MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 18 अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 18 अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 18 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) जैसे – जैसे अर्थव्यवस्था विकसित होती है , राष्ट्रीय आय में तृतीयक क्षेत्र का अंश 

( i ) बढ़ता जाता है । 

( ii ) घटता जाता है । 

( iii ) बढ़ता है तत्पश्चात् घटता है । 

( iv ) घटता है तत्पश्चात् बढ़ता है ।

 

( 2 ) बाजार के विस्तार में सहायक होते हैं 

( 6 ) परिवहन के साधन 

( ii ) संचार के साधन 

( iii ) बैंक एवं वित्तीय संस्थाएँ 

( iv ) उपर्युक्त सभी । 

 

( 3 ) कृषि क्षेत्र सम्मिलित हैं 

( i ) प्राथमिक 

( ii ) द्वितीयक 

( iii ) तृतीयक 

( iv ) द्वितीयक एवं तृतीयक दोनों

 

( 4 ) सेवा क्षेत्र रोजगार प्रदान करता है 

( i ) प्रत्यक्ष रूप से 

( ii ) अप्रत्यक्ष रूप से 

( iii ) प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप से 

( iv ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

( 5 ) सेवा क्षेत्र के निरन्तर विकास का कारण है  

( i ) सरकारी हस्तक्षेप 

( ii ) कृषि एवं उद्योगों का विकास 

( iii ) सोच में परिवर्तन 

( iv ) उपर्युक्त सभी 

 

उत्तर- ( 1 ) ( i ) , ( 2 ) ( iv ) , ( 3 ) ( i ) , ( 4 ) ( iii ) , ( 5 ) ( iv )

 

रिक्त स्थानों की कीजिए 

 

( क ) अर्थव्यवस्था का … क्षेत्रों में विभाजन किया गया है । 

( ख ) सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का …. क्षेत्र होता है ।

( ग ) वर्ष 2005-06 में सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान … प्रतिशत था । 

( घ ) शिक्षा एवं स्वास्थ्य … अधोसंरचना के अंग हैं । 

( ङ ) ऊर्जा आयोग का गठन मार्च … में किया गया । 

 

उत्तर- 

( क ) तीन

( ख ) तृतीयक

( ग ) 54.2

( घ ) सामाजिक 

( ङ ) 1950

 

सत्य / असत्य को स्पष्ट कीजिए

 

( 1 ) विकसित देशों में अधिकांश जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र से जुड़ी रहती है ।

( 2 ) भारत में रेलवे प्रणाली का प्रारम्भ 1837 में हुआ था । 

उत्तर- 

( 1 ) असत्य 

( 2 ) असत्य

 

सही जोड़ी बनाइए 

 

अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. देश की कुल जनसंख्या का वह भाग , जो प्रत्यक्ष रूप से उत्पादक क्रियाओं में सहयोग करता है , क्या कहलाता है ? 

उत्तर – देश की कुल जनसंख्या का वह भाग , जो प्रत्यक्ष रूप से उत्पादक क्रियाओं में सहयोग करता है , कार्यशील जनसंख्या कहलाता है । 

 

प्रश्न 2. कार्यशील जनसंख्या का व्यावसायिक वितरण का प्रतिशत किस प्रकार का रहता है ? 

उत्तर – कार्यशील जनसंख्या का सर्वाधिक प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्र में , शेष का अधिकांश प्रतिशत द्वितीयक क्षेत्र में एवं शेष तृतीयक क्षेत्र में वितरित रहता है । 

 

प्रश्न 3. अर्थव्यवस्था के उस क्षेत्र का नाम बताइए , जो कृषि एवं उद्योग के संचालन में सहायता पहुँचाता है ? 

उत्तर- अर्थव्यवस्था का सेवा क्षेत्र ( तृतीयक क्षेत्र ) कृषि एवं उद्योग के संचालन में सहायता पहुंचाता है । 

 

प्रश्न 4. डॉक्टर , शिक्षक , नाई , धोबी , वकील आदि की सेवाएँ किस प्रकार के कार्य क्षेत्र में आती है ? 

उत्तर- डॉक्टर , शिक्षक , नाई , धोबी , वकील आदि की सेवाएँ तृतीयक क्षेत्र ( सेवा क्षेत्र ) में आती हैं । 

 

प्रश्न 5. सेवा क्षेत्र क्या है ? 

उत्तर – वह क्षेत्र , जो अपनी सेवाओं से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादन प्रक्रिया को सहयोग करता है , सेवा – क्षेत्र कहलाता है । जैसे- परिवहन एवं संचार ।

 

अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था के क्षेत्र एवं राष्ट्रीय आय में क्या सम्बन्ध हैं ? लिखिए । 

उत्तर- अर्थव्यवस्था के क्षेत्र एवं राष्ट्रीय आय में घनिष्ठ सम्बन्ध है । जब अर्थव्यवस्था के प्राथमिक , द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र विकसित होते हैं , तो अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है व राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है । इन क्षेत्रों के कमजोर होने से राष्ट्रीय आय भी कम हो जाती है । अतः अर्थव्यवस्था के क्षेत्र एवं राष्ट्रीय आय परस्पर सम्बन्धित हैं । 

 

प्रश्न 2. अर्थव्यवस्था के प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र को उदाहरण की सहायता से समझाइए । 

उत्तर- 

अर्थव्यवस्था का प्राथमिक क्षेत्र- 

प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप आधारित गतिविधियों को प्राथमिक क्षेत्र ‘ कहा जाता है । जैसे- कृषि , वन , पशुपालन , खनिज , मछली पालन आदि प्राकृतिक क्षेत्र में आते हैं । उदाहरण के लिए , कृषि प्राथमिक क्षेत्र है , क्योंकि फसल उत्पादन के लिए मुख्यतः प्राकृतिक कारकों , जैसे – मिट्टी , वर्षा , सूर्य का प्रकाश , वायु आदि पर निर्भर रहना पड़ता है । 

 

अर्थव्यवस्था का द्वितीयक क्षेत्र – 

द्वितीयक क्षेत्र वह क्षेत्र है , जिसमें प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के माध्यम से अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है । जैसे- मशीन निर्माण , सीमेन्ट निर्माण , कपड़ा निर्माण आदि । उदाहरण के लिए- मशीन निर्माण को द्वितीयक क्षेत्र में शामिल किया जाता है , क्योंकि प्राकृतिक उत्पाद लोहे पर विनिर्माण क्रिया कर उसे मशीनों में परिवर्तित किया जाता है । 

 

प्रश्न 3. सेवा क्षेत्र के कृषि एवं राष्ट्रीय आय में योगदान की विवेचना कीजिए । 

उत्तर – 

सेवा क्षेत्र का कृषि में योगदान – 

सेवा क्षेत्र का कृषि के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है । निर्धन कृषकों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने का कार्य सेवा क्षेत्र द्वारा ही किया जाता है । इसके अन्तर्गत वर्षा बीमा योजना , फसल बीमा योजना , कृषि आय बीमा योजना , तथा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना आदि द्वारा कृषि की जोखिमों को कम किया जाता है । साथ ही सेवा क्षेत्र द्वारा कृषकों को उन्नत खाद , बीज आदि के क्रय हेतु पूँजी उपलब्ध करायी जाती है । इसके अतिरिक्त फसल उत्पादन को सुरक्षित रखने में भी सेवा – क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहता है । सेवा – क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में योगदान- सेवा क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में महत्वपूर्ण योगदान है । जैसे जैसे सेवा – क्षेत्र का विस्तार होता जाता है , राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती जाती है । अतः जब सेवा – क्षेत्र का विकास होता है , तो आर्थिक विकास होता है व राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है । 

 

प्रश्न 4. भारत में सेवा – क्षेत्र के विकास के प्रमुख कारण स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर- भारत में सेवा क्षेत्र के विकास के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं- 

( 1 ) स्वतन्त्रता पश्चात् भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया । इससे सेवा – क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिला । 

( 2 ) पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र के विकास के कारण सेवा – क्षेत्र की मांग बढ़ी व सेवा – क्षेत्र के विकास को बल मिला । 

( 3 ) तेजी से बढ़ते शहरीकरण व आधुनिकीकरण ने सेवा – क्षेत्र के विस्तार में सहयोग प्रदान किया । 

( 4 ) वैश्वीकरण ने भारतीयों पर पश्चिमी देशों की विचारधारा का प्रभाव डाला , जिससे सेवा – क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिला । 

 

प्रश्न 5. अधोसंरचना के प्रकारों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- अधोसंरचना के अंतर्गत सम्मिलित क्रियाओं के आधार पर अधो – संरचना को दो भागों में बाँटा गया है 

 

  1. आर्थिक अधोसंरचना – 

अधोसंरचना , जो मुख्यतः शक्ति , यातायात एवं दूर संचार से संबंधित होती है , को आर्थिक अधोसंरचना कहा जाता है । रेल , सड़क , बन्दरगाह , हवाई अड्डे , बाँध , विद्युत केन्द्र आदि को आर्थिक संरचना के अन्तर्गत रखा जाता है । आर्थिक विकास में इनका महत्वपूर्ण स्थान होता है , इसीलिए इन्हें बुनियादी आर्थिक सुविधाएँ भी कहा जाता है । 

 

  1. सामाजिक अधोसंरचना – 

सामाजिक अधोसंरचना मानव संसाधन का विकास करने एवं मानव पूँजी निर्माण करने में सहायक होती है । शिक्षा , स्वास्थ्य , चिकित्सा आदि इसके अंग होते हैं । इनसे समाज को कुशल , निपुण एवं स्वस्थ जनशक्ति प्राप्त होती है । इससे कार्यक्षमता बढ़ती है , जिससे प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र में उत्पादन तेजी से बढ़ता है । फलतः अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास होता है । 

 

प्रश्न 6. भारतीय सेवाओं का विश्व में क्या योगदान है ? लिखिए । 

उत्तर- भारतीय सेवाओं का विश्व में निम्नलिखित योगदान रहा है 

 

  1. कम्प्यूटर साफ्टवेयर सेवाएँ- 

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कम्प्यूटर के क्षेत्र में काफी उन्नति की है । बैंगलौर , हैदराबाद , पूना एवं मुम्बई कम्प्यूटर के प्रमुख केन्द्र हैं , जहाँ पर निर्यात हेतु बड़ी संख्या में साफ्टवेयर तैयार किए जाते हैं । भारत में साफ्टवेयर का निर्यात विश्व के अनेक देशों में किया जाता है । अमेरिका , इंग्लैण्ड , फ्रांस , जर्मनी जैसे विकसित देशों में भारतीय कम्प्यूटर साफ्टवेयर विशेष लोकप्रिय हैं । 

 

  1. संचार सेवाएँ- 

संचार सेवाओं के क्षेत्र में भी भारत विकसित देशों के समकक्ष है और दूर संचार सेवाओं का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है । अब भारत अनेक देशों को दूर संचार सेवाओं के विकास हेतु सहयोग दे रहा है । मालदीव के डिजिटल चार्ट्स का भारत द्वारा आधुनिकीकरण किया गया है , तथा एक दूर संवेदी इकाई की स्थापना की गई है । नेपाल में दूरसंचार सेवाओं के लिए ‘ यूनाइटेड टेलीकॉम ‘ के नाम से एक संयुक्त कम्पनी का गठन किया गया है । 

 

  1. बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएँ- 

30 जून , 2005 तक भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के 8 एवं निजी क्षेत्र के 2 बैंक ने 42 देशों में अपनी शाखाएं खोली हैं । इनमें स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया , बैंक ऑफ बड़ौदा एवं बैंक ऑफ इण्डिया प्रमुख हैं । इस प्रकार बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं से भी भारत को लाभ हो रहा है । 

 

  1. तकनीकी एवं परामर्श सेवाएँ- 

भारत ने अनेक क्षेत्रों में तकनीकी एवं प्रबन्धकीय कुशलता भी प्राप्त की है । फलतः भारत अनेक विकासशील एवं पिछड़े देशों को रेलवे लाईन के निर्माण , सड़क निर्माण , कारखानों के निर्माण में तकनीकी एवं परामर्श सेवाएं दे रहा है । ईरान , अफगानिस्तान , म्यांमार , भूटान , नेपाल , मालदीव एवं अफ्रीका के कई देशों में बुनियादी संरचना से सम्बन्धित परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी भारत ने ली है । 

 

प्रश्न 7. ऊर्जा एवं परिवहन के महत्व की संक्षेप में व्याख्या कीजिए । 

उत्तर – ऊर्जा का महत्व – 

औद्योगीकरण के लिए प्राथमिक आवश्यकता ऊर्जा की होती है । उद्योग में लगी मशीने ऊर्जा द्वारा संचालित होती हैं । ऊर्जा के प्रमुख संसाधन कोयला , खनिज तेल , जल विद्युत आदि हैं । इसके अतिरिक्त अन्य साधन परमाणु ऊर्जा , ज्वारीय ऊर्जा , पवन ऊर्जा , भूतापीय ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा है । आज भारी मशीनें , इस्पात , उद्योग , वायुयान , जलयान , मोटर वाहन , रेलगाड़ियाँ आदि के संचालन के लिए कोयला , पेट्रोल एवं विद्युत की सर्वाधिक महत्ता । यदि भारत ऊर्जा के पर्याप्त साधन विकसित कर सका , तो यह विश्व के सर्व प्रमुख औद्योगिक राष्ट्रों में से एक होगा । 

 

परिवहन का महत्व- 

आधुनिक औद्योगिक समाज के लिए परिवहन के साधन पहली आवश्यकता बन चुके हैं । इन साधनों में सबसे सरल , किन्तु प्रभावशील साधन ‘ सड़कें हैं । ये भारतीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ मानी जाती हैं , क्योंकि भारत के सभी क्षेत्रों में जितना सड़क साधनों का जाल बिछा है , उतना अन्य साधनों का नहीं । सड़कों के द्वारा कच्चे तथा तैयार माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से और कम समय में भेजा जाता है । सड़क परिवहन के द्वारा कच्चा माल अलग – अलग फैक्ट्रियों से तैयार होकर बाजार में पहुंचाया जाता है । भारत की अर्थव्यवस्था आज भी सड़क परिवहन पर निर्भर हैं , अतः सड़कों को भारतीय अर्थव्यवस्था जीवन रेखा कहना युक्ति संगत है । भारत में सड़कों की लम्बाई 33 लाख किमी . है । इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय राजमार्ग , राज्य की सड़कें तथा कच्ची सड़कों आदि से देश का 66 % व्यापार व्यवसाय सड़क परिवहन से होता है । 

 

अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था को क्षेत्रों में बाँटने की आवश्यकता क्यों होती है ? अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को ठीक से समझने के लिए उसे क्षेत्रों में बाँटने की आवश्यकता होती है । अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है –

 

  1. प्राथमिक क्षेत्र- 

प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से आधारित गतिविधियों को प्राथमिक क्षेत्र कहा जाता है । उदाहरण के लिए , कृषि को लिया जा सकता है । फसलों को उपजाने के लिए मुख्यत : प्राकृतिक कारकों जैसे- 

मिट्टी , वर्षा , सूर्य का प्रकाश , वायु आदि पर निर्भर रहना पड़ता है । अतः कृषि उपज एक प्राकृतिक उत्पाद है । इसी प्रकार वन , पशुपालन , खनिज आदि को भी प्राथमिक क्षेत्र के अन्तर्गत लिया जाता है । संक्षेप में कहा जा सकता है कि जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं , तो इसे प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधियाँ कहा जाता है । 

 

  1. द्वितीयक क्षेत्र – 

इस क्षेत्र की गतिविधियों के अन्तर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के . माध्यम से अन्य रुपों में परिवर्तित किया जाता है । 

उदाहरण के लिए- लोहे से मशीन बनाना या कपास से कपड़ा बनाना आदि प्राथमिक गतिविधियों के बाद अगला कदम है । इस क्षेत्र में वस्तुएँ सीधे प्रकृति से उत्पादित नहीं होती हैं , वरन उन्हें मानवीय क्रियाओं के द्वारा निर्मित किया जाता है । ये क्रियाएँ किसी कारखाने या घर में हो सकती हैं । चूंकि यह क्षेत्र क्रमशः संवर्धित विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है , इसलिए इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है । 

 

  1. तृतीयक क्षेत्र – 

तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती , वरन् उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग करती हैं । 

उदाहरणार्थ- प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को थोक एवं फुटकर बाजारों में बेचने के लिए रेल या ट्रक द्वारा परिवहन करने की आवश्यकता पड़ती है । उद्योगों से बने माल को रखने के लिए गोदामों की आवश्यकता होती है । प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों में उत्पादन करने के लिए बैंकों से ऋण लेने की आवश्यकता होती है । उत्पादन एवं व्यापार में सुविधा के लिए टेलीफोन , इन्टरनेट , पोस्ट ऑफिस , कोरियर सेवाओं आदि की आवश्यकता होती है । इस प्रकार परिवहन , भण्डारण , संचार , बैंक , व्यापार आदि से सम्बन्धित गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्र में आती हैं । इन गतिविधियों के विस्तार से ही आर्थिक विकास को गति मिलती है । चूँकि , तृतीयक क्षेत्र की गतिविधियों से वस्तुओं के स्थान पर सेवाओं का सृजन होता है , अतः इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है । अर्थव्यवस्था में कुछ ऐसी सेवाएँ भी होती हैं , जो वस्तुओं के उत्पादन में प्रत्यक्ष योगदान न देकर अप्रत्यक्ष रुप से सहायता करती है । 

उदाहरण के लिए शिक्षक , डॉक्टर , वकील , लेखाकर्मी , प्रशासनिक आदि की सेवाओं को लिया जा सकता है । धोबी , नाई एवं मोची की सेवाएँ भी महत्वपूर्ण होती हैं । 

वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित सेवाएँ जैसे – इंटरनेट – कैफे , ए.टी.एम. बूथ , काल सेन्टर , सॉफ्टवेयर निर्माण आदि का भी उत्पादन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण स्थान है 

 

प्रश्न 2. एक आय घटक के रूप में सेवा – क्षेत्र के महत्व की व्याख्या कीजिए । 

उत्तर- एक आय घटक के रूप में सेवा – क्षेत्र के महत्व को निम्नानुसार स्पष्ट किया जा सकता है 

 

  1. रोजगार में वृद्धि – 

सेवा – क्षेत्र लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में रोजगार प्रदान करता है । रोजगार के अवसर जुटाने में परिवहन , थोक एवं फुटकर व्यापार , बैंक , शैक्षणिक संस्थाएँ , स्वास्थ्य सेवाएँ , पर्यटन एवं होटल व्यवसाय का योगदान बहुत अधिक है । ये व्यवसाय ऐसे हैं , जो लद्दाख जैसे दुर्गम एवं दूरस्थ स्थानों पर भी रोजगार का सृजन करते हैं । इस प्रकार सेवा – क्षेत्र बेरोजगारी दूर करने एवं लोगों की आय बढ़ाने में सहायक होता है । 

 

  1. उत्पादन में वृद्धि – 

सेवा – क्षेत्र कम लागत पर एवं कम समय में अधिक उत्पादन करने एवं गुणवत्ता में वृद्धि करने में भी सहायक होता है । यह क्षेत्र दो प्रकार से सहायता पहुंचाता है- एक तो कुशल प्रशिक्षित एवं स्वस्थ श्रमिक उपलब्ध कराकर उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाता है । दूसरा , कुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि से उत्पादन एवं आय में वृद्धि करता है । 

 

  1. बाजार का विस्तार करने में सहायक- 

सेवा – क्षेत्र प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्र के उत्पादों के बाजार का विस्तार करने में सहायक होता है । परिवहन की सुविधा से माल एवं यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है । संचार के साधनों द्वारा व्यापारिक सौदे तय किये जाते हैं , या होटल बुक किया जाता है । इससे सभी प्रकार की गतिविधियाँ सरल और सुविधाजनक हो जाती हैं ।

 

  1. उद्योगों हेतु वित्त की व्यवस्था- 

बेंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाएं साख का सृजन करती हैं और सभी प्रकार के उद्योगों के लिए पूँजी की पूर्ति करती हैं , फिर चाहे वित्त की अल्पकालिक आवश्यकता हो या मध्यकालिक अथवा दीर्घकालिक । उद्योगों की स्थापना से लेकर बाजार तक यस्तुएँ पहुँचाने एवं विज्ञापन करने हेतु सभी व्यवस्थाएँ सेवा – क्षेत्र द्वारा की जाती हैं । संक्षेप में , सेवा – क्षेत्र पूँजी सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति कर औद्योगिक विकास में सहायक होता है । 

 

  1. कृषि उपज की सुरक्षा एवं कृषि का विकास- 

निर्धन कृषकों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने का कार्य भी सेवा – क्षेत्र द्वारा किया जाता है । वर्षा – बीमा योजना , फसल – बीमा योजना , कृषि – आय बीमा योजना तथा राष्ट्रीय – बीमा योजना आदि के द्वारा कृषि उपज की अनिश्चितता एवं जोखिम को दूर किया जाता है । साथ ही सेवा – क्षेत्र कृषकों को उन्नत खाद , बीज आदि के क्रय हेतु पूँजी प्रदान कर उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है । इस प्रकार सेवा – क्षेत्र कृषकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाता है तथा कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सहयोग करता है । 

 

प्रश्न 3. सेवा – क्षेत्र का आशय स्पष्ट कीजिए । सेया- के महत्व की व्याख्या कीजिए । 

उत्तर – सेवा – क्षेत्र से आशय – 

अर्थव्यवस्था का वह क्षेत्र , जो अपनी सेवाओं के द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करता है , सेवा – क्षेत्र कहलाता है । जैसे- परिवहन , विपणन , बैंकिंग , शिक्षा , स्वास्थ्य आदि । सेवा क्षेत्र का महत्व निम्नानुसार है 

 

  1. सन्तुलित आर्थिक विकास- 

प्रत्येक देश में कुछ क्षेत्र तुलनात्मक दृष्टि से विकसित हो जाते हैं तथा कुछ क्षेत्र पिछड़े रह जाते हैं । परिवहन , संचार एवं वित्तीय सुविधाओं के विस्तार से पिछड़े क्षेत्रों का विकास होता है । सड़क एवं रेल मार्गों के निर्माण से पहाड़ी एवं दुर्गम स्थानों का भी विकास सम्भव होता है । इससे आर्थिक विकास के लाभ सभी क्षेत्रों के लोगों को प्राप्त होने लगते हैं । 

 

  1. देश की सुरक्षा- 

देश की सुरक्षा में भी सेवा – क्षेत्र का महत्वपूर्ण स्थान है । सैनिकों को सीमाओं तक पहुँचाने और उनकी समुचित व्यवस्था करने के लिए यातायात एवं संचार साधनों की आवश्यकता होती है । सैन्य सामग्री पहुंचाने , सैनिकों के रहने – खाने की व्यवस्था करने , महत्वपूर्ण सूचनाएँ पहुंचाने आदि अनेक कार्यों में सेवा – क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है । 

 

  1. राष्ट्रीय आय में योगदान- 

देश के आर्थिक विकास के साथ – साथ सेवा – क्षेत्र का महत्व क्रमशः बढ़ रहा है । आज शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण सभी में सेवा – क्षेत्र की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं । यही कारण है कि राष्ट्रीय आय का आधे से अधिक भाग अब सेवा – क्षेत्र से प्राप्त हो रहा है 

 

  1. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति- 

पिछले कुछ वर्षों से सेवाओं के निर्यात से भी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है । जहाजरानी एवं हवाई सेवाओं के साथ – साथ पर्यटन एवं वित्तीय सेवाओं से भी हमें विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है । हाल ही के वर्षों में कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर , काल सेन्टर , शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्रों में भी काफी विकास हुआ है और इन सेवाओं से भी विदेशी मुद्रा प्राप्त हो रही है । आगे आने वाले वर्षों में सेवा – क्षेत्र से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त होने की सम्भावना है । 

 

  1. रोजगार अवसरों में वृद्धि – 

सेवा – क्षेत्र के विकास के साथ – साथ रोजगार अवसरों में भी वृद्धि होती जाती है व रोजगार हेतु नये क्षेत्रों का सृजन होता है । 

 

  1. कृषि विकास में सहायक- 

सेवा – क्षेत्र कृषि हेतु वित्त उपलब्ध कराता है , फिर फसल सुरक्षा हेतु बीमा सुविधा उपलब्ध कराता है तथा उत्पादन परिवहन के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर पहुंचाता है । अतः सेवा – क्षेत्र का कृषि में महत्वपूर्ण योगदान होता है । 

 

प्रश्न 4. अधोसंरचना का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसके अंगों के विषय में संक्षेप में लिखिए 

उत्तर- अधोसंरचना का अर्थ – उद्योगों में उत्पादन के लिए मशीनरी , प्रबंध , ऊर्जा , बैंक , बीमा , परिवहन आदि साधनों की आवश्यकता होती है । ये सभी सुविधाएँ एवं सेवाएं सम्मिलित रूप से आधारभूत संरचना कहलाती हैं । दूसरे शब्दों में , अधोसंरचना से अभिप्राय उन सुविधाओं , क्रियाओं तथा सेवाओं से है , जो उत्पादन के अन्य क्षेत्रों के संचालन तथा विकास एवं दैनिक जीवन में सहायक होती हैं । अधोसरंचना के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं 

 

  1. ऊर्जा- 

अधोसंरचना के प्रमुख अंगों में ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्थान है । किसी भी देश का आर्थिक विकास उपलब्ध ऊर्जा के संसाधनों पर निर्भर करता है , क्योंकि कृषि , उद्योग , खनिज , परियहन आदि ऊर्जा के बिना अधूरे हैं । 

 

  1. परिवहन- 

परिवहन अधोसंरचना का एक अन्य महत्वपूर्ण अंग है । किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में परिवहन का महत्वपूर्ण योगदान होता है । परिवहन का महत्व आर्थिक व सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से होता है । परिवहन के साधनों में बैलगाड़ी , बस , ट्रक , ट्रेक्टर , जहाज , रेल , हवाई जहाज आदि शामिल हैं । 

 

  1. संचार साधन- 

संचार साधन अधोसंरचना के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है । संचार सेवाओं के विस्तार से राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में गति आती है । संचार साधनों में इंटरनेट , कम्प्यूटर , डाक प्रणाली , उपग्रह आदि शामिल हैं , जो अर्थव्यवस्था को आधुनिक व विकसित बनाते हैं । 

 

  1. बैंकिंग – 

बीमा एवं वित्त- तीव्र आर्थिक विकास के लिए बैंकिंग बीमा एवं वित्त का महत्वपूर्ण स्थान है । इनसे राष्ट्र में आय , रोजगार एवं विकास दर में वृद्धि होती है । 

 

  1. शिक्षा एवं स्वास्थ्य- 

शिक्षा एवं स्वास्थ्य के अभाव में अर्थव्यवस्था का विकास सम्भव नहीं है । स्वास्थ्य एवं शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र को विकास के पथ पर तीव्र गति से ले जाया जा सकता है । 

 

  1. व्यापार एवं पर्यटन- 

व्यापार एवं पर्यटन विदेशी मुद्रा प्राप्ति में सहायक होते हैं , जिससे भुगतान संतुलन बनाया जा सकता है । इससे राष्ट्र के विकास को बढ़ावा मिलता है । 

 

प्रश्न 5. शिक्षा एवं स्वास्थ्य का आर्थिक विकास में क्या योगदान है ? लिखिए । 

उत्तर- शिक्षा एवं स्वास्थ्य का आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है । शिक्षा एवं स्वास्थ्य के अभाव में आर्थिक विकास सम्भव नहीं है । शिक्षा से नयी विचारधारा व नवीन आविष्कारों का सृजन होता है , जिससे आर्थिक विकास में वृद्धि होती है । शिक्षा उपलब्ध संसाधनों को आर्थिक विकास के अंग में परिवर्तित कर देती है व अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है । शिक्षा से प्राथमिक , द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र का विकास एवं विस्तार होता है , जो स्वतः ही आर्थिक विकास को बढ़ाता है । स्वस्थ जनसंख्या ही कार्यशील जनसंख्या हो सकती है , अतः स्वास्थ्य का भी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है । स्वास्थ्य कार्यशील जनसंख्या की क्षमता में वृद्धि कर उत्पादन में वृद्धि लाता है व अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है , जिससे आर्थिक विकास का मार्ग और प्रशस्त होता है । अतः शिक्षा एवं स्वास्थ्य दोनों ही आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं । 

 

प्रश्न 6. भारत में सेवा – क्षेत्र के विस्तार के कारणों की व्याख्या कीजिए । 

उत्तर- भारत में सेवा – क्षेत्र के विस्तार के निम्नलिखित कारण हैं- 

 

( 1 ) स्वतंत्रता के बाद देश में पंचवर्षीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया इससे देश में सार्वजनिक क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ । देश में अनेक सेवाएँ , जैसे- चिकित्सालय , शैक्षणिक संस्थाएँ , डाक एवं तार , परिवहन , बैंक , बीमा कम्पनी , स्थानीय संस्थाएँ , सुरक्षा सेवाएँ , न्याय व्यवस्था आदि का विस्तार हुआ । फलतः स्वतंत्रता के बाद इन सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ और परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में इनकी भागीदारी तेजी से बढ़ी है । 

( 2 ) देश में प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों का पिछले वर्षों में तेजी से विस्तार हुआ । औद्योगिक क्रान्ति के साथ – साथ देश में हरित क्रान्ति भी सफल रही । इससे परिवहन , व्यापार , भण्डारण , बैंकिंग जैसी सेवाओं की माँग में वृद्धि हुई और परिणामस्वरूप इन सेवाओं का देश में तेजी से विस्तार हुआ है । 

( 3 ) प्रायः यह देखा गया है कि जैसे – जैसे आय बढ़ती है , वैसे – वैसे व्यक्तियों द्वारा अनेक प्रकार की सेवाओं के उपयोग में वृद्धि होती है । आय में वृद्धि होने से व्यक्ति निजी अस्पताल , मँहगे स्कूल , बदलते हुए परिवेश के अनुसार नई – नई वस्तुओं की खरीदी , वाहनों का उपयोग आदि पर अधिक खर्च करने लगता है । शहरों के साथ – साथ गाँवों में भी सेवाओं की मांग में वृद्धि हुई है । फलतः देश में सेवा – क्षेत्र की भागीदारी में तेजी से वृद्धि हुई है । 

( 4 ) पिछले कुछ वर्षों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित अनेक नई – नई सेवाएं जीवन के लिए आवश्यक हो गई हैं । इससे देश में उपभोग के साथ – साथ इन सेवाओं के उत्पादन में भी तीव्र वृद्धि हुई है । ट्यूब लाइटों , टेलीविजनों , केबल कनेक्शन , मोबाइल फोन , मोटर गाड़ियाँ , स्कूटर एवं मोटर साइकिल , कम्प्यूटर और इंटरनेट , कॉल सेन्टर आदि ने भारत में उपभोक्ता वस्तुओं के बाजार को बहुत अधिक विस्तृत कर दिया है । फलतः सेवाओं के योगदान में वृद्धि हुई है । 

( 5 ) वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप भारतीयों पर पश्चिमी देशों का बहुत प्रभाव पड़ा है और उनकी सोच में परिवर्तन आया है । पहले सोच थी कि धन को बचाकर या गाड़कर रखा जाए । किन्तु आज भौतिकवाद पनप गया है । हर व्यक्ति सारी सुख – सुविधाएँ प्राप्त करना चाहता है । सिनेमा , खरीदारी , घर की सजावट , स्कूटर , कार आदि वस्तुएँ आवश्यक समझी जाने लगी हैं । आजकल छुट्टियां बिताने के लिए घूमने जाना आवश्यक समझा जाने लगा है । अतः बैंक , बीमा , पर्यटन , परिवहन , होटल आदि सभी प्रकार की सेवाओं की मांग बहुत अधिक बढ़ गई है । परिणामस्वरूप सेवा – क्षेत्र के योगदान में तेजी से वृद्धि हुई है । 

 

अर्थव्यवस्था : सेवा क्षेत्र एवं अधोसंरचना अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारत में विद्युत की स्थिति पर प्रकाश डालिए । 

उत्तर- भारत में औद्योगीकरण , कृषि में यंत्रीकरण , शहरी जनसंख्या में वृद्धि एवं ग्रामों के विद्युतीकरण के कारण विद्युत की माँग में तेजी से वृद्धि हुई । स्वतंत्रता के बाद से ही विद्युत उत्पादन में वृद्धि के प्रयास किए गए और परिणामस्वरूप जहाँ वर्ष 1951 में केवल 2.3 हजार मेगावाट विद्युत का उत्पादन हुआ था , बढ़कर वर्ष 2005-06 में लगभग 143.8 हजार मेगावाट विद्युत का उत्पादन हुआ । किन्तु विद्युत का उत्पादन माँग की तुलना में कम रहा और देश में विद्युत संकट पैदा हो गया । वर्तमान में स्थिति यह है कि उद्योगों एवं कृषि पर्याप्त मात्रा में विद्युत प्राप्त नहीं हो रही है । शहरी तथा गाँवों में विद्युत् की सतत् पूर्ति नहीं होती । विद्युत् पूर्ति में वृद्धि करने के लिए अब निजी क्षेत्र को भी विद्युत् उत्पादन की अनुमति दे दी गई है । 

 

प्रश्न 2. भारतीय संचार व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए । 

उत्तर- भारत में संचार व्यवस्था विश्व में सबसे बड़ी है । सर्वप्रथम देश में संचार सेवा की शुरुआत सन् 1837 में हुई , किन्तु इन सेवाओं का विस्तार स्वतंत्रता के बाद ही हुआ है । वर्ष 1991 से प्रारम्भ हुए आर्थिक सुधारों ने दूर संचार सेवाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन किए । निजी क्षेत्र की भागीदारी ने इस क्षेत्र को अभूतपूर्व विस्तार दिया । यही कारण है कि वर्ष 2006 के अन्त तक देश में टेलीफोन की संख्या 19 करोड़ हो गई और वर्ष 2007 के अन्त में यह संख्या 25 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है मोबाइल सेट्स अब शहरी क्षेत्रों के साथ – साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक लोकप्रिय हो गए हैं । 

 

दूर संचार सेवाओं के विस्तार के परिणामस्वरूप भारत अब ज्ञान आधारित समाज की ओर तेजी से बढ़ रहा है । इंटरनेट एवं ब्राडबैंड ग्राहकों की संख्या में हो रही तेजी से वृद्धि इसका उदाहरण है । कम्प्यूटरों एवं संचार प्रौद्योगिकी के प्रचार – प्रसार ने डाक प्रणाली को भी आधुनिक बना दिया है । यही कारण है कि भारतीय डाक नेटवर्क अब विश्व के विकसित नेटवों में से एक है । भारत ने उपग्रह प्रणाली विकसित कर ली है तथा यह बहुउद्देश्यीय है । इसका उपयोग दूरसंचार के साथ – साथ मौसम की जानकारी , दूरदर्शन , आकाशवाणी आदि कार्यों में किया जाता है 

 

प्रश्न 3. भारत की कोई दो प्रमुख आयात वस्तुओं के नाम लिखिए । 

उत्तर- भारत मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थ , खाद्य तेल , रासायनिक पदार्थ एवं मशीनरी आदि का आयात करता है । 

 

प्रश्न 4. आयात एवं निर्यात किसे कहते हैं ? 

उत्तर – आयात – 

जब एक देश वस्तुओं को दूसरे देशों से खरीदता है आयात कहलाता है । 

 

निर्यात- 

जब एक देश वस्तुओं को दूसरे देशों में बेचता है , निर्यात कहलाता है । 

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