MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 3 भारत में उद्योग

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 3 भारत में उद्योग

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 3 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए

 

(1) भारत की औद्योगिक नीति की घोषणा किस वर्ष में की गई ? 

(i) 1947 

(ii) 1951 

(iii) 1948 

(iv) 1972

 

(2) भारत के सूती वस्त्र उद्योग की राजधानी ‘ है 

(i) अहमदाबाद 

(ii) मुम्बई 

(iii) इलाहाबाद 

(iv) इन्दौर । 

 

(3) भारत में नोट छापने के कागज बनाने का कारखाना किस स्थान पर है ? 

(i) नेपानगर 

(ii) टीटागढ़ 

(ii) सहारनपुर 

(iv) होशंगाबाद । 

 

(4) राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों का योगदान कितना प्रतिशत है ? 

(i) 23.8 

(ii) 23.00 

(iii) 53.2 

(iv) 35.50 

 

(5) निम्नांकित उद्योगों में से सबसे अधिक वायु प्रदूषण किस में होता है ? 

(i) दियासलाई उद्योग 

(ii) कागज उद्योग 

(iii) रासायनिक उद्योग 

(iv) फर्नीचर उद्योग । 

 

(6) म.प्र . लघु वनोपज व्यापार एवं विकास सहकारी संघ की स्थापना का वर्ष है- 

(i) 1984 

(ii) 1994 

(iii) 2004 

(iv) 1974 

 

उत्तर- (1) (iii) , (2) (ii) , (3) (iv) , (4) (ii) , (5) (iii) , (6) (i) 

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

 

(i) टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी जमशेदपुर ..। राज्य में स्थित है । 

(ii) प्रथम योजना के प्रारम्भ में … व्यक्ति बेरोजगार थे । 

(iii) जिन उद्योगों में पूंजी निवेश 2 से 5 करोड़ रुपये तक है वे उद्योग … कहलाते हैं । 

(iv) … सबसे अधिक कागज उत्पादन करने वाला राज्य है

(v) … एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा इस्पात कारखाना है । 

(vi) भारत में सर्वश्रेष्ठ सूती वस्त्र औद्योगिक केन्द्र … है ।

 

उत्तर- ( i ) झारखण्ड , ( ii ) 33 लाख , ( ii ) लघु उद्योग , ( iv ) पश्चिम बंगाल ( v ) टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी , ( vi ) अहमदाबाद

 

सही जोड़ी मिलाइए 

भारत में उद्योग अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. उद्योग किसे कहते हैं ? 

उत्तर- मनुष्य द्वारा प्राकृतिक कारकों के सहयोग से किसी वस्तु का निर्माण करने का कार्य ‘ उद्योग ‘ कहलाता है । 

 

प्रश्न 2. कागज उद्योग का कच्चा माल क्या है ? 

उत्तर- बाँस , निफर लकड़ी , घास , गन्ना , जूट , कपड़े के चिथड़े आदि कागज उद्योग का कच्चा माल है । 

 

प्रश्न 3. भारत का सबसे बड़ा लोहा – इस्पात कारखाना कौन – सा है ? 

उत्तर- भारत का सबसे बड़ा लोहा इस्पात कारखाना ‘ टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी , जमशेदपुर ‘ है ।

 

प्रश्न 4. प्रदूषण से क्या आशय है ?

उत्तर – वायु , जल और भूमि में किसी भौतिक रासायनिक अथवा जैविक अनचाहे परिवर्तन से , जिससे प्राणी मात्र का स्वास्थ्य सुरक्षा और कल्याण को प्रभावी तौर से हानि पहुँचती है , उसे ‘ प्रदूषण ‘ कहते है । 

 

भारत में उद्योग लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों के कितने प्रकार हैं ? 

उत्तर- स्वामित्व के आधार पर उद्योग निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं 

(अ) निजी उद्योग : ये व्यक्तिगत स्वामित्व में होते हैं । 

(ब) सरकारी उद्योग : ये सरकार के स्वामित्व में होते हैं । 

(स) सहकारी उद्योग : ये सहकारी स्वामित्व में होते हैं । 

(द) मिश्रित उद्योग : ये उपयुक्त में से किन्हीं दो या अधिक के स्वामित्व में होते हैं । 

 

प्रश्न 2. कच्चे माल के आधार पर उद्योग कितने प्रकार के होते हैं ? 

उत्तर- कच्चे माल के आधार पर उद्योग निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं 

(अ) कृषि आधारित उद्योग – जिन्हें कच्चा माल कृषि उत्पाद से प्राप्त होता है , जैसे – सूती वस्त्र उद्योग । 

(ब) खनिज आधारित उद्योग – जिन्हें कच्चा माल खनिजों से प्राप्त होता है , जैसे – लोहा इस्पात उद्योग । 

(स) वन आधारित उद्योग – जिन्हें कच्चामाल वनों से प्राप्त होता है , जैसे- कागज उद्योग । 

 

प्रश्न 3. लोहा – इस्पात उद्योग आधारभूत उद्योग ‘ क्यों कहलाता है ? 

उत्तर- वर्तमान युग में लोहा इस्पात उद्योग किसी भी देश के उद्योगों की आधारशिला है । क्योंकि छोटी से लेकर भीमकाय मशीनें लोहे – इस्पात से ही निर्मित होती हैं । यही नहीं , स्वयं कृषि व्यवसाय भी वर्तमान समय में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लोहा , इस्पात उद्योग पर आधारित होता जा रहा है । छोटी से छोटी आलपीन लोहे से निर्मित होती है , तो रेलवे का भारी – भरकम इंजन तथा विभिन्न प्रकार के टरबाइन व ट्रेक्टर , बुलडोजर आदि भी लोहे से निर्मित होते हैं । 

 

लोहा और इस्पात किसी भी देश के आधुनिकीकरण तथा औद्योगिकीकरण का प्रतीक माना जाता है । वर्तमान समय में लोहा – इस्पात उद्योग स्वर्ण उद्योग से भी अधिक महत्वपूर्ण है । यह सभी उद्योगों का सहायक होता है । यही कारण है कि शासन ने इस उद्योग को सर्वाधिक प्राथमिकता दी है । लोहा – इस्पात उद्योग किसी भी देश की प्रगति एवं शक्ति का सूचक है । इसलिए लोहा – इस्पात उद्योग को ‘ आधारभूत उद्योग ‘ कहा जाता है । 

 

प्रश्न 4. पश्चिम बंगाल में कागज उत्पादक केन्द्र किन – किन स्थानों पर हैं ?

उत्तर- पश्चिम बंगाल में कागज उत्पादक केन्द्र निम्नलिखित स्थानों पर हैं- 

(1) टीटागढ़

(2) रानीगढ़ 

(3) शिवराफूली 

(4) कोलकाता 

(5) नैहाटी 

(6) बड़ानगर 

(7) कॉकिनाडा आदि । 

 

प्रश्न 5. उद्योगों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है ? 

उत्तर- राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों के बढ़ते योगदान से निम्नांकित उद्देश्य की पूर्ति सम्भव हुई

( 1 ) उद्योगों से उत्पादन में वृद्धि होती है , जिससे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है और जीवन – स्तर उन्नत होता है । 

( 2 ) रोजगार के साधनों में वृद्धि होती है तथा मानव संसाधन पुष्ट होते हैं । 

( 3 ) राष्ट्रीय आय में वृद्धि तथा पूँजी का निर्माण होता है । 

( 4 ) उद्योगों के बढ़ते योगदान से अर्थव्यवस्था के अन्य खण्ड- कृषि , खनिज , परिवहन आदि में प्रगति होती है । 

( 5 ) अनुसंधानों को बल मिलता है तथा तकनीकी होती है । 

 

भारत में उद्योग दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भारत में उद्योग कितने प्रकार के हैं ? वर्णन कीजिए । 

उत्तर – 

  1. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों के प्रकार

(अ) निजी उद्योग- ये उद्योग निजी या व्यक्तिगत स्वामित्व में होते हैं । 

(ब) सरकारी उद्योग- ये उद्योग सरकार के स्वामित्व में होते हैं । 

(स) सहकारी उद्योग- ये उद्योग सहकारी स्वामित्व में होते हैं ।

(द) मिश्रित उद्योग- ये उद्योग निजी स्वामित्व , सरकारी स्वामित्व एवं सहकारी स्वामित्व में 

 

  1. उपयोगिता के आधार पर उद्योग

( अ ) आधारभूत उद्योग- वे उद्योग , जो अन्य उद्योगों के आधार होते हैं । इनके उत्पादन अन्य उद्योगों के निर्माण तथा संचालन के काम आते हैं । जैसे लोहा – इस्पात उद्योग । 

( ब ) उपभोक्ता उद्योग- वे उद्योग , जो लोगों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के काम आते हैं । जैसे- वस्त्र , चीनी , कागज आदि । 

 

  1. आकार के आधार पर उद्योग

(अ) वृहद् उद्योग- औद्योगिक इकाइयाँ , जिनमें पूँजी निवेश 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक हैं । जैसे- टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी । 

(ब) मध्यम उद्योग- जिनमें कुल पूँजी निवेश 5 से 10 करोड़ रुपये के मध्य है । जैसे- चमड़ा उद्योग । 

(स) लघु उद्योग जिनमें कुल पूँजी निवेश 2 से 5 करोड़ रुपये तक है । जैसे- लाख उद्योग । 

(द) कुटीर उद्योग- जिनमें पूँजी निवेश नाम मात्र का होता है तथा जो परिवार के सदस्यों की सहायता से चलाए जाते हैं । ग्राम में स्थित होने पर यह ग्रामीण उद्योग तथा नगर में स्थित होने पर नगरीय कुटीर उद्योग कहे जाते हैं । 

 

  1. तैयार माल की प्रकृति के आधार पर उद्योग

(अ) भारी उद्योग- जिनमें भारी वस्तुओं , मशीनों आदि की निर्माण किया जाता है । जैसे- ट्रेक्टर बनाने का कारखाना । 

(ब) हल्के उद्योग- जिनमें दैनिक उपयोग की छोटी – छोटी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है । जैसे – खिलौना उद्योग । 

 

  1. कच्चे माल के आधार पर उद्योग 

(अ) कृषि आधारित उद्योग – वे उद्योग , जिन्हें कच्चा माल कृषि उत्पाद से प्राप्त होता है । जैसे- चीनी या वस्त्र उद्योग । 

(ब) खनिज आधारित उद्योग – वे उद्योग , जिन्हें कच्चा माल खनिजों से प्राप्त होता है । जैसे – लोहा इस्पात उद्योग । 

(स) वन आधारित उद्योग – वे उद्योग , जिन्हें कच्चा माल वनों से प्राप्त होता है । जैसे – कागज उद्योग । 

 

प्रश्न 2. भारत में लोहा इस्पात उद्योग किन चार चरणों में केन्द्रित है और क्यों है ? 

उत्तर- भारत में लोहा – इस्पात का उत्पादन- स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भारत के लोहा – इस्पात उद्योग के व्यवस्थित विकास से उत्पादन में निरन्तर प्रगति हुई है । पिछले कुछ दशकों में उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है , 1970-71 में 70 लाख टन से बढ़कर 2005-06 में 492 लाख टन हो गया । इस्पात उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में नौवाँ स्थान है । इस उद्योग से भारत में 5 लाख से अधिक मनुष्य प्रत्यक्षतः रोजगार प्राप्त कर रहे हैं । 

भारत में लोहा इस्पात उद्योग मुख्यत : चार क्षेत्रों में वितरित है- 

(अ) कोयला क्षेत्रों में स्थित इस्पात केन्द्र- बर्नपुर , हीरापुर , कुल्टी , दुर्गापुर तथा बोकारो । 

(ब) लौह – अयस्क क्षेत्रों में स्थित इस्पात केन्द्र – भिलाई , राउरकेला , भद्रावती , सलेम , विजयनगर और चन्द्रपुर लौह – अयस्क खानों के समीप स्थित है । 

(स) कोयला व लौह – अयस्क के बीच जोड़ने वाले परिवहन सुविधा प्राप्त स्थानों पर स्थित इस्पात केन्द्र – जमशेदपुर । 

(द) तटीय सुविधा स्थल पर स्थित इस्पात केन्द्र – विशाखापट्टनम । 

 

क्र. कारखाने का नाम स्थान राज्य विषेश
1. टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी  जमशेदपुर झारखंड सबसे बड़ा कारखाना
2. इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी  बर्नपुर पश्चिम बंगाल कुल्टी तथा हीरापुर में दो कम्पनी
3. विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील कम्पनी  भद्रावती कर्नाटक —-
4. हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड राउरकेला उड़ीसा जर्मनी की सहायता से बना
5. भिलाई – इस्पात कारखाना भिलाई छत्तीसगढ़ रूसी विशेषज्ञों के सहयोग से बनाया गया
6. दुर्गापुर इस्पात कारखाना दुर्गापुर पश्चिम बंगाल ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित
7. लोहा – इस्पात कारखाना  सलेम तमिलनाडु —-
8. विशाखापट्टनम इस्पात कारखाना विशाखापट्टनम आंध्रप्रदेश केन्द्र व राज्य का संयुक्त उपक्रम
9. बोकारो इस्पात कारखाना  बोकारो झारखण्ड आधुनिकतम तथा इसकी आर.सी.सी. चिमनी एशिया में सबसे ऊँची 
10. विजयनगर इस्पात कारखाना हास्पेट कर्नाटक पूर्णतः भारतीय तकनीक पर आधारित

 

लोहा इस्पात संयंत्र कारखाने का नाम 

( 1 ) टाटा आयरन एण्ड स्टील जमशेदपुर सबसे बड़ा कारखाना कम्पनी 

( 2 ) | इण्डियन आयरन एण्ड स्टील बर्नपुर पश्चिम बंगाल कुल्टी तथा हीरापुर में दो कम्पनी शाखाएँ 

( 3 ) विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील भद्रावती कम्पनी क्र . स्थान राज्य झारखण्ड कर्नाटक

( 4 ) | हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड 

( 5 ) भिलाई – इस्पात कारखाना राउरकेला उड़ीसा जर्मनी की सहायता से बना भिलाई ( दुर्ग , छत्तीसगढ़ रूसी विशेषज्ञों के सहयोग से बनाया गया दुर्गापुर 

( 6 ) दुर्गापुर इस्पात कारखाना पश्चिम बंगाल , ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित 

( 7 ) | लोहा – इस्पात कारखाना सलेम तमिलनाडु 

( 8 ) विशाखापट्टनम इस्पात विशाखा- आन्ध्रप्रदेश केन्द्र व राज्य का संयुक्त कारखाना पट्टनम उपक्रम 

( 9 ) | बोकारो इस्पात कारखाना बोकारो झारखण्ड आधुनिकतम तथा इसकी आर.सी.सी. चिमनी एशिया में सबसे ऊँची 

( 10 ) विजयनगर इस्पात कारखाना हास्पेट कर्नाटक पूर्णतः भारतीय तकनीक पर आधारित .इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी में हीरापुर , कुल्टी और बर्नपुर के कारखानें समाहित हैं ।

 

प्रश्न 3. भारत में कागज उद्योग के उत्पादन व वितरण का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- भारत में कागज का उत्पादन- भारत का कागज उत्पादन की दृष्टि से विश्व में 20 वाँ स्थान है । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के कागज उत्पादन में तीस गुना से भी अधिक वृद्धि हुई है । हमारे देश में उत्पादित होने वाले कागज में 53 % लिखने और छपाई का कागज , 22 % पैकिंग करने का कागज , 16 % गत्ता 6 % अखबारी कागज तथा शेष अन्य विशेष किस्म का कागज है । देश में सभी प्रकार के कागज व गत्ते का उत्पादन 1950-51 में 116 हजार टन था , जो 2000-01 में बढ़कर 3,090 हजार टन हो गया ।

 

प्रश्न 4. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों के योगदान का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- उद्योगों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान – औद्योगिक आयोग के अनुसार ईसा से पूर्व भी भारत एक औद्योगिक देश था । भारत में निर्मित , मलमल , रेशमी कपड़ा , आभूषण आदि विदेशों को निर्यात किए जाते थे , परन्तु 18 वीं शताब्दी के मध्य में यूरोप में हुई औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप यहाँ के परम्परागत कुटीर उद्योग को भारी क्षति हुई । भारत की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों का स्थान धीरे – धीरे सीमित होता गया और भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान हो गई । स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश के आर्थिक विकास हेतु औद्योगिक विकास की आवश्यकता को महसूस किया गया । सन् 1950 में ‘ राष्ट्रीय योजना आयोग ‘ की स्थापना हुई । पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से भारत के औद्योगिक विकास हेतु चरण बद्ध लक्ष्य तक किए गए । राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों के बढ़ते योगदान से निम्नांकित उद्देश्यों की पूर्ति संभव हुई- 

 

( 1 ) उद्योगों से उत्पादन में वृद्धि होती है जिससे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होती है और जीवन – स्तर उन्नत होता है । 

( 2 ) रोजगार के साधनों में वृद्धि होती है तथा मानव संसाधन पुष्ट होते हैं । 

( 3 ) राष्ट्रीय आय में वृद्धि तथा पूँजी का निर्माण होता है । 

( 4 ) उद्योगों के बढ़ते योगदान से अर्थव्यवस्था के अन्य खण्ड – कृषि , खनिज , परिवहन आदि में प्रगति होती हैं । 

( 5 ) अनुसंधानों को बल मिलता है तथा तकनीकी विकसित होती है । 

प्रश्न 5. औद्योगिक प्रदूषण पर प्रकाश डालिए ।

उत्तर- वायु , जल और भूमि में किसी भौतिक , रासायनिक अथवा जैविक अनचाहे परिवर्तन से , जिससे प्राणी मात्र के स्वास्थ्य , सुरक्षा और कल्याण को प्रभावी तौर से हानि पहुँचती हो , उसे प्रदूषण कहते हैं । औद्योगिक प्रगति ने अर्थव्यवस्था को विकसित व उन्नत बनाने में जहाँ अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया वहीं दूसरी ओर पर्यावरण सम्बन्धी ऐसी कठिनाइयों को जन्म दिया जो आज विकराल रूप से हमारे समक्ष खड़ी हैं । 

औद्योगीकरण से होने वाले प्रमुख प्रदूषण निम्नलिखित हैं 

  1. वायु प्रदूषण- 

कारखानों से निकलने वाली हानिकारक गैसें व धुंआ वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं । विभिन्न उद्योगों से होने वाले प्रदूषण की मात्रा एवं प्रकृति , उद्योग के प्रकार , प्रयुक्त होने : वाले कच्चे माल एवं निर्माण आदि पर निर्भर करती है । इन उद्योगों से वायु मण्डल में कार्बन डाइ मिल जाते हैं , जो वायु को प्रदूषित करते हैं । ऑक्साइड , कार्बन मोनोऑक्साइड , सल्फर डाइऑक्साइड , धूल आदि हानिकारक व विषैले तत्व 

  1. जल प्रदूषण-

जल जीवन का आधार है । जल में अवांछित तत्वों का मिश्रण जल को प्रदूषित कर देता है । औद्योगिक उत्पादन हेतु कारखानों में जल का उपयोग किया जाता है । औद्योगिक प्रक्रिया के दौरान जल में अनेक हानिकारक पदार्थ , लवण , अम्ल , रसायन तथा गैसें घुल मिल जाती हैं । उद्योगों से निकला हुआ यह जल जलाशयों अथवा नदियों में जाकर मिलता है । इस जल का । उपयोग या सम्पर्क प्राणियों और वनस्पतियों के लिए घातक होता है ।

 

  1. भूमि प्रदूषण-  

औद्योगिक अपशिष्ट का भूतल पर फैलाव भूमि प्रदूषण का कारण बनता है इस प्रकार के अपशिष्ट में अनेक ऐसे पदार्थ होते हैं , जो प्राकृतिक रूप में घटित नहीं होते तथा इनका प्रकृति में पुनः चक्रीकरण नहीं होता , जिससे भूमि की गुणवत्ता में कमी आती है , इसे भूमि प्रदूषण कहते हैं । औद्योगिक कचरे में रासायनिक दुर्गन्धयुक्त , ज्वलनशील विषैले पदार्थ पर्यावरण को are पहुँचाते हैं । भूमि प्रदूषण को ‘ मृदा प्रदूषण ‘ भी कहते हैं । 

 

  1. ध्वनि प्रदूषण- 

वातावरण में ऐसी कोई भी ध्वनि , जो कानों को प्रिय न लगे , मानसिक क्रियाओं में बाधा डाले अर्थात् ‘ शोर ‘ ही ध्वनि प्रदूषण का मुख्य रूप है । उद्योगों में अनेक प्रकार की मशीनें प्रयोग की जाती हैं , जिनसे निरन्तर शोर होता रहता है । इसके अतिरिक्त कारखानों में जनरेटा भी चलाए जाते हैं । इन सभी से निरन्तर और अधिक शोर होता है । इससे इनमें कार्य करने वाले श्रमिक अनेक मानसिक रोगों तथा बहरेपन के शिकार हो जाते हैं । 

 

प्रश्न 6. औद्योगिक प्रदूषण को नियन्त्रित करने के उपाय बताइए । 

उत्तर- वायु प्रदूषण नियन्त्रण के उपाय- 

( 1 ) कल – कारखानों की चिमनियों उनसे निकलने वाली हानिकारक गैसों के प्रभाव को कम किया जा सकता है । 

( 2 ) उद्योगों में कम प्रदूषण करने वाली प्रौद्योगिकी को अपनाया जाना चाहिए । 

( 3 ) उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगाए जाने चाहिए । 

( 4 ) कारखाने की स्थापना से पूर्व ही प्रदूषण का अनुमान लगाकर उसको नियंत्रित करने के साधन , जैसे – वनस्पति आवरण आदि कारखाना – परिसर में विकसित किया जाना चाहिए । 

 

जल प्रदूषण नियंत्रण के उपाय- 

( 1 ) रासायनिक उद्योग , जो कि जल को सर्वाधिक प्रदूषित करते हैं , को जलाशयों व नदियों से दूर स्थापित किया जाना चाहिए । 

( 2 ) उद्योगों में प्रयोग किए गए जल को जलाशय व नदियों में सीधे विसर्जित नहीं करना चाहिए । बल्कि इस जल का उपचार कर इसे सिंचाई के उपयोग में लाना चाहिए । 

( 3 ) उद्योगों में प्रयोग किए गए जल के उपचार की व्यवस्था कारखाने की स्थापना के साथ ही की जानी चाहिए । 

( 4 ) सड़क के किनारे तथा कारखानों के निकट खाली स्थानों पर वृक्ष लगाए जाने चाहिए । 

 

भू – प्रदूषण नियंत्रण के उपाय- 

( 1 ) औद्योगिक अपशिष्टों के निक्षेपण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए । अपशिष्ट निक्षेपण खुले स्थानों में नहीं होना चाहिए । 

( 2 ) अपशिष्टों को आधुनिक तकनीक से जलाकर उससे उत्पन्न ताप को ऊर्जा के रूप में प्रयोग किया जा सकता है । इससे अपशिष्ट का लगभग 80 % भाग नष्ट हो जाता है तथा अपशिष्ट के जलने से उत्पन्न वायु प्रदूषण को भी नियन्त्रित किया जा सकता है । 

( 3 ) अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद बनाकर उसे उपयोगी बनाया जा सकता है । 

( 4 ) औद्योगिक संस्थानों को अपने अपशिष्ट पदार्थों को बिना उपचार किए विसर्जित करने से रोका जाना चाहिए । 

 

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय-

(1) कल – कारखानों को शहर से दूर स्थापित करना चाहिए ।

( 2 ) उद्योगों द्वारा उत्पन्न शोर को कम करने के लिए नवीन तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए । इसके लिए शोर – शोषक दीवारें भी बनाई जा सकती हैं । 

( 3 ) उद्योगों में मशीनों का रखरखाव सही करके , मशीनों का शोर कम किया जा सकता है । खराब मशीनें शोर अधिक करती हैं । 

( 4 ) अधिक शोर उत्पन्न करने वाले कारखानों में श्रमिकों को कर्ण बन्दकों का प्रयोग अनिवार्य कर देना चाहिए । 

 

प्रश्न 7. मध्यप्रदेश में वन क्षेत्रों में कुटीर एवं लघु उद्योग की स्थापना हेतु सुझाव दीजिए ? 

उत्तर- कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग की स्थापना करने हेतु कुछ प्रयास अनिवार्य हैं । यहाँ कुछ सुझाव प्रस्तुत है – 

 

  1. वित्तीय सुविधा- 

उद्योग कोई सा भी लगाया जाए कम या अधिक मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है । आदिवासी एवं वनवासियों को इसकी बहुत अधिक कमी होती है । अतः प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण आपूर्ति की भी व्यवस्था उद्योग स्थापना के लिए आर्थिक सहायता से की जाना चाहिए । 

 

  1. कार्यस्थल की व्यवस्था- 

उद्योग चलाने के लिए उपयुक्त कार्यस्थल की व्यवस्था वनवासी स्वयं नहीं कर सकते अतः इसकी व्यवस्था भी सहकारी समितियों व शासन द्वारा आर्थिक सहायता से की जाना चाहिए ।

 

  1. तकनीकी सहायता- 

इसी प्रकार अच्छे उत्पादन हेतु तकनीकी ज्ञान की आवश्यक्ता भी होती है । अतः क्षेत्रीय उद्योग की आवश्यक्ता को देखते हुए तकनीशियनों की सुविधा उपलब्ध कराई जाना चाहिए । 

 

  1. विपणन की व्यवस्था- 

वनोपज आधारित कुटीर एवं लघु उद्योग उसी शर्त पर सफल हो सकते हैं , जबकि उनके उत्पादों की बिक्री की उचित व्यवस्था हो । माल के बिकने से ही आय की प्राप्ति होगी । राज्य सरकार हेतु मेले एवं प्रदर्शनियों का आयोजन करती है । किन्तु इससे वर्ष भर की बिक्री की व्यवस्था नहीं हो पाती अतः मेले एवं प्रदर्शनियों के साथ – साथ झके सहकारी बिक्री स्टोर्स आदि की व्यवस्था भी होना चाहिए । 

 

  1. विज्ञापन की व्यवस्था- 

आज का युग विज्ञापनों का युग है । हर उत्पाद की बिक्री विज्ञापनों के माध्यम से ही होती है । जितना बड़ा उत्पादक होता है वह उतना ही अधिक विज्ञापनों पर खर्च करता है । विज्ञापनों से जहां उत्पादों तथा उनकी विशेषताओं की जानकारी लोगों को प्राप्त होती है वहीं आकर्षक विज्ञापन क्रेताओं की संख्या बढ़ाने में सहायक होते हैं । हमारे कुटीर व लघु उद्योग चलाने वाले उत्पादकों के पास इतने संसाधन नहीं होते कि वे विज्ञापन पर खर्च कर सकें । अतः यह दायित्व भी प्रशासन का होता है कि वे इनका प्रचार – प्रसार करवाए । सरकार का मेले , प्रदर्शनियों का आयोजन करने का यह एक प्रमुख उद्देश्य होता है । 

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. हमारे देश में औद्योगिक विकास के लिए कौन – कौन सी अनुकूल परिस्थितियाँ विद्यमान हैं ? 

उत्तर- 

( 1 ) धरातलीय दशाएँ उद्योगों की स्थापना के अनुकूल हैं , 

( 2 ) अधिकांश प्रदेशों में जलवायु दशाएँ सामान्य हैं , 

( 3 ) देश में सस्ता श्रम उपलब्ध है , 

( 4 ) खनिज , वन व कृषि आधारित कच्चे माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं । 

( 5 ) परिवहन तन्त्र का फैलाव समुचित है तथा 

( 6 ) सघन जनसंख्या से विशाल बाजार उपलब्ध हैं । 

 

प्रश्न 2. प्रदूषण के मानव – जीवन पर दुष्प्रभाव लिखिए ।

उत्तर- मानव – जीवन पर प्रदूषण के निम्नलिखित दुष्प्रभाव हैं- 

( 1 ) प्रदूषित वायु , मानव की श्वसन क्रिया को क्षति पहुँचाती है । इससे दमा , निमोनिया , गले में दर्द , खाँसी के साथ ही कैंसर , मधुमेह और हृदय रोग जैसे घातक रोग होते हैं तथा हानिकारक गैसों का . वायुमण्डल में अधिक मिश्रण भीषण हादसों को जन्म देता है , जिससे मनुष्य मौत के शिकार हो जाते हैं । भोपाल गैस त्रासदी इसी प्रकार की औद्योगिक गैस रिसाव का परिणाम थी । 

( 2 ) प्रदूषित पेय जल , अनेक रोगों के कीटाणु , विषाणु मनुष्य के शरीर में पहुँचाकर रोगों को उत्पन्न कर देता है । प्रदूषित जल के सेवन से पेचिश , हैजा , अतिसार , टायफाइड , चर्मरोग , खाँसी , जुकाम , लकवा , अन्धापन , पीलिया व पेट के रोग हो जाते हैं । 

( 3 ) गंदगी के क्षेत्रों एवं प्रदूषित चीजों पर मक्खी , मच्छर , कीड़े आदि पनपते हैं । गन्दगी युक्त वातावरण में अनेक कीटाणु पैदा होते हैं , जो मनुष्य के लिए पेचिश , तपेदिक , हैजा , आँतों के रोग , आँखों में जलन आदि रोगों हेतु उत्तरदायी होते हैं । 

( 4 ) ध्वनि प्रदूषण का सर्वाधिक प्रभाव सुनने की शक्ति पर पड़ता है । अत्यधिक शोर से व्यक्ति बहरा हो जाता है । इसके अतिरिक्त इससे रक्तचाप , हृदयरोग , सिरदर्द , घबराहट आदि रोग भी मनुष्य में पनप जाते हैं । औद्योगीकरण से बढ़ते प्रदूषण और वायुमण्डल में बिखरती कार्बन डाइ ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड से ‘ ग्रीन हाऊस ‘ प्रभाव का जन्म हुआ है । सूर्य की गर्मी के वायुमण्डल में कैद हो जाने से धरती के औसत ताप में वृद्धि हो रही है , जिससे भू – तापन ( ग्लोबल वार्मिंग ) होने लगी है । इसके दुष्परिणामों को पृथ्वी पर होने वाले महाप्रलय के रूप में आंका जा रहा है । 

 

प्रश्न 3. भारत में वस्त्र उद्योग के वितरण पर एक लेख लिखिए । 

उत्तर -1. महाराष्ट्र- 

वस्त्र उत्पादन में भारत में महाराष्ट्र प्रथम स्थान पर है । यहाँ सूती वस्त्र की कुल 119 मिलें हैं , जिनमें से 101 में कताई और बुनाई दोनों कार्य किए जाते हैं । शेष 18 मिल केवल सूत कताई का कार्य करती हैं । मुम्बई यहाँ का प्रमुख औद्योगिक केन्द्र है । यहाँ 54 सूती वस्त्र मिल हैं । इस राज्य में सूती बस्त्र के अन्य केन्द्र शोलापुर , पुणे , नागपुर , वर्धा , अमरावती , अकोला , औरंगाबाद आदि स्थानों पर हैं ।

 

  1. गुजरात – 

इसका दूसरा स्थान है । यहाँ के 118 मिलों में से 24 कताई – बुनाई की तथा 24 कताई की मिले हैं । अहमदाबाद इस राज्य का ही नहीं , बल्कि सम्पूर्ण देश का सर्वश्रेष्ठ ‘ सूती व औद्योगिक केन्द्र है । इस नगर में 69 मिलें हैं । इस राज्य में अन्य सूती वस्त्र उद्योग के केन्द्र बड़ोदरा , भरूच , सूरत , भावनगर , राजकोट आदि हैं । 

 

  1. तमिलनाडु- 

सूती वस्त्र उत्पादन में यह राज्य देश में तीसरे स्थान पर है । यहाँ इस उद्योग की छोटी – छोटी मिलें हैं , जिनकी संख्या 439 है । अधिकांश मिलें सूत कताई का कार्य करती हैं । इस राज्य में इस उद्योग की स्थापना का श्रेय विद्युत उत्पादन को है । कोयम्बटुर यहाँ का प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग का स्थान है , जिसे दक्षिण भारत का ‘ मेनचेस्टर ‘ कहा जाता है । राज्य में अन्य केन्द्र मदुरई , चेन्नई , तिरुन्नवैली , सेलम , पेराम्बूर आदि हैं । इनके अलावा पश्चिम बंगाल में हावड़ा और श्रीरामपुर प्रमुख केन्द्र हैं । उत्तर प्रदेश में कानपुर राज्य का सबसे बड़ा सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र है , जिसे उत्तर भारत का ‘ मेनचेस्टर ‘ कहा जाता है । अन्य केन्द्र वाराणसी , आगरा , हाथरस , मुरादाबाद , रामपुर , लखनऊ आदि हैं । मध्यप्रदेश में प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग के केन्द्र ग्वालियर , इन्दौर , उज्जैन , सतना , जबलपुर , भोपाल , रतलाम तथा देवास हैं । कर्नाटक में मैसूर , बेंगलूर , मंगलौर , बल्लारि तथा चित्रदुर्ग हैं । आन्ध्रप्रदेश में हैदराबाद , बारंगल , गंटूर , सिकन्दराबाद , केरल में कणान्नूर , तिरूवनंतपुरम , अनन्तपुर तथा राजस्थान में जयपुर , किशनगढ़ , भीलवाड़ा , अजमेर प्रमुख केन्द्र हैं । 

 

प्रश्न 4. भारत के खनिज तेल उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- 

(अ) कोयला क्षेत्रों में स्थित इस्पात केन्द्र- बर्नपुर , हीरापुर , कुल्टी , दुर्गापुर तथा बोकारो । 

(ब) लौह – अयस्क क्षेत्रों में स्थित इस्पात केन्द्र- भिलाई , राउरकेला , भद्रावती , सलेम , विजयनगर और चन्द्रपुर लौह – अयस्क खानों के समीप स्थित हैं । 

(स) कोयला व लौह – अयस्क के बीच जोड़ने वाले परिवहन सुविधा प्राप्त स्थानों पर स्थित इस्पात केन्द्र- जमशेदपुर । 

(द) तटीय सुविधा स्थल पर स्थित इस्पात केन्द्र – विशाखापत्तनम ।

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