपद स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी ( सीईओ जनपद पंचायत ) की शिकायत पाई जाने पर जिला कार्यक्रम समन्वयक ( कलेक्टर ) जाँच समिति गठित करता है । जाँच समिति अपनी रिपोर्ट जिला कार्यक्रम समन्वय को देती है और कोई कर्मचारी दोषी पाए जाने पर जिला कार्यक्रम समन्वयक स्वयं अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजता है ।

 

  1. जिला पंचायत स्तर पर- 

जिला कार्यक्रम समन्वयक ( कलेक्टर ) अथवा अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होने पर संभाग आयुक्त एक जांच समिति का गठन करता है । संबंधित व्यक्ति के दोषी पाए जाने पर संभाग आयुक्त स्वयं अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हैं , अथवा संबंधित विभाग के समक्ष अधिकारी को भेजते हैं । 

 

  1. राज्य स्तर पर- 

राज्य स्तर पर शिकायतों का निपटारा मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद् करता है ।

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